- वाराणसी की फर्टिलिटी विशेषज्ञ, जिनकी करुणा, विज्ञान और सेवा-भाव ने हजारों निःसंतान दंपतियों के जीवन में मातृत्व और पितृत्व की खुशियाँ लौटाईं
हर सुबह जब वाराणसी के “वंश फर्टिलिटी एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर” के दरवाज़े खुलते हैं, तो भीतर उम्मीद की एक नई किरण जन्म लेती है। कभी किसी माँ की आँखों में बरसों से अटके आँसू चमकते हैं, तो कहीं एक पिता की बाँहों में नन्हा जीवन मुस्कुराता है। इन मुस्कानों के पीछे जो नाम सबसे पहले लिया जाता है, वह है – डॉ. अनु अग्रवाल । वो सिर्फ एक चिकित्सक नहीं, बल्कि आशा की रोशनी हैं – उन चेहरों के लिए, जिनके जीवन में वर्षों से अधूरी थी “माँ” या “पापा” कहलाने की तमन्ना।
संवेदनाओं से भरी चिकित्सक – विज्ञान और करुणा का अद्भुत संगम
भारत जैसे देश में जहां बांझपन को अब भी सामाजिक कलंक समझा जाता है, वहाँ डॉ. अनु अग्रवाल ने इस अंधेरे को उम्मीद के उजाले में बदल दिया है। वह कहती हैं – “संतान सुख केवल चिकित्सा की उपलब्धि नहीं, यह मानवीय गरिमा की पुनर्स्थापना है।” उनका केंद्र वाराणसी के मध्य स्थित है, पर उसकी सोच सीमाओं से परे है। यहाँ सिर्फ इलाज नहीं होता, विश्वास लौटाया जाता है।
गरीब परिवारों के लिए वरदान – ‘पैसे के अभाव में माँ न बने, यह मैं नहीं होने दूंगी’
डॉ. अनु अग्रवाल का जीवन चिकित्सा से अधिक सेवा का पर्याय है। वे कहती हैं – “मेरे क्लिनिक में कभी किसी को यह महसूस नहीं होने दूंगी कि पैसे के बिना माँ बनने का सपना अधूरा रह जाए।” अक्सर देखा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार आईवीएफ जैसे इलाज से दूर रहते हैं। डॉ. अनु इन परिवारों के लिए विशेष छूट, मुफ्त परामर्श, और कभी-कभी निशुल्क इलाज तक करती हैं। उनके अनुसार, “माँ बनने का हक़ अमीर या गरीब से नहीं, इंसान से तय होता है।”

वंश फर्टिलिटी सेंटर – वाराणसी में विश्वस्तरीय आईवीएफ सुविधा
डॉ. अनु अग्रवाल ने वंश फर्टिलिटी एंड टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर की स्थापना इस संकल्प के साथ की कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी विश्वस्तरीय आईवीएफ तकनीक उपलब्ध हो। यहाँ अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ, पूर्ण आईवीएफ यूनिट, और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की टीम कार्यरत है। सफलता दर 70% से अधिक है, जो देश के प्रमुख मेट्रो शहरों के बराबर है।
आईवीएफ – जब विज्ञान बनता है संतान सुख का सेतु
आईवीएफ यानी In Vitro Fertilization, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर मिलाया जाता है। फिर जब निषेचन सफल होता है, तो विकसित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। इससे हजारों दंपतियों के जीवन में खुशियों की किलकारी गूँज चुकी है। डॉ. अनु बताती हैं – “यह सिर्फ विज्ञान नहीं, हर बार एक नई ज़िंदगी की रचना होती है, और यह एहसास हर बार उतना ही पवित्र होता है।”
जब विज्ञान ने भक्ति का रूप लिया – सरोगेसी और पीआरपी थेरेपी में नई राहें
पूर्वी भारत की महिलाओं में ‘जेनिटल कोच्स’ (Genital Koch’s) यानी गर्भाशय टीबी के मामले बहुत सामान्य हैं। ऐसे मामलों में सरोगेसी एक सुरक्षित विकल्प बनती है। डॉ. अनु अग्रवाल ने कई महिलाओं को सरोगेसी के माध्यम से मातृत्व का सुख दिया है। साथ ही, PRP थेरेपी* (Platelet Rich Plasma) जैसी आधुनिक तकनीकों से पतली गर्भाशय परत वाली महिलाओं में गर्भधारण संभव बनाया जा रहा है। यह थेरेपी गर्भाशय की परत को पुनर्जीवित करती है – जैसे सूखी धरती पर पहली बारिश।
फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन – भविष्य के मातृत्व की सुरक्षा
डॉ. अनु अग्रवाल ने कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रही महिलाओं और पुरुषों के लिए Fertility Preservation की सुविधा भी शुरू की है। इस प्रक्रिया में अंडाणु या शुक्राणु को फ्रीज कर सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में संतान प्राप्ति संभव हो सके। उनका कहना है – “कैंसर जीवन की चुनौती है, पर मातृत्व से किसी को वंचित नहीं होना चाहिए।”
समग्र दृष्टिकोण – योग, ध्यान और मनोबल से मातृत्व तक
डॉ. अनु अग्रवाल ने चिकित्सा को केवल शरीर तक सीमित नहीं रखा। उनका मानना है कि मन और आत्मा की शक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। इसलिए उनके सेंटर में योग, ध्यान, आहार सुधार और काउंसलिंग सत्र नियमित रूप से होते हैं। “हमारे यहाँ IVF से पहले मन को स्वस्थ किया जाता है,” वह मुस्कुराते हुए कहती हैं। “जब महिला तनावमुक्त होती है, तो गर्भधारण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।”
हजारों परिवारों की कहानी – जहाँ उम्मीद ने जन्म लिया
कई ऐसे परिवार हैं जो वर्षों तक इलाज कराते रहे, पर हर प्रयास विफल हुआ। जब सब उम्मीदें टूट चुकी थीं, तब डॉ. अनु अग्रवाल के स्पर्श ने चमत्कार कर दिया। एक केस में एक महिला जो आठ बार गर्भपात झेल चुकी थी, आज उसकी गोद में दो जुड़वाँ बच्चे हैं। एक अन्य गरीब परिवार जिसने पैसों के कारण इलाज छोड़ दिया था, डॉ. अनु ने स्वयं मदद की – और आज वह परिवार उनके केंद्र का पोस्टर बना हुआ है – “Where Hope Becomes Life.”
वाराणसी की बेटी, जिसने उम्मीद को धर्म बना लिया
वाराणसी की पवित्र मिट्टी में पली-बढ़ी डॉ. अनु अग्रवाल ने अपने जीवन को मानवता की सेवा को समर्पित किया है। उनका मानना है कि यह कार्य केवल पेशा नहीं, एक आध्यात्मिक साधना है। वह कहती हैं – “जब एक माँ अपने बच्चे को पहली बार गोद में लेती है, वही मेरे जीवन का सबसे पवित्र क्षण होता है।”
भविष्य की दिशा – हर घर में गूंजे किलकारी
अब उनका लक्ष्य है – हर ज़िले में एक “सस्ती आईवीएफ यूनिट” की स्थापना, ताकि कोई भी महिला पैसों की वजह से इस सुख से वंचित न रहे। उनका सपना है – “हर माँ को उसका बच्चा मिले। हर पिता के आँगन में उसकी संतान की हँसी गूँजे। और हर घर में किलकारी सुनाई दे – यही असली विकास है।”
जब चिकित्सा बनती है करुणा
डॉ. अनु अग्रवाल आज सिर्फ डॉक्टर नहीं, मानवता का चेहरा हैं। उनके शब्दों में – “मुझे अपने केंद्र के बाहर कोई बोर्ड लगाने की ज़रूरत नहीं। मेरे मरीजों की मुस्कान ही मेरा विज्ञापन है।” उनकी कहानी यह साबित करती है कि जब विज्ञान में संवेदना जुड़ जाती है, तो वह चमत्कार बन जाता है। डॉ. अनु अग्रवाल सचमुच “खुशियां बांटने वाली डॉक्टर” हैं – जो निःसंतान दंपतियों के लिए भगवान का रूप बन चुकी हैं।
“खुशियां बांटतीं डॉ. अनु अग्रवाल – जहाँ उम्मीद जीवन बन जाती है।”
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