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अलंकार अग्निहोत्री निलंबित, यूपी सरकार से टकराव के बाद बढ़ा विवाद

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को अनुशासनहीनता के आरोप में उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया है। गणतंत्र दिवस पर दिए गए इस्तीफे और तीखे बयान के बाद यह कार्रवाई की गई। निलंबन की सूचना के बाद उन्होंने सरकारी आवास खाली कर दिया और सामान लखनऊ भेजा गया। निलंबित अवधि में उन्हें शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध कर रोजाना उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सरकारी आवास खाली, शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध, रोजाना उपस्थिति के निर्देश

बरेली। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा अब उत्तर प्रदेश सरकार के साथ सीधे टकराव का रूप ले चुका है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर “ब्राह्मण अस्मिता” और यूजीसी नियमों के विरोध में दिए गए उनके इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, निलंबन की सूचना मिलने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार देर रात अपना सरकारी आवास खाली कर दिया। उनका निजी सामान ट्रक के माध्यम से लखनऊ भेज दिया गया है। यह कदम प्रशासनिक हलकों में इस बात का संकेत माना जा रहा है कि निलंबित अधिकारी अब आगे की कानूनी और विभागीय प्रक्रिया के लिए स्वयं को तैयार कर रहे हैं।

शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध, रोजाना उपस्थिति के निर्देश

शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, निलंबन अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री को जिलाधिकारी शामली कार्यालय से संबद्ध किया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन शामली डीएम कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। नियमों के तहत निलंबन अवधि में अधिकारी को मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होती, जब तक कि सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति न ली जाए।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि जांच के दौरान अधिकारी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके और विभागीय कार्रवाई में किसी प्रकार की बाधा न आए।

इस्तीफे से शुरू हुआ विवाद, निलंबन से बढ़ी सियासी-प्रशासनिक हलचल

गौरतलब है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के दिन अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए एक भावनात्मक और तीखा बयान जारी किया था। उन्होंने यूजीसी रेगुलेशंस, प्रयागराज माघ मेला से जुड़ी घटनाओं और ब्राह्मण समाज के कथित अपमान का मुद्दा उठाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए थे।

उनके बयान को लेकर यह आरोप भी लगे कि एक सेवारत अधिकारी द्वारा इस प्रकार सार्वजनिक रूप से राजनीतिक और सामाजिक अपील करना सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है। शासन स्तर पर इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई।

मंडलायुक्त करेंगे जांच, आगे तय होगी विभागीय कार्रवाई

सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए बरेली मंडलायुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या अलंकार अग्निहोत्री ने सेवा नियमों का उल्लंघन किया, पद पर रहते हुए अनुचित बयान दिए और प्रशासनिक मर्यादाओं को तोड़ा।

जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें चार्जशीट, अनुशासनात्मक कार्यवाही या अन्य दंडात्मक कदम भी शामिल हो सकते हैं।

नौकरशाही में चर्चा का विषय बना मामला

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की नौकरशाही में भी गहरी चर्चा को जन्म दिया है। कई अधिकारी इसे सेवा नियमों और व्यक्तिगत विचारों के टकराव का मामला मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं।

फिलहाल, अलंकार अग्निहोत्री का मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में मंडलायुक्त की रिपोर्ट के बाद इस प्रकरण में और बड़े फैसले होने की संभावना जताई जा रही है।

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