Health

देश भर में बने एम्स को विकसित करने में समय लगेगा : नड्डा

भारत बायोटेक अकेले ही कोवैक्सीन का पेटेंट लेने चली थी

नयी दिल्ली : सरकार ने आज कहा कि देश के विभिन्न भागों में बनने वाले अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का उद्देश्य, उन भागों में, दिल्ली के एम्स के स्तर की चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने का है और इसके लिए फैकल्टी एवं चिकित्सा मानकों को उस वैश्विक ब्रांड स्तर तक विकसित करने में कुछ समय लगेगा इसलिए लोगों को धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा करनी चाहिए।लोकसभा में प्रश्नकाल में झारखंड के देवघर में स्थापित एम्स में बाह्यरोगी विभाग जल्द खोलने की स्थानीय सांसद निशिकांत दुबे की मांग पर केन्द्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने उक्त स्पष्टीकरण दिया।

श्री नड्डा ने कहा कि ये मांग अक्सर विभिन्न सांसदों द्वारा की जाती है कि एम्स में अमुक सुविधा जल्दी खोल दी जाये। उन्होंने कहा कि पहले तो वह बताना चाहेंगे कि एम्स खोलने का मकसद क्या है। उन्होंने कहा, “अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के बारे में हमारा दृष्टिकोण है कि देश के हर कोने से लोगों को अपने इलाज के लिए दिल्ली न आना पड़े। जिस तरह से एम्स है दिल्ली में सेवा दी जाती है, एम्स को उसी ब्रांड नाम के साथ उसी स्तर की सेवा देनी चाहिए। लेकिन इसके लिए समय लगता है। दिल्ली का एम्स 1950 के दशक में बना लेकिन उसका ब्रांड बनने में 1970 का दशक लगा। इसलिए देश के विभिन्न स्थानों पर जो एम्स बने हैं, उनमें फैकल्टी (शिक्षक) एवं चिकित्सा मानक दिल्ली के एम्स के स्तर के विकसित करने में समय लगेगा। यह काम धीरे धीरे होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तृतीयक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के साथ देश के हर क्षेत्र में 17 से अधिक एम्स खोलने का प्रयास किया है जिनमें से अनेक एम्स काम करने लगे हैं। देश में 1960-70 के दशक में, हमारे सबसे अच्छे डॉक्टर हुआ करते थे, वे कहते हैं कि हमारे पास देश में विश्व स्तरीय सुविधाएं नहीं है जो हम बाहर जा रहे हैं और आज प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 22 विश्व स्तरीय संस्थान बनाए हैं। हमारे पास विश्व का सर्वश्रेष्ठ हार्डवेयर आ गया है। अब सॉफ्टवेयर की जरूरत है जो निश्चित रूप में हमें मिलेगा।द्रविड़ मुनेत्र कषगम के ए. राजा ने प्रधानमंत्री द्वारा कई वर्ष पूर्व मदुरै में एम्स बनाने की घोषणा का उल्लेख करते हुए जब पूछा कि दो चुनाव हो गये हैं लेकिन इस एम्स की स्थापना के लिए एक पत्थर तक नहीं लगा है, इस पर श्री नड्डा ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि मदुरै एम्स की स्थापना एवं निर्माण का काम जल्द शुरू हो।

भारत बायोटेक अकेले ही कोवैक्सीन का पेटेंट लेने चली थी

कोरोना के विषाणु को निष्क्रिय करने के लिए स्वदेश में विकसित कोवैक्सीन के टीके के पेटेन्ट हासिल करने के लिए भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) ने चुपचाप बिना बताये आवेदन कर दिया था लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय जीवाणुविज्ञान संस्थान (एनआईवी), तीनों संयुक्त रूप से आवेदक बने हैं।केन्द्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी।तृणमूल कांग्रेस के प्रो. सौगत राय ने एक सवाल में कहा कि कोवैक्सीन काेरोना संक्रमण के विरुद्ध दुनिया का सबसे प्रभावी टीका माना गया है जिसे आईसीएमआर और एनआईवी ने संयुक्त रूप से 35 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया था।(वार्ता)

नीट यूजी परीक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया बनाये सरकार, एटीए: सुप्रीम कोर्ट

BABA GANINATH BHAKT MANDAL  BABA GANINATH BHAKT MANDAL

Related Articles

Back to top button