सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को बनाएं अनिवार्य: मुख्यमंत्री
लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिशन कर्मयोगी की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिवर्तनकारी पहल है, जो प्रशासन को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार कर रही है। बैठक में बताया गया कि आईगॉट प्लेटफॉर्म पर उत्तर प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक ऑनबोर्ड हुए हैं और 72 लाख से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने एआई, साइबर सिक्योरिटी और व्यवहारिक प्रशिक्षण को अनिवार्य करने के निर्देश दिए।
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में अब तक हुई प्रगति और आगामी कार्ययोजना की विस्तार से समीक्षा की। बैठक में मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशिक्षण ढांचे की मजबूती, डिजिटल प्लेटफॉर्म की वर्तमान स्थिति और विभिन्न विभागों में क्षमता संवर्धन से जुड़े अहम बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई। इस अवसर पर कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन की चेयरपर्सन एस. राधा चौहान ने मुख्यमंत्री के समक्ष राज्य में मिशन कर्मयोगी के क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मिशन कर्मयोगी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक दूरदर्शी और परिवर्तनकारी पहल है, जिसका उद्देश्य वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारतीय संस्कृति और लोकाचार में निहित मूल्यों को आत्मसात करते हुए ऐसे सक्षम, संवेदनशील और उत्तरदायी मानव संसाधन तैयार करना है, जो प्रदेश और देश के विकास की प्रेरक शक्ति बन सकें। उन्होंने कहा कि यह मिशन शासन व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक परिणामोन्मुख, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी के तहत केंद्र सरकार में 30 लाख से अधिक सिविल सेवकों, राज्यों में लगभग 2.2 करोड़ कार्मिकों तथा शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 50 लाख कार्मिकों को क्षमता संवर्धन से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत देशभर के 790 से अधिक सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक और सुदृढ़ स्वरूप दिया जा रहा है।
सभी सिविल सेवकों के सतत, समग्र और तकनीक-सक्षम प्रशिक्षण के लिए आईगॉट (इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग) डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जो आज विश्व का सबसे बड़ा सरकार-प्रेरित क्षमता निर्माण मंच बन चुका है। इस मंच पर अब तक 1.45 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। प्लेटफॉर्म पर कुल 4,179 प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें 840 से अधिक पाठ्यक्रम हिंदी में तथा 15 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में 540 से अधिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। अब तक 6.7 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं और पाठ्यक्रम पूर्णता दर 70 प्रतिशत से अधिक रही है। आईगॉट ऐप को 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि आईगॉट कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश से 18.8 लाख से अधिक कार्मिक प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देशभर में हुई कुल ऑनबोर्डिंग का 93 प्रतिशत है। वहीं, 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं ने कम से कम एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है। अब तक उत्तर प्रदेश से 72 लाख से अधिक पाठ्यक्रम पूर्ण किए जा चुके हैं, जो वर्ष 2025 में देशभर में हुई कुल पाठ्यक्रम पूर्णताओं का 99 प्रतिशत है। यह उपलब्धि प्रदेश में सुशासन, दक्ष प्रशासन और नागरिक-केंद्रित सेवा प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विभाग और सरकारी संस्थाएं अपनी आवश्यकता के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित कर उन्हें आईगॉट पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सात दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग कार्यक्रम को अनिवार्य किया जाए तथा इसे पदोन्नति और वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) से भी जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (उपाम) सहित प्रदेश में संचालित सभी प्रशिक्षण केंद्रों के लिए समय की मांग के अनुरूप विशेष कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम तैयार किए जाएं, ताकि प्रशिक्षण केंद्रों में ही नव-प्रशिक्षणार्थियों की कार्यदक्षता और व्यावहारिक क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी विभागीय पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और साइबर सिक्योरिटी को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईगॉट के केस स्टडी प्लेटफॉर्म ‘अमृत ज्ञान कोश’ में विश्व की श्रेष्ठ केस स्टडीज उपलब्ध हैं। उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों में भी अनेक नवाचार और सफल प्रयोग हुए हैं, जिन्हें अमृत ज्ञान कोश पर साझा किया जाना चाहिए। इससे अन्य राज्यों और विभागों को भी सीखने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने नई सोच और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण पर बल देते हुए कहा कि ज्ञान, कौशल और सकारात्मक सोच के समन्वय से ही जनसेवा की गुणवत्ता में वास्तविक और स्थायी सुधार संभव है। मिशन कर्मयोगी इसी उद्देश्य से कार्य संस्कृति को सुदृढ़ करता है और जनभागीदारी की भावना को मजबूती प्रदान करता है, जिससे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की समयबद्ध और प्रभावी पूर्ति सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत संचालित सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, नियमित मूल्यांकन और व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि इसका लाभ शासन की प्रत्येक इकाई तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत अभियंताओं को नई डिजाइन, नवीन तकनीकों और आधुनिक कार्यप्रणालियों का समुचित ज्ञान दिलाने के लिए विशेष कैपेसिटी बिल्डिंग पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि मिशन कर्मयोगी के तहत एएनएम, आशा कार्यकर्ता, पुलिस कांस्टेबल, पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों से जुड़े फील्ड कर्मियों के लिए व्यवहारिक, कार्य-आधारित और जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि जमीनी स्तर पर सेवाओं की प्रभावशीलता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
परिवार के बीच दान विलेख पर स्टाम्प शुल्क में राहत, अब व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां भी शामिल
यूपी की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव, 2.89 करोड़ नाम हटे, चुनाव आयोग ने जारी की ड्राफ्ट लिस्ट



