टेलिस्कोप से चांद देख रहीं गांव की बेटियां, बागपत की एस्ट्रोनॉमी लैब से अंतरिक्ष सपनों को मिली नई उड़ान
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब ग्रामीण छात्राओं के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। यहां बेटियां टेलिस्कोप से चंद्रमा का अवलोकन कर रही हैं और डिजिटल सॉफ्टवेयर से अंतरिक्ष विज्ञान सीख रही हैं। योगी सरकार की इस पहल से बालिकाओं में वैज्ञानिक सोच, आत्मविश्वास और अंतरिक्ष करियर के प्रति रुचि बढ़ रही है। एआई-संचालित स्मार्ट क्लास और प्रयोग आधारित शिक्षा से सरकारी स्कूलों की बेटियां अब विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान बना रही हैं।
- योगी सरकार की पहल से ग्रामीण छात्राओं को हाईटेक खगोलशास्त्र लैब, एआई स्मार्ट क्लास और नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन का मिला अवसर
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की धरती से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जो न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की गवाही दे रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि जब अवसर मिलता है, तो गांव की बेटियां भी सितारों से संवाद करने लगती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी पहल के तहत बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब अब ग्रामीण बालिकाओं के सपनों को नई दिशा और नई उड़ान दे रही है।
यह केवल एक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि वह खिड़की है, जहां से गांव की बेटियां अब अंतरिक्ष की अनंत दुनिया को अपनी आंखों से देख रही हैं। ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनाई गई इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला के माध्यम से लगभग 100 छात्राओं को आधुनिक विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को समझने और अनुभव करने का अभूतपूर्व अवसर मिल रहा है।
प्रयोगों से खुल रही अंतरिक्ष की अनजानी दुनिया
इस प्रयोगशाला में 45 से अधिक प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां छात्राएं केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं प्रयोग करके अंतरिक्ष के रहस्यों को समझ रही हैं। ग्रहों की गति, तारों की संरचना, आकाशगंगाओं का विस्तार और ब्रह्मांड के सिद्धांत-ये सभी अब उनके लिए केवल शब्द नहीं, बल्कि अनुभव बन चुके हैं।
एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर की सहायता से छात्राएं डिजिटल माध्यम पर आकाशीय पिंडों की स्थिति, उनकी गति और संरचना को विस्तार से देख और समझ रही हैं। यह तकनीक आधारित शिक्षा उनके भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को विकसित कर रही है और उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रही है। जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि इस प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ छात्राओं को नवीनतम खगोलशास्त्र सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे अंतरिक्ष विज्ञान को केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से समझ रही हैं।
जब बेटियों ने पहली बार टेलिस्कोप से देखा चांद
इस पहल का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक पहलू वह क्षण है, जब एक ग्रामीण बालिका अपने हाथों से टेलिस्कोप संचालित करती है और पहली बार चंद्रमा को अपने सामने देखती है। यह केवल एक दृश्य नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का जन्म है।
वह क्षण, जब उसकी आंखों में चमक होती है, जब उसके चेहरे पर मुस्कान होती है-वह इस बात का प्रमाण होता है कि सपनों को उड़ान देने के लिए केवल अवसर की आवश्यकता होती है। शिक्षकों का कहना है कि इस अनुभव के बाद छात्राओं में आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वे अब विज्ञान को कठिन विषय नहीं, बल्कि अपने भविष्य का आधार मानने लगी हैं।
नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन से बढ़ रही वैज्ञानिक सोच
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय छपरौली की छात्राएं नियमित रूप से इस प्रयोगशाला में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन जैसी गतिविधियां उनके लिए किसी रोमांच से कम नहीं हैं। रात के आकाश में चमकते सितारों को पहचानना, ग्रहों की स्थिति को समझना और अंतरिक्ष की विशालता को महसूस करना-यह सब उनके जीवन का हिस्सा बन चुका है। यह अनुभव उनके भीतर जिज्ञासा को जन्म दे रहा है और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, खगोलशास्त्र और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से शिक्षा में तकनीकी क्रांति
बागपत जिले में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास की शुरुआत की गई है। इन स्मार्ट क्लास के माध्यम से छात्राओं को इंटरैक्टिव, डिजिटल और तकनीक आधारित शिक्षा मिल रही है। इससे शिक्षा अब केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह अनुभव आधारित और रोचक बन गई है। डिजिटल कंटेंट, एनीमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण पद्धति से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।
बदल रही है तस्वीर, बन रहा है नया भविष्य
यह पहल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। यह उस नए भारत की तस्वीर है, जहां गांव की बेटियां भी अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनने का सपना देख रही हैं। आज छपरौली की ये बेटियां केवल चांद को देख नहीं रही हैं, बल्कि वे उस दिशा में कदम बढ़ा रही हैं, जहां एक दिन वे स्वयं अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बन सकती हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा, संसाधन और अवसर दिए जाएं, तो ग्रामीण भारत की बेटियां भी अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छू सकती हैं। यह केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि सपनों का विस्तार है। यह केवल प्रयोगशाला नहीं, बल्कि भविष्य की प्रयोगशाला है-जहां से निकलेंगी भारत की अगली पीढ़ी की वैज्ञानिक बेटियां, जो सितारों से आगे की दुनिया को भी रोशन करेंगी।
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