
समुद्री शक्ति के नए युग में प्रवेश कर चुका है भारत: प्रधानमंत्री
मुंबई में आयोजित ग्लोबल मैरिटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने बताया कि 2025 का वर्ष मैरिटाइम सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है। विझिंजम में देश का पहला डीप-वॉटर ट्रांस-शिपमेंट हब ऑपरेशनल हो चुका है और जेएनपीटी विस्तार से पोर्ट क्षमता दोगुनी हुई है। कांडला में ग्रीन हाइड्रोजन सुविधा और 100% एफडीआई अनुमति से शिपिंग सेक्टर में निवेश बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ब्लू इकॉनमी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और शिप-बिल्डिंग के माध्यम से लाखों रोजगार अवसर पैदा कर रहा है, और वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बन रहा है।
- ग्लोबल मैरिटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव: भारत समुद्री सामर्थ्य का वैश्विक केंद्र- प्रधानमंत्री
मुंबई में आयोजित ग्लोबल मैरिटाइम लीडर्स कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री ने भारत के उभरते समुद्री सामर्थ्य और वैश्विक सहयोग की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में मुंबई में शुरू हुआ यह आयोजन, आज 85 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ वैश्विक मंच का रूप ले चुका है। शिपिंग सेक्टर से जुड़े दिग्गज इंडस्ट्री लीडर्स, नीति-निर्माता और निवेशक इस आयोजन में शामिल हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने शिपिंग सेक्टर में लाखों करोड़ रुपये के एमओयू और कई परियोजनाओं की शुरुआत को भारत में निवेश विश्वास का प्रमाण बताया। उन्होंने इसे राष्ट्र के सामूहिक संकल्प का प्रतीक कहा।
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 भारत के मैरिटाइम सेक्टर के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा है। देश का पहला डीप-वॉटर इंटरनेशनल ट्रांस-शिपमेंट हब विझिंजम पोर्ट अब परिचालन में है, जहाँ हाल ही में दुनिया का सबसे बड़ा कंटेनर पोत पहुंचा। कांडला में ग्रीन हाइड्रोजन फैसिलिटी और जेएनपीटी में मुंबई कंटेनर टर्मिनल फेज-2 से पोर्ट क्षमता दोगुनी करने की उपलब्धियों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक शिपिंग कानूनों को हटाकर आधुनिक और फ्यूचरिस्टिक कानून लागू किए गए हैं, जो राज्य मैरिटाइम बोर्ड्स को सशक्त बनाते हुए सुरक्षा, डिजिटलाइजेशन और स्थिरता को बढ़ावा देते हैं। “वन नेशन–वन पोर्ट प्रोसेस” जैसे सुधार पोर्ट प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सरलता सुनिश्चित करेंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में मैरिटाइम इंडिया विज़न के तहत 150 से अधिक पहलों से पोर्ट क्षमता लगभग दोगुनी हुई है, टर्नअराउंड टाइम घटा है, क्रूज़-पर्यटन को गति मिली है और इनलैंड वाटरवेज पर कार्गो मूवमेंट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विश्व बैंक की लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस रैंकिंग में भी भारत की स्थिति बेहतर हुई है।
मानव संसाधन क्षमताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सीफैरर्स की संख्या दुनिया में शीर्ष देशों में शामिल हो चुकी है। उन्होंने इसे वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत के प्रभाव की प्रमाणिकता बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 25 वर्ष ब्लू इकॉनमी, पोर्ट कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और कोस्टल इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने बताया कि भारत शिप-बिल्डिंग के पुराने गौरव को वापस लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। बड़े शिप्स को इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट का दर्जा देने के निर्णय को उन्होंने उद्योग के लिए बड़ा अवसर बताया। इस क्षेत्र में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का सरकारी निवेश युवाओं को लाखों रोजगार देगा।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती देने की दिशा में काम कर रहा है। महाराष्ट्र के वाढवण में 76 हजार करोड़ की लागत से मेगा पोर्ट निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि भारत में पोर्ट्स और शिपिंग में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति और तेजी से बढ़ती पब्लिक-प्राइवेट सहभागिता दुनिया के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती है।
प्रधानमंत्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज के समुद्री दृष्टिकोण को भारत की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि समुद्र केवल सीमाएँ नहीं, बल्कि विकास और व्यापार के द्वार हैं। वैश्विक तनाव और व्यापार बाधाओं के दौर में भारत शांति, समृद्धि और समावेशी विकास का भरोसेमंद स्तंभ सिद्ध होगा।
प्रधानमंत्री ने सभी देशों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि हमें मिलकर जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति बाधाओं और समुद्री सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान खोजते हुए शांति, प्रगति और समृद्धि के मार्ग को और मजबूत बनाना है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिनिधियों को शुभकामनाएँ दीं।
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