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टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकलेगा कृषि व स्वास्थ्य में एआई ब्रेक-थ्रू: जितिन प्रसाद

लखनऊ में आयोजित ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ में केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश डिजिटल हेल्थ, एआई और उभरती तकनीकों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित कृषि और स्वास्थ्य नवाचारों का अगला बड़ा केंद्र यूपी के टियर-2 व टियर-3 शहर होंगे। सम्मेलन में ब्रजेश पाठक, विनोद कुमार पॉल और सुनील कुमार शर्मा ने भी डिजिटल परिवर्तन और एआई के भविष्य पर विचार रखे।

  • ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ में केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद बोलेः एआई पैठ में शीर्ष पर भारत

लखनऊ । उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश का ही नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश डिजिटलाइजेशन, एआई और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह बातें केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने सोमवार को ‘यूपी एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कॉन्फ्रेंस’ के उद्घाटन सत्र में कहीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जहां दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है, वहीं एआई पेनिट्रेशन के मामले में भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि व स्वास्थ्य क्षेत्र का अगला बड़ा ब्रेक-थ्रू अमेरिका की सिलिकॉन वैली में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिलेगा। सम्मेलन में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, नीति आयोग के सदस्य विनोद कुमार पॉल और आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने भी एआई, स्वास्थ्य और डिजिटल परिवर्तन पर अपने विचार रखे।

यूपी अब निवेश के साथ टेक डेस्टिनेशन भीः जितिन प्रसाद

केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेश का डेस्टिनेशन तो बन ही चुका है, अब वह तेजी से टेक डेस्टिनेशन की ओर बढ़ रहा है। एआई, डिजिटलाइजेशन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में देश में बड़े स्तर पर काम हो रहा है, जो किसी भी लिहाज से मामूली नहीं है। स्टैनफोर्ड सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट बताती हैं कि एआई पेनिट्रेशन में भारत पहले पायदान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस तेज बढ़त के साथ चुनौतियां भी हैं। साइबर लिट्रेसी को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग करने वाले आम लोग बेसिक साइबर हाइजीन, एआई और नई तकनीकों को समझ सकें। डीपफेक और मिस-इन्फॉर्मेशन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकारें समन्वय के साथ काम कर रही हैं और किसी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रयास बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत आज एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरा है। देश में प्रधानमंत्री मोदी और प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी को जनता का पूरा समर्थन प्राप्त है। जब जनभावना साथ होती है, तो सरकार के लिए बड़े और दूरगामी फैसले लेना आसान हो जाता है।

पूरी दुनिया की नजर दिल्ली में होने वाले एआई इंपैक्ट समिट पर

जितिन प्नसाद ने नई दिल्ली में होने वाले एआई इंपैक्ट समिट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन आमतौर पर विकसित देशों में होता रहा है, लेकिन पहली बार भारत इसकी मेजबानी कर रहा है। पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि भारत में होने वाले इस समिट से क्या परिणाम निकलते हैं। आने वाले समय में यह समिट भारत की एआई नीति के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। केन्द्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि भारत ‘एआई सर्विस प्रोवाइडर ऑफ द वर्ल्ड’ बनने जा रहा है। इसमें स्टार्टअप्स और युवाओं की बड़ी भूमिका होगी। उत्तर प्रदेश इस यात्रा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सरकार ने रिसर्चर्स को कम दरों पर जीपीयू उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, ताकि वे नए मॉडल विकसित कर सकें और समाज के लिए उपयोगी समाधान निकाल सकें। उन्होंने यूपी में एआई प्रज्ञा, यूपी एग्रीस और एआई आधारित मार्केटप्लेस जैसे प्रयासों की सराहना की। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ‘रोशनी मॉडल’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह फोटो के माध्यम से आंखों में मोतियाबिंद की पहचान करने में सक्षम है।

2017 के बाद हेल्थ सेक्टर में आमूलचूल परिवर्तनः ब्रजेश पाठक

उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि भारत एक ऐसे महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है, जहां वह वैश्विक चुनौतियों को स्वीकार कर रहा है। उत्तर प्रदेश की भूमिका इसलिए भी अहम है क्योंकि जनसंख्या के लिहाज से यह दुनिया के छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि यूपी में कोई योजना सफल होती है, तो उसे पूरे देश के बड़े हिस्से की सफलता माना जाता है। उन्होंने 2017 से पहले और बाद की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि 2017 के बाद प्रदेश के हेल्थ सेक्टर में आमूलचूल परिवर्तन आया है। वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना को जमीन पर उतारा गया है। वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, वहीं आज 81 मेडिकल कॉलेज पूरी क्षमता से कार्य कर रहे हैं।

एमबीबीएस सीटों की संख्या 5000 से बढ़कर लगभग तीन गुना हो चुकी है और 12 से साढ़े 12 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन सीटों और सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। टर्शरी केयर में लोहिया, पीजीआई और केजीएमयू ने बेहतर प्रदर्शन किया है। क्वार्टनरी केयर की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अनुपूरक बजट में विशेष प्रावधान किया गया है। ब्रजेश पाठक ने भरोसा जताया कि यूपी पीजीआई के माध्यम से देश में सबसे पहले इस दिशा में सफलता हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि एआई को पूरे प्रदेश में लागू करने के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों को आपस में जोड़ा जा रहा है। प्रदेश में बड़े स्तर पर निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अभिनव प्रयोग के तहत स्टेट बैंक के सहयोग से विकसित एप के माध्यम से महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा आसानी से मिल रही है।

भारत के एआई परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की बड़ी भूमिकाः विनोद कुमार पॉल

नीति आयोग के सदस्य विनोद कुमार पॉल ने कहा कि नीति आयोग लंबे समय से एआई पॉलिसी पर कार्य कर रहा है। 2018-19 में एआई स्ट्रैटेजी विकसित की गई और पिछले दो वर्षों में फ्रंटियर हब के जरिए एआई, क्वांटम इकॉनमी, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और जॉब क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में काम हुआ है। उन्होंने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक 2035 तक भारत वैश्विक एआई परिदृश्य में 10 से 15 प्रतिशत योगदान देगा और कुल एआई अवसर 1.1 से 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक के हो सकते हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश की बड़ी हिस्सेदारी होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत जीवन प्रत्याशा को 71 से बढ़ाकर 85 वर्ष करने पर भी काम किया जा रहा है। वहीं, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि इंडियन एआई मिशन के सहयोग से प्रदेश में एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और डिजिटल परिवर्तन को नई दिशा मिल रही है। एआई, मशीन लर्निंग, डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और स्मार्ट मेडिकल सेवाओं पर मंथन से यूपी का तकनीकी और स्वास्थ्य इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

स्टार्टअप इकोसिस्टम से उत्तर प्रदेश बन सकता है ग्लोबल एआई पावर हाउस : कविता भाटिया

उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के पहले दिन सोमवार को होटल द सेंट्रम में हेल्थ सेक्टर में एआई के प्रयोग को लेकर विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने कहा कि एआई केवल तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि जनकल्याण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह सेशन प्राथमिकता वाले एआई मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने, नीति संबंधी जानकारी के आदान-प्रदान और व्यावहारिक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आया। इसमें सरकारों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने मिलकर चुनौतियों की पहचान, बेस्ट प्रैक्टिस साझा करने और परिणाम तैयार करने पर विचार किया।

डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित सॉल्यूशंस से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाया जा रहा
विशेषज्ञों ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हेल्थ सेक्टर में तकनीक और एआई के प्रयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम योगी की मंशा है कि एआई के जरिए मातृ एवं नवजात देखभाल, रोगों की समय पर पहचान, सटीक इलाज और हेल्थ रिसर्च को नई गति दी जाए। डिजिटल प्लेटफॉर्म, हेल्थ डाटा और एआई आधारित सॉल्यूशंस के माध्यम से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। सत्र में इंडिया एआई मिशन की सीओओ कविता भाटिया ने एआई के क्षेत्र में जनभागीदारी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मजबूत पब्लिक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और समृद्ध, संरचित (रिच स्ट्रक्चर्ड) डाटा के प्रभावी उपयोग से उत्तर प्रदेश को एआई आधारित हेल्थ मिशन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्टार्टअप इकोसिस्टम के जरिए उत्तर प्रदेश को एक ग्लोबल एआई पावर हाउस के रूप में स्थापित किया जा सकता है, जहां नवाचार, निवेश और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।

स्टोर डाटा का सही और सुरक्षित इस्तेमाल भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज के साथ रिसर्च में अहम भूमिका निभाएगा
इंडिया एआई मिशन के जनरल मैनेजर स्वदीप सिंह ने हेल्थ सेक्टर में एआई के लिए डाटा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि स्टोर किए गए डाटा का सही और सुरक्षित इस्तेमाल भविष्य में बीमारियों के सटीक इलाज और गहन रिसर्च में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमें किसी एक प्रकार के डाटा पर निर्भर न रहते हुए, विविध एआई-आधारित डाटा सॉल्यूशंस पर काम करना होगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी, सटीक और भरोसेमंद बन सकें। वहीं फ्यूचर स्किल्स, इंडिया एआई मिशन के जीएम कार्तिक सूरी ने कहा कि हेल्थ सेक्टर में एआई के सफल उपयोग के लिए फ्यूचर रेडी वर्कफोर्स तैयार करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि देशभर में कई डाटा लैब स्थापित की जा चुकी हैं और लगातार नई एआई-आधारित डाटा लैब बन रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि युवाओं की क्षमता को एआई बेस्ड टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाए, ताकि एआई सुरक्षित और भरोसेमंद बने।

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