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बजट 2026-27: धमाका होगा या संतुलन की कसौटी? वैश्विक अनिश्चितताओं में सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा

वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच आम बजट 2026-27 सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण विकास की रफ्तार, राजकोषीय अनुशासन और रोजगार-कल्याण के बीच संतुलन साधने की कोशिश करेंगी। रक्षा, अवसंरचना, हरित ऊर्जा, एमएसएमई और सामाजिक सुरक्षा पर फोकस रहने की उम्मीद है। निवेशकों को बड़ी घोषणाओं से ज्यादा लक्षित उपायों की आस है।

  • लगातार नौवां बजट पेश करेंगी निर्मला सीतारमण, विकास, राजकोषीय अनुशासन और रोजगार के बीच साधना होगा संतुलन

नयी दिल्ली : बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रविवार को पेश किये जाने वाले आम बजट 2026-27 में सरकार के सामने मुख्य चुनौती आर्थिक वृद्धि की गति और विकास की प्राथमिकताओं, राजकोषीय अनुशासन और जरूरतमंदों के रोजगार तथा कल्याण को सुरक्षित रखने के बीच संतुलन बिठाने की है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01 फरवरी को लोकसभा में अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी।

विश्लेषकों के अनुसार, इस बजट में निवेशकों और करदाताओं को किसी बड़ी घोषणा की उम्मीद नहीं लगती, पर वित्त मंत्री आम लोगों के लिए कुछ नयी पहलें कर बजट को उनके लिए आकर्षक बनाने की कोशिश कर सकती हैं।यह बजट आठवें वेतन आयोग और 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के प्रभावी होने के पहले वर्ष के लिए होगा। इसके मद्देनजर सरकार को विशेष रूप से राजकोषीय समायोजन करने पड़ सकते हैं। आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट अभी नहीं आयी है, लेकिन इसे 01 जनवरी 2026 से लागू किया जाना है।

ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत मनरेगा की जगह लाये गये ‘विकसित भारत जी राम जी’ योजना के लिए बजट पर लोगों का विशेष ध्यान होगा क्योंकि संशोधित नया कानून लागू होने का यह पहला बजट होने जा रहा है।कोविड के बाद राष्ट्रीय खजाने के घाटे को सीमित करने का सराहनीय काम करने के साथ-साथ बचत और पूंजीगत व्यय के प्रोत्साहन के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करने वाली श्रीमती सीतारमण के सामने अब चुनौती विकसित भारत-2047 की वृहद योजना के लिए उनके पिछले दो-तीन बजटों में की गयी बुनियादी पहलों के लिए धन के प्रबंध के साथ साथ वैश्विक चुनौतियों के नकारात्मक प्रभावों से घरेलू अर्थव्यवस्था को संभालना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के मद्देनजर रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत व्यय को बढ़ाना एक बड़ी आवश्यकता बन गया है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में जीवन और कारोबार को करने के लिए सुधारों को आगे बढ़ने का आश्वसान देते हुए कहा है कि देश इस समय ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर है। इसलिए, बजट में सुधारों को बढ़ने तथा परमाणु ऊर्जा जैसे निजी निवेश के लिए खोले गये नये क्षेत्रों के लिए बजट में किये जाने वाले प्रावधानों पर लोगों की निगाह रहेगी। सरकार भारत को लगातार विनिर्माण क्षेत्र के एक प्रमुख केंद्र के रूप में प्रोत्साहित करने में लगी हुई है।

सालाना 12 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तिगत आय करदाताओं के लिए अभी पिछले बजट में एक लाख करोड़ रुपये की बड़ी राहत और गत सितंबर में जीएसटी (माल और सेवा कर) में बड़ी सौगात देने के बाद इस बार के बजट में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर में छूट और रियायत की उम्मीद कुछ योजनाओं और उत्पादों तक ही सीमित लगती है।सरकार बीमा और सामाजिक सुरक्षा के उत्पादों के बाजार को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ रियायत और प्रोत्साहन कर सकती है।अमेरिका की सीमा शुल्क नीति, तथा भू राजनीतिक तनावों से विशेष रूप से कृषि, कपड़ा, चमड़ा , समुद्री उत्पाद और रत्न-आभूषण जैसे कई ऐसे क्षेत्रों के कारोबार को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं जो सबसे अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्र हैं।

श्रीमती सीतारमण द्वारा इस सप्ताह संसद में प्रस्तुत ‘आर्थिक सर्वेक्षण 2026’ में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को दशकों के सबसे अच्छे व्यापक आर्थिक प्रदर्शन के बाद भी एक ऐसी बदली बाहरी दुनिया का सामना करना पड़ रहा है जो ऐसे प्रदर्शनों को निवेश, पूंजी प्रवाह और व्यापार के अवसरों के रूप में प्रोत्साहित नहीं करती।बजट 2026-27 के बारे में एक विश्लेषक ने कहा, “केंद्रीय बजट से निवेशकों की अपेक्षाएं कम बनी हुई हैं, क्योंकि नीति-निर्माता वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास प्राथमिकताओं और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

” विश्लेषक के अनुसार वित्त मंत्री बड़ी घोषणाओं की सीमित उम्मीदों के चलते, कुछ चुनिंदा और लक्षित उपाय भी बाजार में नयी ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बजट का प्रत्यक्ष प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित हुआ है, क्योंकि सरकार दो बजट के बीच में कई अतिरिक्त-बजटीय कदम उठाती रही है। इसके मद्देनजर इस समय भारी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे शेयर बाजार इस बजट को इसकी चुनिंदा योजनाओं और लक्षित उपायों के हिसाब से परखेंगे।आर्थिक सर्वेक्षण और बाजार विश्लेषकों के अनुसार, सरकार राजकोषीय मजबूती की राह पर अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। राजकोषीय घाटा कोविड काल के 9.2 प्रतिशत के उच्च स्तर से घटकर इस वर्ष (अनुमानित) सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.4 प्रतिशत तक सीमित किया जा चुका है। इसका असर वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की भारत की सॉवरेन रेटिंग में 2025 में सुधार के रूप में परिलक्षित हुआ है।

वित्त मंत्री ने पिछले बजट में कहा था कि 2026-27 के बजट के साथ जीडीपी की तुलना में ऋण अनुपात को राजकोषीय समेकन के एक प्रमुख मानक के रूप में अपनाया जायेगा। सरकार 2030-31 तक इस अनुपात को 50 प्रतिशत के स्तर पर लाना चाहती है। इससे कारोबार और उपभोग के लिए कर्ज की सुलभता और लागत में सुधार होगा। वित्त वर्ष 2024-25 में ऋण अनुपात 55 प्रतिशत से अधिक था।श्रीमती सीतारमण बजट में पूंजीगत व्यय पर जोर बनाये रख सकती हैं। बजट में रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, अवसंरचना, पूंजीगत सामान और किफायती आवास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के मद्देनजर बजट में उत्पादों की गुणवत्ता और कार्बन ट्रेडिंग के लिए प्रोत्साहन की उम्मीद की जा रही है।

सूक्ष्म ऋण कंपनियों, लघु एवं मझौले उद्यमों के लिए ऋण का प्रवाह वित्त मंत्री की बजट प्राथमिकताओं में हो सकता है।जलवायु से जुड़े खर्च और हरित अवसंरचना विकास पर भी खास ध्यान दिये जाने की उम्मीद है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और शहरों का स्वस्थ विकास कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें प्रोत्साहन दिया जा सकता है। साथ ही, असमान रिकवरी के बीच कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं – खाद्य सुरक्षा, आवास और ग्रामीण रोजगार – में निरंतरता को जरूरी माना जा रहा है।श्रीमती सीतारमण का नौवां बजट धमाकेदार होगा या दमदार, इसके लिए देश-दुनिया को रविवार पूर्वाह्न 11 बजे का इंतजार करना होगा जब वह लोक सभा में अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू करेंगी। (वार्ता)

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