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को-लेंडिंग को लेकर सभी वित्तीय संस्थाओं के लिए व्यापक मसौदा दिशा-निर्देश जारी

नियामकीय सैंडबॉक्स अब हमेशा के लिए खुला, थीम की बाध्यता खत्म : आरबीआई

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने को-लेंडिंग व्यवस्थाओं को लेकर मौजूदा दिशा-निर्देशों का दायरा बढ़ाते हुए अब एक सामान्य नियामकीय ढांचा का मसौदा जारी किया है।यह निर्णय को-लेंडिंग प्रथाओं में आए बदलाव और विभिन्न वर्गों की विस्तृत ऋण जरूरतों को टिकाऊ तरीके से पूरा करने की संभावनाओं को देखते हुए लिया गया है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासक तीन दिवसीय बैठक में लिए गये निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक को-लेंडिंग के दिशा-निर्देश केवल बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बीच प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के लिए ही लागू थे। लेकिन, बदलते आर्थिक और ऋण परिवेश को देखते हुए आरबीआई ने अब इसे सभी विनियमित संस्थाओं (आरई) के बीच विविध प्रकार की को-लेंडिंग व्यवस्थाओं तक विस्तार करने का निर्णय लिया है।

श्री मल्होत्रा ने बताया कि को-लेंडिंग अब केवल बैंकों और एनबीएफसी तक सीमित नहीं रहेगी। सभी प्रकार की विनियमित संस्थाओं के बीच को-लेंडिंग के लिए दिशा-निर्देश का प्रस्ताव किया गया है। यह कदम वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा और ऋण की पहुंच को सरल बनाएगा। मसौदा दिशा-निर्देश सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किए गए हैं।

नियामकीय सैंडबॉक्स अब हमेशा के लिए खुला, थीम की बाध्यता खत्म : आरबीआई

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फिनटेक नवाचार को नई रफ्तार देने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाते हुए नियामकीय सैंडबॉक्स को अब पूरी तरह थीम-न्यूट्रल और ‘ऑन टैप’ आवेदन सुविधा के साथ उपलब्ध कराने की घोषणा की है।आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि रिजर्व बैंक अब तक चार विशिष्ट विषयों पर आधारित रेगुलेटरी सैंडबॉक्स कोहोर्ट पूरा कर चुका है। अक्टूबर 2023 में शुरू किया गया पांचवां कोहोर्ट पहली बार थीम-न्यूट्रल था, जिसकी आवेदन खिड़की मई 2025 तक सीमित थी। लेकिन अब, अनुभवों और हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर इसे स्थायी रूप से ‘ऑन टैप’ करने का फैसला किया गया है।

श्री मल्होत्रा ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत अब कोई भी फिनटेक कंपनी या नवाचारकर्ता विषय की सीमा के बिना किसी भी समय आवेदन कर सकेगा। रिजर्व बैंक के नियामकीय दायरे में आने वाला कोई भी नवाचारी समाधान या उत्पाद परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जा सकेगा। इस कदम से फिनटेक क्षेत्र को नियमित और तेज प्रायोगिक अवसर मिलेंगे, जिससे समय के साथ-साथ त्वरित उत्पाद विकास और अनुपालन परीक्षण संभव हो सकेगा।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह पहल भारत के तेजी से विकसित हो रहे फिनटेक और डिजिटल इकोसिस्टम को निरंतर नवाचार के अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए की जा रही है। नियामकीय सैंडबॉक्स का ‘ऑन टैप’ और ‘थीम-न्यूट्रल’ स्वरूप इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भविष्य के लिए और अधिक तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश और तकनीकी विवरण जल्द ही जारी किए जाएंगे।(वार्ता)

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