बलिया का गौरव: बदहाली से भव्यता तक – बेल्थरारोड का पोखरा बना आस्था और सौंदर्य का प्रतीक
बलिया के बेल्थरारोड नगर का ऐतिहासिक रामलीला मैदान पोखरा अब सौंदर्य, श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक बन गया है। नगर पंचायत की चेयरमैन रेनू गुप्ता और प्रतिनिधि दिनेश गुप्ता के प्रयासों से यह स्थल पूरी तरह निखर उठा है। फव्वारे, सजे घाट, लाइटिंग और आस-पास के धार्मिक स्थलों ने इसे आस्था का केंद्र बना दिया है। अब यह पोखरा छठ पर्व पर भक्ति मेले का केंद्र बनेगा और बलिया की नई पहचान गढ़ेगा।
- कभी विवादों और उपेक्षा में डूबा रामलीला मैदान का विशाल पोखरा अब सौंदर्य, श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक बन गया है – चेयरमैन रेनू गुप्ता व प्रतिनिधि दिनेश गुप्ता की दूरदर्शी पहल से नया जीवन मिला।
बलिया: कभी विवादों, उपेक्षा और गंदगी का पर्याय बन चुका बेल्थरारोड नगर का चर्चित रामलीला मैदान स्थित विशाल पोखरा अब अपने अलौकिक रूप और भक्ति-सौंदर्य की चमक से नगर का गौरव बन गया है। जो पोखरा कभी स्वामित्व की लड़ाई और अनदेखी के कारण धूल फांक रहा था, आज वही श्रद्धा, सौंदर्य और संस्कृति का अद्भुत संगम बन चुका है। कारीगरों की मेहनत और नगर पंचायत के सतत प्रयासों ने इस पोखरे को एक नया जीवन दिया है। घाटों की सुंदर सजावट, झिलमिलाती लाइटें, और बीचों-बीच उठता फाउंटेन अब हर आगंतुक को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां पहुंचने वाला हर व्यक्ति बरबस कह उठता है – “वाह! क्या पोखरा है!”

आस्था, सौंदर्य और एकता का संगम
यह पोखरा केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि सांप्रदायिक एकता की मिसाल भी बन गया है। एक ओर ठाकुर जी एवं काली जी का प्राचीन मंदिर, दूसरी ओर नगर की भव्य मस्जिद, और एक तरफ स्थित गुरुद्वारा – तीनों का यह त्रिवेणी संगम बलिया की गंगा – जमुनी तहज़ीब की पहचान बन गया है। यहां की शामें अब सिर्फ रोशनी से नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक भावनाओं से जगमगा उठती हैं।
छठ पर्व पर सजेगा भव्य आस्था मेला
इस वर्ष छठ महापर्व पर यह पोखरा भक्ति और संस्कृति के भव्य मेले का साक्षी बनेगा। नगरवासी इसे और भव्य रूप देने के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं। श्रद्धालु महिलाओं की गीतों से गूंजती घाटों की प्रतिध्वनि और दीपों की लहरें यहां एक अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण रचने जा रही हैं।

दूरदर्शी नेतृत्व और समर्पण की मिसाल
इस परिवर्तन के पीछे बेल्थरारोड नगर पंचायत की चेयरमैन रेनू गुप्ता की दूरदर्शी सोच और चेयरमैन प्रतिनिधि दिनेश गुप्ता की अथक मेहनत ने अहम भूमिका निभाई है। इन्होंने न केवल पोखरे के धार्मिक अस्तित्व को संरक्षित किया, बल्कि उसे **बलिया की नई पहचान** बनाने का सपना साकार किया। उनके प्रयासों ने यह साबित किया कि **संकल्प और सहयोग से कोई भी स्थान बदहाली से भव्यता की ओर लौट सकता है।
अब यह पोखरा प्रेरणा का प्रतीक है
आज बेल्थरारोड का यह पोखरा सिर्फ इतिहास नहीं – बल्कि आस्था, नवजीवन और सौंदर्य की नई कहानी लिख रहा है। यह उदाहरण है कि यदि समाज, प्रशासन और नेतृत्व एक दिशा में मिलकर काम करें, तो हर उपेक्षित स्थल फिर से जीवन पा सकता है। यह पोखरा अब केवल नगर का नहीं, पूरे बलिया का गौरव बन चुका है -एक ऐसा स्थल जो बताता है कि “जहां आस्था हो, वहां बदलाव अवश्य होता है।”
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