
बलरामपुर : शरद ऋतु के आगमन के साथ नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल के चार जिलों गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती मे स्थित ऐतिहासिक झीलें विदेशी परिंदो के मनमोहक कलरव से गुंजायमान हो चुकी हैं।गोण्डा जिले के वजीरगंज में स्थित पार्वती अरगा पक्षी विहार साइबेरियन पंक्षियों की अठखेलियां आकर्षण का केन्द्र बनी हुयी हैं। पक्षियों को देखने आ रहे पर्यटक पक्षी विहार का आनंद उठा रहे हैं। इससे अरगा-पार्वती झील की रौनक बढ़ गई है। यहां देशी-विदेशी पक्षियों का जमावड़ा लगने लगा है। मध्य एशिया व तिब्बत से लंबी दूरी तय करके आने वाले पक्षियों का कलरव इस झील में गूंज रहा है।
जिले से 30 किमी दूर टिकरी मार्ग पर ग्राम कोठा की झील अरगा व बहादुरा ग्राम में पार्वती झील एवं वजीरगंज कस्बे से सटी कोडर झील का अपना विशेष महत्व है। करीब पांच किमी क्षेत्र में फैली अरगा-पार्वती झील में अन्य पक्षियों के अलावा सैकड़ों सारस भी अपने- अपने जोड़े के साथ आ चुके हैं। प्रवासी पक्षी यहां अधिकांश प्रवासी पक्षी लेह, लद्दाख, साइबेरिया, मंगोलिया, तिब्बत से आए हैं। इनमें ब्राउन हेडेड गल यानि भूरा सिर ढोमरा, और ब्लैक हेडेड गल यानि काला सिर ढोमरा, जल कुकरी, पनचौरा आदि परिंदे हैं। इसमें पनजौरा प्रजाति प्रजनन भी करते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि साइबेरियन पक्षियों का शरीर गरम वातावरण के अनुकूल है और साइबेरिया में ठंड के मौसम में उनका जीवन दुश्वार हो जाता है। इसलिए दूर- देश से ये पक्षी जीवन रक्षा के लिए यहां आते हैं। वहीं तिब्बत से आने वाले पक्षियों में छोटी मुर्गाबी, नकटा, गिर्री व सुर्खाब, मध्य एशिया से आने वाले पक्षियों में काज, चट्टा व लगलग प्रमुख हैं। इसके अलावा तीतर, जंगली मैना, एप में पढ़ें न, लाल मोनिया, बया, छपका, नीलकंठ, धनेश, कठफोड़वा, बाज, चल और हरियल आदि पक्षी शामिल हैं।
इसके अलावा देशी पक्षियों में काला तीतर, भूरा तीर,बटेर, रंगीन बटेर, लक बटेर पहाड़ी भट तीतर ,तिब्बत से आने वाले पक्षियों में छोटी मुर्गाबी, नकटा, गिरी व सुर्खाब, मध्य एशिया से आने वाले पक्षियों में काज, चट्टा व लगलग प्रमुख हैं। इसके अलावा स्थानीय व बाहरी पक्षियों में काला तीतर, भूरा तीतर, बटेर, रंगीन बटेर, लक बटेर, पहाड़ी भट तीतर, भट तीतर, जंगली मैना, अगरका, खजन, लाल मोनिया, बया, छपका, नीलकंठ, धनेश, कठफोड़वा, बाज, चील और हरियल आदि पक्षी शामिल हैं।देश के विभिन्न स्थानों से राम नगरी अयोध्या आने वाले श्रद्धालु भी अरगा-पार्वती झील में पक्षियों का कलरव देखने जाते हैं, क्योंकि अयोध्या से अरगा-पार्वती झील मात्र 23 किमी दूर है। वहीं मधवापुर सती अनुसुइया आश्रम को जाने वाले श्रद्धालु भी अरगा- पार्वती झील में पक्षियों को देखने जाते हैं। यहां कोडर झील व पथरी झील भी है, लेकिन पक्षियों का जमावड़ा सिर्फ अरगा व पार्वती झील में ही रहता है। विदेशी पक्षी मेहमानों का आगमन नवंबर से ही शुरू हो जाता है और इनका पड़ाव फरवरी तक रहता है।
आरगा-पार्वती झील को गोखुर झील भी कहा जाता है। ये झील गाय के खुर के जैसी है। यहां का मौसम विदेशी पक्षियों को खूब भाता है। करीब पांच किमी क्षेत्र में फैली अरगा-पार्वती झील में अन्य पक्षियों के अलावा सैकड़ों सारस भी अपने अपने जोड़े के साथ आ चुके हैं।इसी प्रकार, बलरामपुर जिले के सौहेल्वा वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र का पक्षी बिहार गुंजायेमान है। यूरोपीय व एशियाई देश साइबेरिया , अफगानिस्तान व अन्य देशों से आये रंग बिरंगी विदेशी मेहमान पक्षी अपनी मृदुल चहचहाहट और मनमोहक अटखेलियों से आसपास एवं नेपाल से आ रहे पर्यटकों को खूब लुभा रहे है । शरद ऋतु की शुरुआत से ही साइबेरिया मे जबरदस्त बर्फबारी से पक्षियों को भोज्य पदार्थ का अकाल पड़ने लगता है। इसके कारण साइबेरियन पक्षी भोजन की तलाश मे भटककर यहां के पक्षी बिहार मे नवम्बर मास लगते ही उड़ान भर आते है और चार महीने पश्चात मार्च मास मे बसंत ऋतु का आगमन होते ही अपने गंतव्य स्थान पर लौट जाते है।
ये चार मास पक्षी बिहार पर्यटकों की बढ़ती आमद से हराभरा रहने के कारण वन विभाग को काफी लाभ होता है। इन दिनों दुर्लभ जाति व प्रजातियों के पण्कौआ ,पिहो ,जांघिल ,ड्बारु ,तिवारी ,नीलसर ,लालसर ,सीकपर ,पिंटेल ,सलही ,बारंकटा ,बगुला ,मैना, तोता ,सारस ,मोर और अन्य सुरीले पक्षियों ने पक्षी बिहार की हवाओं को भी संगीतमय सुरीली बना दिया है। अफगानिस्तान से आये हाईबैक्टेल ने पर्यटको को सम्मोहित कर जैसे अपनी मृदु वाणी के वश मे कर कैद कर रखा है। लुभावने ये विदेशी पक्षी लौटते समय प्रजनन भी करते है। पक्षियों के संग वन क्षेत्र मे पाये जाने वाले दुर्लभ सर्प ,वन्यजीव भी पर्यटकों को दिलखुश हरकतों से लुभा रहे है।सीमावर्ती तराई क्षेत्र में स्थित चौधरी चरण सिंह सरयू नहर पटना बैराज का जलाशय इन दिनों विदेशी चिड़ियों की चहचहाहट से गुंजायमान हो रहा है। बहराइच जिले के नवाबगंज ब्लॉक के जंगल के किनारे स्थित चौधरी चरण सिंह सरयू बैराज का जलाशय सैकड़ों हेक्टेअर में फैला हुआ है। तापमान में गिरावट होते ही विदेशी, लालसर, साइबेरियन पक्षियों का यहां आगमन शुरू गया है।
हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी डेरा डाले हुए हैं। विगत बीस वर्षों से इस जलाशय में विदेशी चिड़िया ठंड बिताने आती हैं। गर्मी शुरू होते ही चिड़ियां वापस लौटने लगती है। नेपाल बार्डर होने के नाते वन तथा पुलिस विभाग की ओर से इन चिड़ियों की निगरानी की जाती है।श्रावस्ती जिले के तराई इलाकों में पक्षियों की लगभग 450 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें तकरीबन 150 प्रकार के पक्षी रूस, चीन, यूरोप व हिमालय के बर्फीले इलाकों से यहां सर्दियां बिताने आते हैं। इन्हें देखने के शौकीन भी इस समय यहां एकत्र हो रहे हैं। सोहेलवा पक्षियों का पसंदीदा स्थल बना है। उच्च हिमालय में बसर करने वाले एक से बढ़कर एक सुंदर पक्षी इन दिनों यहां देखे जा सकते हैं। कुल मिलकर सोहेलवा में दुर्लभ पक्षियों का सुंदर संसार बसा है। जिले के सीताद्वार झील पर आये इन विदेशी मेहमान पक्षियों की चहचहाहट से सोहेलवा का रजिया तालाब, रामपुर, घोघवा बांध, सकरैल तालाब, खजुहाझुनझुनिया व नदियों पर तट पर पक्षीप्रेमियों का जमावड़ा लगता है।(वार्ता)



