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हौसले से बदली तकदीर: पूजा चौधरी ने खड़ा किया 80 लाख वार्षिक टर्नओवर वाला डेयरी साम्राज्य

अलीगढ़ के इगलास क्षेत्र की पूजा चौधरी ने दृढ़ संकल्प और मेहनत से आधुनिक डेयरी उद्योग में नई पहचान बनाई है। वर्ष 2023 में 50 लाख रुपये के निवेश से ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ की स्थापना कर उन्होंने पनीर, घी, फुलक्रीम दूध व छाछ का बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया। आज उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। 35 लोगों को रोजगार और 70 किसानों से दूध आपूर्ति के जरिए उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है।

  • 50 लाख के निवेश से ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ की शुरुआत, 35 लोगों को रोजगार और 70 किसानों को स्थायी आय

लखनऊ : अलीगढ़ जनपद के इगलास क्षेत्र के कलवारी गांव से निकली एक साधारण सी बहू ने अपने असाधारण हौसले से सफलता की नई इबारत लिख दी। पूजा चौधरी ने यह साबित कर दिया कि यदि संकल्प मजबूत हो, तो सीमित संसाधन भी बड़े सपनों के रास्ते में बाधा नहीं बनते। आज उनका ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ न केवल जिले बल्कि मथुरा-वृंदावन, हाथरस और आसपास के क्षेत्रों में गुणवत्ता का भरोसेमंद नाम बन चुका है। उनका वार्षिक कारोबार 80 लाख रुपये तक पहुंच गया है।

छोटे व्यवसाय से आधुनिक डेयरी तक का सफर

विवाह के बाद जब पूजा ससुराल पहुंचीं, तब परिवार दूध के छोटे कारोबार से जुड़ा था। वर्ष 2008 में कामधेनु डेयरी योजना के तहत शुरू हुआ यह बूथ सीमित स्तर पर संचालित हो रहा था। पूजा ने व्यवसाय को संगठित और विस्तारित करने का सपना देखा। वर्ष 2023 में उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर हरजीगढ़ी गांव में आधुनिक ऑटोमेटिक डेयरी प्लांट की स्थापना की।

यह निर्णय आसान नहीं था। जमीन की व्यवस्था, विभागीय प्रक्रियाएं और ऋण स्वीकृति में समय लगा, लेकिन पूजा ने धैर्य और दृढ़ता नहीं छोड़ी। उनके पति रोहिताश और परिवार का सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ बना गुणवत्ता का प्रतीक

आज ‘शिव मिल्क प्रोडक्ट’ के अंतर्गत पनीर, घी, मावा, पाउच पैक फुलक्रीम दूध और छाछ का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। आधुनिक मशीनों से तैयार इन उत्पादों की नियमित आपूर्ति विभिन्न जिलों में की जाती है। लगभग 20 डीलर विभिन्न क्षेत्रों में इन उत्पादों का वितरण कर रहे हैं।

पूजा ने गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उत्पादन और वितरण की सुव्यवस्थित प्रणाली विकसित की। यही कारण है कि कम समय में उनका कारोबार तेजी से बढ़ा और अच्छा मुनाफा देने लगा।

रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

पूजा का यह उद्यम केवल व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की मिसाल भी है। डेयरी प्लांट के माध्यम से 35 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। वहीं 70 किसानों से दूध आपूर्ति का अनुबंध कर उन्हें स्थायी आय का स्रोत प्रदान किया गया है।

गांव-गांव जाकर पूजा ने महिलाओं को उन्नत पशुपालन के लिए प्रेरित किया और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। आज 35 से अधिक लोग नियमित रूप से दूध संग्रह कर डेयरी तक पहुंचा रहे हैं।

बहू से बनीं महिला उद्यमिता की पहचान

अक्सर यह माना जाता है कि विवाह के बाद महिलाओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित हो जाती है। लेकिन पूजा चौधरी ने इस सोच को बदल दिया। राजकीय कन्या महाविद्यालय से स्नातक पूजा शुरू से व्यवसाय करना चाहती थीं। परिवार के प्रोत्साहन ने उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी।

आज पूजा केवल एक सफल उद्यमी ही नहीं, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि की महिलाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त प्रतीक बन चुकी हैं। उनका सफर बताता है कि जब सपनों को परिवार का साथ और मेहनत का संबल मिलता है, तो सफलता की हर मंजिल आसान हो जाती है।

पूजा चौधरी की कहानी यह संदेश देती है कि आत्मनिर्भर भारत की नींव गांवों में खड़ी हो रही है-जहां हौसला, परिश्रम और विश्वास मिलकर परिवर्तन की नई गाथा लिख रहे हैं।

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