
अंतरगृही यात्रा पर श्रद्धालु महिलाएं निकली, मणिकर्णिकाघाट पर गंगा स्नान से शुरुआत
वाराणसी । काशीपुराधपति की नगरी में अगहन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर मंगलवार की देर शाम अंतरगृही यात्रा पर श्रद्धालु महिलाएं कड़ाके की ठंड में नंगे पांव निकल पड़ी। मोक्षतीर्थ मणिकर्णिकाघाट पर खुले आसमान के नीचे रातभर भजन कीर्तन के बाद भोर में गंगा स्नान के बाद संकल्प लेकर महिलाएं और पुरुष 25 किलोमीटर लंबी अंतरगृही यात्रा पर निकल पड़ेंगे।
यात्रा में शामिल श्रद्धालु सिर पर गठरी लिए हुए गंगा घाटों के किनारे-किनारे मणिकर्णिका घाट से अस्सी घाट, जगन्नाथ मंदिर, संकटमोचन, साकेत नगर, खोजवां, लहरतारा, मंडुवाडीह, होते हुए कैंटोनमेंट पहुंचेगे। वहां से चौकाघाट में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन सुबह आदिकेशव घाट पर गंगा-वरुणा के संगम में डुबकी लगाकर श्रद्धालु बाटी-चोखा का भोग लगाएंगे। इसके बाद घाटों के रास्ते वापस मणिकर्णिका घाट आकर संकल्प पूरा करेंगे।
बताते चले धर्मनगरी काशी की पुरानी परम्परा में अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर काशी के अंदर अंदर परिक्रमा यात्रा निकलती है। जिसे अंतरगृही यात्रा कहते हैं। इस बार पूर्णिमा बुधवार को सुबह 08.02 मिनट से लग रही है। जो गुरूवार आठ दिसम्बर की सुबह 09.37 तक रहेगी।लोगों में विश्वास है कि त्रेतायुग में माता सीता ने अंतरगृही यात्रा की शुरूआत की थी। अंतरगृही यात्रा करने से श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
यात्रा की शुरुआत भी माता सीता का ध्यान करके की जाती है। इस यात्रा को प्रदक्षिणा यात्रा भी कहा जाता है। अंतरगृही यात्रा के साथ पिशाचमोचन स्थित कर्पदीश्वर महादेव के दर्शन का भी विधान है।(हि.स.)



