“जब हिंदू भाव भूला तो आई विपदा… भलुअनी में संघ नेता की चेतावनी”
भलुअनी, देवरिया में आयोजित हिंदू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत सरकार्यवाह रामविलास चौबे ने कहा कि हिंदू समाज का उद्देश्य केवल स्वयं का उत्थान नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को सही दिशा देना है। उन्होंने जाति-भेद और छुआछूत छोड़कर आचरण शुद्ध करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में हिंदू एकता, समरसता और मानवता के संरक्षण पर बल देते हुए भारत को मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया गया।
- संघ शताब्दी वर्ष के हिंदू सम्मेलन में सरकार्यवाह रामविलास चौबे ने जाति-भेद त्यागकर संगठित होने पर दिया जोर
भलुअनी (देवरिया)। हिंदू समाज का लक्ष्य केवल स्वयं का उत्थान नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व का मित्र बनकर मानवता को सही दिशा देना है। यह उद्बोधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गोरक्ष प्रांत के सरकार्यवाह रामविलास चौबे ने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में भलुअनी के मां भगवती पैलेस में हुए भव्य हिंदू सम्मेलन में दिया। अपने ओजस्वी और प्रेरक संबोधन में सरकार्यवाह ने स्पष्ट किया कि विश्व-कल्याण का मार्ग अपने घर, समाज और आचरण के सुधार से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि जब तक हिंदू समाज जाति-भेद और छुआछूत से ऊपर उठकर स्वयं को सुदृढ़ नहीं करेगा, तब तक वह दूसरों का सहारा बनने में सक्षम नहीं हो सकता। उनके शब्दों में, “जो स्वयं खड़ा नहीं होगा, वह गिरे हुए को उठाने की क्षमता भी नहीं रखेगा।”

उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया अनैतिकता, अधर्म, अन्याय, युद्ध, जल-संकट और पर्यावरण संकट से जूझ रही है। ऐसी स्थिति में हिंदू समाज का कर्तव्य है कि वह धर्म को आधार बनाकर मानवता के रक्षक के रूप में आगे आए। इतिहास का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि जहां अनेक देशों ने शक्ति के बल पर शोषण और गुलामी का मार्ग अपनाया, वहीं भारत की परंपरा करुणा, समरसता और मानवता की रही है। भारत के राजाओं, संतों, ऋषियों और महापुरुषों ने सदैव विश्व को मार्गदर्शन दिया-कभी शोषण नहीं।

सरकार्यवाह ने कहा कि आज भारत के सामने विश्व गुरु बनने का दायित्व है, पर यह भूमिका प्रभुत्व की नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की होनी चाहिए। इसका आशय सत्ता नहीं, बल्कि हिंदू धर्म, हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्यों को जीवन में उतारना है। उन्होंने संघ गीत की पंक्तियां उद्धृत करते हुए चेताया- “हिंदू भाव को जब-जब भूले, आई विपद महान।” उन्होंने कहा कि हिंदू भाव से विमुख होना संकटों को न्योता देना है। हिंदू एकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जहां एकता है, वहीं शक्ति है। संगठित हिंदू समाज को कोई तोड़ नहीं सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने हिंदू सम्मेलन के आयोजन को हिंदू जागरण का महापर्व बताया और समाज को संगठन के सूत्र में बंधने का आह्वान किया।
सम्मेलन की अध्यक्षता आन्जनेय दास जी महाराज ने की। आयोजन समिति के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह सहित रामबृक्ष पुजारी, सीताराम, भाष्कर और पूनम मिश्र ने भी अपने विचार रखे। मंचासीन सभी अतिथियों का अंगवस्त्र पहनाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया। कार्यक्रम में विनोद मद्धेशिया, प्रणव दूबे, दिनेश गुप्ता, मंजू मिश्रा, संतोष मद्धेशिया, सुनील जायसवाल, जितेन्द्र सागर सहित सैकड़ों की संख्या में पुरुष और महिलाएं उपस्थित रहीं। सम्मेलन का कुशल संचालन प्रमोद मिश्रा एवं डॉ. योगेश गुप्ता ने किया।समूचा आयोजन अनुशासन, भावनात्मक ऊर्जा और राष्ट्र-चिंतन से ओतप्रोत रहा, जिसने उपस्थित जनसमुदाय को सामाजिक समरसता, एकता और सेवा के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
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