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प्रौद्योगिकी के साथ संसदीय कार्यपद्धति में परिवर्तन के लिए तैयार रहने की जरूरत: बिरला

नयी दिल्ली : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कहा कि संसद की कार्यपद्धतियों में समय तथा प्रौद्योगिकी के बदलावों के साथ बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहने की जरूरत है।लोकसभा अध्यक्ष ने इस संदर्भ में सचिवालय कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था पर भी बल दिया।श्री बिरला ने लोकसभा सचिवालय की स्थापना की 95वीं वर्षगांठ पर संसद भवन में आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा, “ बदलते परिप्रेक्ष्य में संसद के दोनों सदनों की कार्य पद्धतियों में व्यापक बदलाव आए हैं और प्रौद्योगिकयों ने हमारी कार्य शैली को पूरी तरह से बदल दिया है। यह जरूरी है कि हम समय के साथ चलते हुए नवीनतम तकनीकों के लिए स्वयं को तैयार रखें। इसके लिए नियमित प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सीखते रहने की इच्छा रखने बहुत जरूरी है।

”उन्होंने कहा कि सचिवालय के कर्मियों का पी-20 सम्मेलन की सफलता में उनके परिश्रम का बड़ा योगदान रहा। साथ ही, अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से संविधान सदन से नए संसद भवन में स्थानांतरण का काम भी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।अपने कार्यकाल के दौरान लोक सभा सचिवालय में कार्यकुशलता और मितव्ययिता को बढ़ावा देने के लिए किये गए परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए, श्री बिरला ने कहा कि इस अवधि में बहुत-सी नई पहलें भी हुई हैं और कामकाज में प्रौद्योगिकी का उपयोग निरंतर बढ़ा है।उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस, सदस्य पोर्टल, डिजिटल संसद, डिजिटल लाइब्रेरी, दस्तावेजों के डिजिटलीकरण, संसदीय कार्यक्रमों की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग किया जाना, सोशल मीडिया में बढ़ती उपस्थिति और चिंतन शिविर जैसे कई नए प्रयास किए गए।

श्री बिरला ने इस अवसर पर अपने-अपने कार्यक्षेत्र और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन वाले सचिवालय के कई अधिकारियों तथा कर्मचारियों को सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए सचिवालय कर्मियों के कई बच्चों को भी सम्मानित किया।इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया। (वार्ता)

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