
वाराणसी । किन्नर समाज ने महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में मंगलवार को पिशाचमोचन कुंड पर अपने ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। किन्नर समाज के संतों की मौजूदगी में किन्नरों ने विधि विधान से पंडा मुन्ना पांडेय की देखरेख में सामूहिक पिंडदान और श्राद्ध कर्म के बाद हवन भी किया।
महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हर दूसरे साल हम अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करते हैं। किन्नर परम्परा में जो हमें छोड़ कर चले गये। उनका कोई श्राद्धकर्म नहीं होता। उनको सिर्फ जलाकर आ जाते हैं लेकिन अब हम लोग अपने समाज के मृत लोगों के लिए सामूहिक पिंडदान के लिए संकल्पित हैं। उन्होंने बताया कि हम लोग वर्ष 2016 से सामूहिक पिंडदान कर रहे हैं। हर किन्नर मोक्ष की ओर बढ़े। हमारा धर्म है कि हर आत्मा को सद्गति मिले। वो शांत रहे, इसलिए पिंडदान करते हैं।
वाराणसी में काशी तमिल संगमम के आयोजन पर महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि वणक्कम काशी में पूरी दुनिया समाहित है। सराहनीय बात है कि दक्षिण के लोग बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर रहे हैं। उत्तर और दक्षिण के संस्कृति से परिचित हो रहे है।
उज्जैन स्थित किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भवानी मां ने बताया कि मुगल काल में किन्नर समाज को हिजड़ा समाज बना दिया गया। तब से कई प्रक्रियाएं बदल गईं। लोगों का कहना था कि किन्नर को सनातन धर्म में जगह नहीं मिलनी चाहिए। ये लोग मुसलमान होते हैं। वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट से हमें वोट डालने का अधिकार मिला और हिंदुस्तानी होने का अधिकार मिला। तब हम धार्मिक कामों में शामिल हुए।(हि.स.)



