Varanasi

“जब सेवा बन गई पहचान: जानिए कैसे रतन कुमार गुप्ता स्मृति सम्मान बदल रहा है समाज की सोच”

बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल द्वारा मध्यदेशीय वैश्य समाज के रत्न स्वर्गीय रतन कुमार गुप्ता की स्मृति में वर्ष 2024 से “रतन कुमार गुप्ता स्मृति राष्ट्रीय सेवा सम्मान” प्रदान किया जा रहा है। इस सम्मान के माध्यम से उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, समाज सेवा तथा रक्तदान जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्वजातीय बंधुओं को सम्मानित किया गया। यह पहल समाज में सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की प्रेरणादायक परंपरा बन चुकी है।

  • “115 बार रक्तदान से लेकर राष्ट्रीय सम्मान तक: क्यों चर्चा में है रतन कुमार गुप्ता स्मृति सेवा अभियान?”

वाराणसी। जब समाज को दिशा देने वाले व्यक्तित्व समय से पहले विदा हो जाते हैं, तब उनकी स्मृतियाँ केवल याद नहीं रहतीं – वे प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही प्रेरणा का नाम है स्वर्गीय रतन कुमार गुप्ता। बाबा गणिनाथ भक्त मण्डल द्वारा वर्ष 2024 से प्रारंभ किया गया “रतन कुमार गुप्ता स्मृति राष्ट्रीय सेवा सम्मान” आज मध्यदेशीय वैश्य समाज में सेवा, समर्पण और संस्कार का राष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है। यह सम्मान केवल उपलब्धियों का मंच नहीं, बल्कि उस निःस्वार्थ भावना का उत्सव है जिसने रतन जी को समाज के हृदय में अमर कर दिया।

एक व्यक्तित्व, जो पद से नहीं – सेवा से बड़ा था

रतन कुमार गुप्ता पुत्र स्वर्गीय रामाधार गुप्ता का जीवन त्याग, विनम्रता और आत्मीयता की जीवित मिसाल था। भारत और नेपाल के स्वजातीय बंधु उनके मधुर व्यवहार से इतने प्रभावित थे कि वे केवल नाम नहीं, एक विश्वास बन गए थे। बनारस के प्रतिष्ठित परिवारों में गिने जाने वाले इस परिवार ने “सेवा ही धर्म है” को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया।

किसी भी स्वजातीय कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वयं संभालना, अतिथियों का आत्मीय स्वागत करना, और “अन्नपूर्णा प्रसाद” की गरिमा बनाए रखना – यह उनकी पहचान थी। सबसे बड़ी बात – तन, मन और धन से समाज की सेवा करने के बावजूद उन्होंने कभी कोई पद स्वीकार नहीं किया। यदि पद देने की चर्चा भी होती, तो वे विनम्रता से बैठक से उठ जाते। आज उनके सुपुत्र निखिल कुमार गुप्ता उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। सेवा की यह ज्योति अब तीसरी पीढ़ी के हाथों में है।

वर्ष 2024 : उत्कृष्टता का प्रथम सम्मान

वर्ष 2024 में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाज के प्रतिभाशाली रत्नों को सम्मानित किया गया –

  • युवा उद्यमी – मनीष कुमार साव (महाराष्ट्र)
  • स्वास्थ्य सेवा – सूरज गुप्ता (उत्तर प्रदेश)
  • शिक्षा क्षेत्र – संतोष कुमार (बिहार)
  • खेल क्षेत्र – नेहा गुप्ता (उत्तर प्रदेश)
  • सामाजिक कार्य – अभिषेक कुमार गुप्ता (उत्तर प्रदेश)

इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में संघर्ष, परिश्रम और प्रतिबद्धता से समाज का गौरव बढ़ाया।

वर्ष 2025 : सम्मान का विस्तार, सेवा का विस्तार वर्ष 2025 में यह सम्मान और व्यापक हुआ

उद्यमिता श्रेणी – श्री राजीव गुप्ता (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
स्वास्थ्य सेवा श्रेणी – श्री कृष्ण कुमार गुप्ता एवं श्री बलराम गुप्ता (बजबज, पश्चिम बंगाल)
समाज सेवा श्रेणी – श्री मनीष गुप्ता (गाजीपुर, उत्तर प्रदेश)
शिक्षा क्षेत्र श्रेणी – श्री नवल मद्धेशिया (बलिया, उत्तर प्रदेश)
खेल क्षेत्र श्रेणी – श्री प्रतीक मद्धेशिया (अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी, बरहज)

ये सभी सम्मानित व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा के स्तंभ बनकर उभरे हैं।

रक्त वीर सम्मान : जीवनदान की महान परंपरा

वर्ष 2025 में युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने हेतु एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। “रक्तदान श्रेणी” की शुरुआत की गई – ताकि मानवता की सर्वोच्च सेवा को राष्ट्रीय मंच मिले।

विशेष रूप से सम्मानित रक्तवीर –

  • राजेश गुप्ता “सेंचुरियन” (वाराणसी) – 115 बार
  • संतोष मद्धेशिया (देवरिया) – 24 बार
  • आशुतोष गुप्ता (वाराणसी) – 41 बार
  • मनोज मद्धेशिया (मुंबई) – 49 बार
  • अंगद गुप्ता (कसया) – 51 बार
  • राकेश गुप्ता (गाजीपुर) – 60 बार

ये आंकड़े नहीं, जीवन बचाने की अनगिनत कहानियाँ हैं। हर रक्तदान किसी परिवार की उम्मीद को फिर से जीवित करता है। किसी भाई की कलाई तो किसी के मांग का सिंदूर तो किसी के खानदान का वंश को संजो कर जीवित रखना। ये कुल गुरु संत शिरोमणि बाबा गणिनाथ जी का आशीर्वाद है।

निष्पक्ष चयन, गरिमामय प्रक्रिया

सम्मान के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति गठित की गई, जिसमें शामिल थे –

  • डॉ. मनोज कुमार गुप्ता (वरिष्ठ ENT सर्जन, वाराणसी)
  • श्रीमती अर्चना गुप्ता (पूर्व राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष, रांची, झारखंड)
  • श्री अमरजीत कुमार शाह (प्रदेश अध्यक्ष, गुजरात)

इनकी पारदर्शिता और निष्पक्षता ने इस सम्मान की विश्वसनीयता को और सशक्त किया।

समाज के नाम एक प्रेरक संदेश

आज आवश्यकता है कि हम केवल दर्शक न बनें, बल्कि सहभागी बनें। समाज का उत्थान कुछ लोगों के प्रयास से नहीं, सामूहिक संकल्प से होता है। रतन कुमार गुप्ता जी का जीवन हमें सिखाता है – “महानता पद से नहीं, सेवा से मिलती है।”

यह सम्मान एक संदेश है – हर युवा अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट बने, हर परिवार सेवा को संस्कार बनाए, हर व्यक्ति समाज के लिए समय निकाले। क्योंकि जब समाज सशक्त होता है, तभी हमारी पहचान भी सशक्त होती है।

  • रतन कुमार गुप्ता जी की पुण्य स्मृति को शत-शत नमन।
  • और समाज सेवा के इस पवित्र अभियान में सभी स्वजातीय बंधुओं से आगे आने का आह्वान।

सेवा ही सबसे बड़ा सम्मान है।

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