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निश्छल मन के ‘योगी बाबा’: बच्चों के प्रति स्नेह और संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बच्चों के प्रति अपने स्नेह और संवेदनशीलता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं। कानपुर की खुशी के उपचार से लेकर अंजना के मकान को कब्जामुक्त कराने और पंखुड़ी की फीस माफ कराने तक उन्होंने कई बच्चों के जीवन में उम्मीद जगाई है। जनता दर्शन हो या विदेश दौरा, मुख्यमंत्री बच्चों से आत्मीय संवाद कर उनमें संस्कार, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की प्रेरणा भरते हैं।

  • सख्त प्रशासक की छवि के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कोमल पक्ष, बच्चों की शिक्षा, उपचार और सुरक्षा को दिया सर्वोच्च प्राथमिकता

लखनऊ : “काबिले तारीफ है, अंदाज एक-एक काम का, गा रहा है गीत यूपी, योगी जी के नाम का।” यह पंक्तियाँ आज प्रदेश की जनभावना का प्रतिबिंब बन चुकी हैं। सुशासन, सख्ती और निर्णय क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक और रूप है-‘बाल मन के योगी बाबा’। बच्चों के प्रति उनका स्नेह, आत्मीयता और संवेदनशील व्यवहार उन्हें न केवल एक प्रशासक, बल्कि एक संरक्षक की पहचान भी देता है।

प्रदेश के 25 करोड़ नागरिकों के बीच लोकप्रिय मुख्यमंत्री बच्चों के लिए विशेष रूप से प्रिय हैं। चाहे कानपुर की ‘खुशी’ की आवाज लौटाने की बात हो, लखनऊ की अंजना का मकान कब्जामुक्त कराना हो, गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराना हो या अनाबी, मायरा, वाची जैसे बच्चों के स्कूल में प्रवेश की चिंता-हर प्रसंग में मुख्यमंत्री ने संवेदनशील अभिभावक की भूमिका निभाई है।

जापान दौरे पर भी दिखा ‘योगी बाबा’ का स्नेह

शासकीय दायित्वों के बीच विदेश यात्रा के दौरान भी उनका बालप्रेम स्पष्ट दिखा। जापान के यामानाशी में भारतीय मूल के बच्चों से मिलते समय मुख्यमंत्री का आत्मीय संवाद चर्चा का विषय बना। एक बालक ने ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ मंत्र का पाठ आरंभ किया, किंतु एक पंक्ति भूल गया। मुख्यमंत्री ने स्वयं मंत्र पूरा कर बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ाया।

उन्होंने बच्चों के साथ ‘गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः’ मंत्र का उच्चारण किया। बच्चों ने चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और मुख्यमंत्री ने उन्हें चॉकलेट देकर मुस्कान बिखेर दी। विदेश में रहकर भी भारतीय संस्कृति को संजोए रखने वाले परिवारों की उन्होंने खुले मन से सराहना की। यह दृश्य केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि भारतीय संस्कारों के संरक्षण का भावनात्मक क्षण था।

सख्त प्रशासक, लेकिन बच्चों के आगे कोमल हृदय

अपराध और माफिया के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री का यह कोमल पक्ष कई अवसरों पर सामने आया है। ‘जनता दर्शन’ में एक नन्ही बच्ची द्वारा सैल्यूट करना, दूसरी बच्ची का ‘हम शेर बच्चे’ कविता सुनाना-इन प्रसंगों में मुख्यमंत्री का मुस्कुराता चेहरा और स्नेहिल आशीर्वाद बच्चों के मन में आत्मविश्वास भर देता है।

26 जनवरी की परेड में आए बच्चों का सीधे मुख्यमंत्री के पास पहुंच जाना और उनके साथ फोटो खिंचवाना, एक बच्ची को गोद में लेकर वात्सल्य प्रकट करना-ये दृश्य बताते हैं कि मुख्यमंत्री केवल शासन के शीर्ष पर बैठा व्यक्तित्व नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़े नेता हैं।

‘खुशी’ की आवाज बनी उम्मीद की मिसाल

कानपुर की मूक-बधिर बालिका खुशी गुप्ता की कहानी प्रदेश में संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बनी। मुख्यमंत्री से मिलने की जिद में वह अकेले लखनऊ तक पहुंच गई। जब यह जानकारी मुख्यमंत्री तक पहुंची, तो उन्होंने उसे बुलाकर उसके बनाए चित्र स्वीकार किए और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की। आज खुशी बोल और सुन पा रही है-उसकी ‘अनकही भावनाओं’ को शब्द मिल गए हैं। यह घटना केवल चिकित्सा सहायता नहीं, बल्कि विश्वास की पुनर्स्थापना थी।

अंजना को मिली ‘अपनी छांव’

31 दिसंबर 2025 को मेजर की बेटी अंजना भट्ट ने अपने मकान पर कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री से की। 24 घंटे के भीतर प्रशासन ने न केवल मकान कब्जामुक्त कराया, बल्कि आरोपियों की गिरफ्तारी भी सुनिश्चित की। यह संदेश स्पष्ट था—प्रदेश की हर बेटी सुरक्षित है और न्याय त्वरित है।

शिक्षा और संवेदना: भविष्य गढ़ने का संकल्प

लखनऊ की अनाबी अली, कानपुर की मायरा, मुरादाबाद की वाची-इन बच्चियों के स्कूल प्रवेश से लेकर गोरखपुर की पंखुड़ी की फीस माफ कराने तक मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्थिक अभाव शिक्षा में बाधा नहीं बनेगा।

लखीमपुर खीरी के शिवांशु और अजय कुमार, जिन्होंने माता-पिता को दुर्घटना में खो दिया था, ‘जनता दर्शन’ में अपनी व्यथा लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तत्काल विद्यालय में प्रवेश, आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए। बच्चों की बाधित पढ़ाई फिर से शुरू हुई और उनका भविष्य सुरक्षित हुआ।

जनसेवा और संवेदनशीलता की जीवंत तस्वीर

कानपुर के एक कैंसर पीड़ित युवक को ‘जनता दर्शन’ से सीधे अस्पताल भिजवाना हो या मार्ग में मिले बच्चे को फूल के बदले स्नेह और उपहार देना-मुख्यमंत्री का हर कदम जनसेवा की भावना से ओत-प्रोत दिखाई देता है।

वे केवल शासन नहीं चला रहे, बल्कि विश्वास का सेतु बना रहे हैं-जहां बच्चों के निश्छल मन को स्थान मिलता है, जहां संस्कारों को सम्मान मिलता है और जहां संवेदनशीलता प्रशासन का मूल आधार बनती है।

योगी आदित्यनाथ का व्यक्तित्व सख्ती और संवेदना का संतुलित संगम है। जहां अपराधियों के लिए वे कठोर प्रशासक हैं, वहीं बच्चों के लिए ‘योगी बाबा’-जो उनके सपनों, शिक्षा और मुस्कान की चिंता करते हैं।

प्रदेश के बच्चे जब उन्हें देखकर उत्साह से भर उठते हैं, तो यह केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि विश्वास और आत्मीयता का प्रमाण है। सुशासन के साथ संस्कारों का संरक्षण-यही उस नेतृत्व की पहचान है, जिसे आज उत्तर प्रदेश ‘अपने परिवार का मुखिया’ मानता है।

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