किसानों की समृद्धि के लिए पश्चिम यूपी के गांवों में पहुंच रही योगी सरकार
योगी सरकार की ओर से गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि और समय पर भुगतान से किसान खुशहाल हैं। बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर में 1 से 11 दिसंबर तक किसान स्वयं ‘कृषि चौपाल’ आयोजित कर रहे हैं। किसानों का फीडबैक सीधे सरकार तक जाएगा, जिससे गन्ना किसानों के संरक्षण और विकास हेतु नए कदम उठाए जाएंगे।
- गन्ना मूल्य वृद्धि से किसानों का मनोबल बढ़ा, 1 से 11 दिसंबर तक चार जिलों में लगेगी चौपाल
बागपत : योगी सरकार के नेतृत्व में किसानों को गन्ना का उचित दाम मिल रहा है। गन्ना मूल्य का जल्द भुगतान होने से किसान खुशहाल भी हो रहे हैं। योगी सरकार द्वारा गन्ना किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की बदौलत किसान अब स्वयं ‘कृषि चौपाल’ लगा रहे हैं। पहली से 11 दिसंबर तक यह चौपाल पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में लगेगी। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचेंगे, जिसके जरिए सरकार गन्ना किसानों के संरक्षण व संवर्धन के लिए और बड़े कदम उठाएगी।
11 दिसंबर तक चार जनपदों में होगी दो-दो चौपाल
किसानों द्वारा 11 दिसंबर तक पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ लगेगी। यह चौपाल बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर में होगी। चारों जनपदों में दो-दो कृषि चौपाल लगेगी। तीन दिसंबर को बागपत के हिसावदा गांव में चौपाल लगेगी। पांच व छह दिसंबर को हापुड़, 7 व 8 को शामली में कृषि चौपाल लगेगी। 10-11 दिसंबर को मुजफ्फरनगर के यहियापुर व दाहोद गांव में कृषि चौपाल लगाई जाएगी। कृषि चौपाल की कमान भी किसान ही संभालेंगे। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचाए जाएंगे। इसके आधार पर योगी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए और भी नए कार्य व प्रयास करेगी।
बागपत के मीतली गांव में लगी पहली चौपाल, सिर्फ किसानों की ही रही भागीदारी
पहली कृषि चौपाल सोमवार को लगी। इसका आयोजन बागपत के मीतली गांव में किया गया। किसानों द्वारा लगाए गए चौपाल में सिर्फ किसानों ने ही हिस्सा लिया। किसानों ने बढ़ाए गए गन्ना मूल्य के लिए योगी सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में मूल्य वृद्धि की। पिछली सरकारें गन्ना किसानों का सुध नहीं लेती थी, लेकिन अब इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है। किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले भी योगी सरकार के किसान हित में किए गए फैसले से मौन हो गए हैं।
देश की उन्नति के पांच आधार पर किया गया कार्य
किसानों ने कहा कि एक तरफ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में जहां किसान, युवा, महिला, नौजवान का ध्यान रखा, वहीं उन्नति के मुख्य पांच आधार पर भी कार्य किया। किसानों ने कहा कि 2014 में जब हाईवे पर चलते थे तो क्या हालात थे, यह किसी से छिपा नहीं है। किसी भी देश की उन्नति के पांच आधार होते हैं स्वास्थ्, शिक्षा, सड़क, बिजली-पानी। 2014 के बाद मोदी और 2017 से योगी सरकार की बदौलत क्षेत्र का कायाकल्प हुआ। अब हर वर्ग का समुचित विकास भी हो रहा है।
योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में की 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि
योगी सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कोल्ड स्टोरेज, गांवों में भी हो रहा है प्रोसेसिंग पार्क का निर्माण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अन्नदाताओं की सहूलियत और उनकी समृद्धि के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं और समय समय पर कार्यों और योजनाओं की समीक्षा करते रहते हैं। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में किसान अब पहले की तुलना में लगातार समृद्धि के वाहक बन रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने के मिशन से किसानों को भी जोड़ने का काम किया है। मुख्यमंत्री के दिशा निर्देश से डिजिटल कृषि नीति पर जोरों से काम हो रहा है। अन्नदाता किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं। वो न केवल नागरिकों का पेट पालते हैं बल्कि अर्थव्यवस्था में भी योगदान करते हैं। वर्तमान डिजिटल क्रांति के युग में किसान पीछे न छूट जाएं इसके लिए डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम के विकास के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है।
अन्नदाता की आय में डिजिटल एग्रीकल्चर इकोसिस्टम से वृद्धि
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार अन्नादाता को कृषि संबंधित डाटा एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध करा रही है। किसान अब बीज, उर्वरक, मौसम, सिंचाई, बीमा, बाजार, लॉजिस्टिक और फसल से संबंधित डाटा आसानी से प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल कृषि नीति को अतंराष्ट्रीय तकनीक से जोड़ा गया है। उत्तर प्रदेश में डिजिटलीकरण, ई-मार्केट लिंकिंग, वेयरहाउसिंग, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट उन्मुख नीतियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई जान दे रही हैं। डिजिटल कृषि के विकास पर योगी सरकार द्वारा 4000 करोड़ की परियोजना को तेज गति से लागू करने के निर्देश दिए गए है।
कृषि मंडियों को तकनीक से जोड़ने पर किसानों को लाभ
उत्तर प्रदेश में पहले कृषक मंडियां पुराने ढर्रे पर चलती थीं जिसमें तकनीक का कोई विशेष योगदान नहीं था। इसकी वजह से अन्नदाता और खरीदारों के बीच पारदर्शी प्लेटफॉर्म की कमी थी। पुरानी व्यवस्था में बिचौलिये सारा फायदा उठा ले जाते थे और किसानों को अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था। योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों का परिणाम है कि मंडियों का अब डिजिटलीकरण कर दिया गया है कि जिससे अन्नदाता को फसल और मौसम की सटीक जानकारी मिल रही है। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस सुविधाओं का विकास
उत्तर प्रदेश में 2017 से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की पहुंच कोल्ड स्टोरेज तक सीमित थी। 2017 में यूपी की बागडोर संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस को बढ़ाने पर जोर दिया। देश के कुल स्टोरेज में से 40% कोल्ड स्टोरेज उत्तर प्रदेश में हैं। इस समय प्रदेश में लगभग 2500 कोल्ड स्टोर हैं। इसकी कुल भंडारण क्षमता 1.55 करोड़ मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। वर्तमान सरकार कोल्ड स्टोरेज के आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है और इसे किसानों की आय से भी जोड़ा गया है। प्रदेश में पीपीपी मॉडल से बड़ी संख्या में नए कोल्डस्टोरेज बन रहे हैं।
प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों से वैल्यू एडिशन और नई मार्केटिंग संभावनाएं बढ़ी
उत्तर प्रदेश में कृषि प्रसंस्करण कृषि सेक्टर की नई संभावना बनकर उभर रही है। योगी सरकार का अन्नदाता की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान है। किसानों का उत्पादन अब खेतों से सीधे विदेश तक पहुंच रहा है। छोटे-छोटे गांवों में भी एग्रो प्रोसेस यूनिट, फूड पार्क और ODOP आधारित कृषि उत्पादों पर विशेष ध्यान है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अनुसार प्रदेश में लगभग 75 हजार खाद्य प्रसंस्करण इकाईयां स्थापित हैं। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के तहत 428 इकाइयां लगाई जा चुकी हैं। सरकार ने हर जिले में एक हजार से अधिक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के लक्ष्य के साथ खाद्य प्रसंस्करण विभाग हर गांव में कम से कम इकाई की स्थापना की योजना बना रहा है। इससे अन्नदाता को अपने कृषि उत्पादों का उचित दाम मिलेगा साथ ही किसानों-ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिल सकेगा।
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