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बनकटी हनुमान मंदिर परिसर में मानस की चौपाइयों की गूंज,नवाह्न पारायण पाठ शुरू

वाराणसी । दुर्गाकुंड स्थित प्रसिद्ध प्राचीन सेनापति बनकटी हनुमान मंदिर में अगहन कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रविवार से नवाह्न पारायण पाठ शुरू हुआ। सीता राम विवाह पंचमी के उपलक्ष में आयोजित पाठ का शुभारंभ मंदिर के प्रधान पुजारी पं. गया प्रसाद मिश्र ने किया।पं. गया प्रसाद ने श्री रामचरित मानस पोथी, व्यास श्याम सुंदर पांडेय एवं ब्राह्मणों की विधिवत आरती उतारी। इस अवसर पर गया प्रसाद ने कहा कि श्री रामचरित मानस मानव के जीवन को संवारने के साथ-साथ उसके सभी दुखों का समाधान भी करता है। जो भी मानव मानस को जीवन में उतार लेता है । उसका जीवन एवं परिवार सुखमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि मानस ही जीवन का सार है । उन्होंने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 08 से दोपहर 12 बजे तक पाठ का आयोजन होगा।

बताते चले काशी के प्राचीन हनुमान मन्दिरों में से एक है बनकटी हनुमान मंदिर। मंदिर के पुजारी ने बताया कि काफी पहले इस स्थान पर घना वन था, जिसमें चारों तरफ बड़े-बड़े वृक्ष थे । जंगल के बीच से ही हनुमान जी की मूर्ति मिली थी। इसलिए इस मूर्ति को बनकटी हनुमान जी कहा जाता है। कहा जाता है कि काशी प्रवास के दौरान रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी नियमित बनकटी हनुमान मंदिर में दर्शन पूजन के लिए आते थे। गोस्वामी तुलसीदास की बनकटी हनुमान जी में बड़ी आस्था थी। कहा जाता है कि एक बार बनकटी हनुमान जी कुष्ट रोगी के रूप में तुलसीदास जी से मिले थे और अपना दर्शन दिया था। पंडित गया प्रसाद मिश्र के अनुसार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के दौरान पंडित मदन मोहन मालवीय ने लगातार 41 दिनों तक बनकटी हनुमान जी का दर्शन किया था। बनकटी हनुमान जी के दर्शन से सभी प्रकार के दुःख दूर हो जाते हैं।(हि.स.)

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