
कैदियों को वर्चुअल मोड में भारत के बाहर के लोगों से मिलने की अनुमति क्यों नहीं देता जेल प्रशासन: हाई कोर्ट
नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट ने जेल प्रशासन से पूछा है कि वो ये बताए कि वो कैदियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये भारत के बाहर के लोगों से मिलने की अनुमति क्यों नहीं देता है। जस्टिस यशवंत वर्मा की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 09 फरवरी 2023 को करने का आदेश दिया।सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि वो ये समझता है कि कैदियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग से बात करने की सुविधा क्यों नहीं दी जा रही है लेकिन दूसरे कैदियों जिनके रिश्तेदारों की पहचान स्थापित हो चुकी हो, उन्हें वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती है। तब जेल प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा वजहों से ऐसा संभव नहीं है। जेल प्रशासन ने कहा कि फोन पर बात कराने की अनुमति दी जा सकती है।
इसके पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा था कि आप सिस्टम अपग्रेड कीजिए। जेल प्रशासन काफी पहले ही कैदियों को फोन पर बात करने की अनुमति दे चुका है। आप वीडियो कांफ्रेंसिंग शुरू क्यों नहीं कर रहे हैं। तब दिल्ली सरकार ने कहा था कि जेल प्रशासन जानबूझकर कैदियों को सुरक्षा कारणों की वजह से भारत के बाहर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बात करने की अनुमति नहीं देता है। तब कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा था कि आप हवा में बात नहीं कर सकते हैं। आप हमें बताइए कि वीडियो कांफ्रेंसिंग सुरक्षा कैसे प्रभावित होती है। हम आपकी चिंताओं को समझते हैं लेकिन आप अपना पक्ष स्पष्ट रखें।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील अदीत एस पुजारी ने कहा था कि जेल प्रशासन ने कई सुधार किए हैं। लेकिन विदेशी कैदियों को वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा देने और फिजिकल मीटिंग की अनुमति देने जैसी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा खान-पान से जुड़े मसलों का भी समाधान चाहते हैं। इसके अलावा जेलों में कैदियों को प्रताड़ित करने की शिकायत अलग है। याचिका दिल्ली हिंसा के आरोपितों और पिंजरा तोड़ संगठन के सदस्यों नताशा नरवाल और देवांगन कलीता ने दायर की है। पिछले 15 जून को दोनों को यूएपीए के तहत दर्ज मामले में हाई कोर्ट ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था।
बता दें कि पिछले 3 जून को हाई कोर्ट ने दोनों को अपने खर्चे पर अपनी पसंद का चिकित्सक से सलाह लेने की अनुमति दी थी।सुनवाई के दौरान नताशा नरवाल और देवांगन कलीता की ओर से वकील अदीत एस पुजारी ने कहा था कि वर्तमान में किसी भी कैदी को भारत से बाहर के किसी व्यक्ति से बात करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने मांग की थी कि विदेश में रहनेवाले लोगों से भी बात करने की अनुमति दी जाए।
सुनवाई के दौरान पुजारी ने कहा था कि जेल में कैदियों को अपनी पसंद के निजी डॉक्टरों से सलाह नहीं लेने दी जाती है, भले ही उसके लिए कैदी अपना पैसा खर्च करने को तैयार हों। उन्होंने कहा था कि नताशा नरवाल जब अपने पिता के देहांत होने पर अंतरिम जमानत पर रिहा हुई थीं तो उन्हें एक मानसिक चिकित्सक से मिली थीं। लेकिन जेल में वापस आने पर उन्हें चिकित्सक से नहीं मिलने दिया जा रहा है।
नताशा नरवाल और देवांगन कलीता पर आरोप है कि उसने पिछले 22 फरवरी 2020 को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सड़क जाम करने के लिए लोगों को उकसाया था। नताशा नरवाल और देवांगन कलीता के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज किए गए हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब दो सौ लोग घायल हो गए थे।(हि.स.)



