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उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025 को योगी कैबिनेट की मंजूरी

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं वाले आधुनिक बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां वैश्विक कंपनियों के कार्यालय, आरएंडडी और जीसीसी स्थापित होंगे। योजना डीबीएफओटी मॉडल पर लागू होगी और न्यूनतम 10 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है। साथ ही ग्रेटर नोएडा में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क और सम्भल में इंडस्ट्रियल क्लस्टर जैसी परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है।

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025” को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत प्रदेश में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित कर वैश्विक निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति दी जाएगी। योजना के अंतर्गत प्रदेश में ऐसे बिजनेस पार्क विकसित किए जाएंगे, जहां वैश्विक निगमों के कार्यालय, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) केंद्र, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) तथा संचालन केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे। इन पार्कों में रेडी-टू-ऑपरेट और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे सेवा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा।

रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर से घटेगी लागत और समय
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार ने बताया कि अभी तैयार इंफ्रास्ट्रक्चकर के अभाव में परियोजनाओं में देरी और लागत वृद्धि होती है। यह योजना इस समस्या का समाधान करते हुए आधुनिक व रेडी-टू-यूज इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराएगी, जो प्रदेश की औद्योगिक निवेश नीतियों का पूरक बनेगा। विश्वस्तरीय बिजनेस पार्क्स की स्थापना से औद्योगिक सेटअप में तेजी आएगी, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा, हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे, राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप को समर्थन मिलेगा और औद्योगिक क्लस्टरिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही साझा जोखिम (रिस्क शेयरिंग) मॉडल को प्रोत्साहन मिलेगा।

डीबीएफओटी मॉडल पर होगा विकास
योजना को डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, आपरेट एवं ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इसके माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा, जिससे परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों की रियायत अवधि पर विकसित किया जाएगा, जिसे आगे 45 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। इसके बाद विकसित संपत्तियां राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएंगी। प्रत्येक बिजनेस पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि का प्रावधान किया गया है। हालांकि, स्थान विशेष की उपलब्धता और उपयुक्तता के आधार पर इसमें लचीलापन भी रखा गया है। योजना की वित्तीय संरचना में अपफ्रंट लैंड प्रीमियम और राजस्व भागीदारी शामिल होगी।

निजी डेवलपर पर पूरी जिम्मेदारी
चयनित डेवलपर को योजना के तहत डीबीएफओटी की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी। रियायत अवधि के दौरान डेवलपर को परियोजना के सभी पहलुओं का प्रबंधन करना होगा। योजना लागू होने के बाद संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरण या सरकारी भूमि स्वामित्व एजेंसियां आवेदन और बोली प्रक्रिया संचालित करेंगी। इसमें प्रस्ताव आमंत्रण, प्रारंभिक जांच और तकनीकी मूल्यांकन शामिल होगा। प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए एक स्क्रीनिंग समिति गठित की जाएगी, जो शॉर्टलिस्ट आवेदकों की सिफारिश आवंटन समिति को करेगी। अंतिम भूमि आवंटन का निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा लिया जाएगा।

नियमित प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य
विकासकर्ता को अर्धवार्षिक आधार पर प्रगति एवं वित्तीय रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें भौतिक प्रगति, व्यय का विवरण और समय-सीमा के अनुपालन की जानकारी शामिल होगी। यह रिपोर्ट नामित प्राधिकरण को सौंपी जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सभी निविदाएं राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) दिशा-निर्देशों के अनुसार जारी की जाएंगी। प्रत्येक निविदा के लिए संबंधित प्राधिकरण को अपने प्रशासनिक विभाग से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। यह योजना कैबिनेट से अनुमोदित होने के बाद अधिसूचना जारी होने की तिथि से प्रभावी होगी। इसके बाद प्रदेश की विभिन्न भूमि स्वामित्व एजेंसियां बिजनेस पार्क विकास के लिए इस नीति को अपनाएंगी।

सम्भल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत गंगा एक्सप्रेसवे के निकट जनपद सम्भल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) की स्थापना हेतु अवस्थापना विकास कार्यों को मंजूरी दे दी गई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के अंतर्गत 29 स्थलों पर प्रस्तावित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना के तहत यह क्लस्टर विकसित किया जाएगा, जिसमें सड़क, आरसीसी नालियां, कल्वर्ट, फायर स्टेशन, अवर जलाशय, जलापूर्ति लाइन, फेंसिंग, विद्युत सहित आधुनिक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। परियोजना का निर्माण ईपीसी मॉडल पर किया जाएगा तथा प्रस्तावित 293.59 करोड़ रुपये की लागत के सापेक्ष वित्त समिति द्वारा अनुमोदित 245.42 करोड़ रुपये की धनराशि पर कैबिनेट ने अंतिम स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना से सम्भल क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

1000 करोड़ रुपये निवेश वाली परियोजनाओं को मिलेगा प्रोत्साहन, भूखंड आवंटन के लिए अपनाया जाएगा ई-नीलामी मॉडल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024” के तहत ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ भूमि पर मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना के लिए नियम, शर्तें और ब्रोशर को मंजूरी दे दी गई है। राज्य सरकार की नीति के तहत न्यूनतम 1000 करोड़ रुपये के निवेश वाली मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा। ऐसी परियोजनाओं को 30% फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जो केवल सरकारी या औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा लीज पर आवंटित भूमि पर ही अनुमन्य होगी। उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) ने ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) बोर्ड, मूल्यांकन समिति और औद्योगिक विकास विभाग की संस्तुति के आधार पर चयनित बिडर को 30% लैंड सब्सिडी देने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसी के अनुरूप कैबिनेट ने अंतिम अनुमोदन प्रदान किया।

ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ भूमि पर विकसित होगा पार्क
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा सेक्टर कप्पा-02 (पूर्व में कप्पा-11) में स्थित लगभग 174.12 एकड़ (7,04,664 वर्ग मीटर) भूखंड पर इस मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क की स्थापना की जाएगी। इसके लिए तैयार योजना के नियम और शर्तों को उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा भी अनुमोदित किया जा चुका है। भूखंड के आवंटन के लिए ई-नीलामी मॉडल अपनाया जाएगा। भारत में पंजीकृत साझेदारी फर्म, एलएलपी, निजी या सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियां इसमें भाग ले सकेंगी, जबकि कंसोर्टियम या ज्वाइंट वेंचर को निविदा में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।

11,000 रुपये प्रति वर्गमीटर तय हुआ रिजर्व प्राइस
भूखंड का आरक्षित मूल्य 11,000 रुपये प्रति वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। 30% फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी की गणना इसी रिजर्व प्राइस के आधार पर की जाएगी, जैसा कि नीति में प्रावधानित है। सफल बोलीदाता को परियोजना 7 वर्षों में पूर्ण करनी होगी, जिसमें पहले 3 वर्षों में कम से कम 40% कार्य पूरा करना अनिवार्य होगा। विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 2 वर्षों का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। परियोजना के पूर्ण संचालन और निर्धारित निवेश प्रतिबद्धताओं की पूर्ति से पहले आवंटी को परियोजना से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिससे परियोजना की गंभीरता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026 को कैबिनेट की मंजूरी
योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर आधारित “प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स योजना-2026” को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य 1 ट्रिलियन डॉलर जीएसडीपी लक्ष्य के अनुरूप औद्योगीकरण को गति देना, विनिर्माण क्षमता बढ़ाना और उद्योगों की शीघ्र स्थापना सुनिश्चित करना है।

वर्तमान लीज-एंड-बिल्ड मॉडल में उद्यमियों को भूमि लेने के बाद भवन, आंतरिक सड़क, ड्रेनेज, एसटीपी/ईटीपी और अग्निशमन जैसी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे उत्पादन शुरू होने में 18-36 माह लग जाते हैं, जबकि इस योजना के तहत पूर्व-निर्मित, उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स उपलब्ध कराकर एमएसएमई सहित उद्योगों को तुरंत संचालन योग्य इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे लागत घटेगी, उत्पादन तेजी से शुरू होगा और रोजगार सृजन बढ़ेगा। योजना में माइल्ड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल-इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल-गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक पैकेजिंग, डिफेंस-एयरोस्पेस और ईएसडीएम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि औद्योगिक विकास प्राधिकरण आवश्यकता अनुसार क्षेत्र-विशिष्ट सुविधाएं भी प्रदान करेंगे।

इसके तहत भूमि का स्वामित्व प्राधिकरण के पास रहेगा और निजी डेवलपर (कन्सेशनायर) 45 वर्ष (अधिकतम 15 वर्ष विस्तार योग्य) के लिए डिजाइन, वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और अनुरक्षण करेगा तथा उद्योगों को सब-लीज पर शेड्स उपलब्ध कराएगा। न्यूनतम 10 एकड़ भूमि (पायलट हेतु 15-20 एकड़ वरीयता) निर्धारित की गई है और न्यूनतम विकास दायित्व (MDO) तय कर भूमि के अनावश्यक संचयन को रोका जाएगा। योजना पूरी तरह वित्तीय अनुशासन पर आधारित है, जिसमें कोई बजटीय सहायता, वीजीएफ या सरकारी गारंटी नहीं होगी, जबकि प्राधिकरण को प्रीमियम, वार्षिक शुल्क और रेवेन्यू शेयर के माध्यम से आय प्राप्त होगी तथा परियोजना अवधि पूर्ण होने पर सभी परिसंपत्तियां उपयोग योग्य स्थिति में वापस प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।

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