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अवध शिल्प ग्राम में दिखेगी सूबे की संपन्न विरासत

तीन दिवसीय उ.प्र. दिवस का शुक्रवार को उद्घाटन करेंगे मुख्यमंत्री और राज्यपाल

रामायण, महाभारत, भव्य कुंभ, दीपोत्सव और कृष्ण जन्मोत्सव के अलावा और भी बहुत कुछ

शौर्य का प्रतीक आल्हा के साथ भोजपुरी की मिठास और कजरी की कसक भी

लखनऊ, जनवरी । शुक्रवार से यहां अवध शिल्प ग्राम में तीन दिन तक आप उ.प्र. की बेहद संपन्न विरासत और विविधता को देख सकेंगे। अवसर होगा उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का। इसमें रामायण, महाभारत, प्रयागराज का भव्य एवं दिव्य कुंभ, अयोध्या का दीपोत्सव और मथुरा के कृष्ण जन्मोत्सव के अलावा और भी बहुत कुछ होगा।

मसलन जौनपुर के फौजदार सिंह बुंदेलियों के शौर्य और आदर्श का प्रतीक आल्हा सुनाएंगे तो लखनऊ के अजीत पांडेय भोजपुरी की मिठास को स्वर देंगे। मीरजापुर की ऊषा गुप्ता कजरी की कसक बयां करेंगी। वंदना मिश्रा अवधी गायन करेंगी तो शबद, कीर्तन और गुरूवाणी को भी स्वर मिलेगा। जीवनराम का धोबिया और बांदा के रमेश पाल का पाई-डंडा नृत्य लोगों को अपनी लोकशैली के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रेरित करेगा।

आकर्षण का केंद्र बनेंगी प्रदर्शनियां
राजकीय अभिलेखागार की ओर से आयोजित गणतंत्र दिवस, उत्तर प्रदेश का इतिहास। अयोध्या शोध संस्थान की ओर से आयोजित भगवान श्रीराम की विश्वयात्रा, राज्य ललितकला अकादमी की ओर से आयोजित कृष्ण एवं महाभारत एवं 100 फीट के कैनवास पर जल एवं पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित अयोध्या का भव्य दीपोत्सव एवं मथुरा का कृष्ण जन्मोत्सव की प्रदर्शनियां सबके आकर्षण का केंद्र होंगी। सूचना सहित अन्य विभागों की प्रदर्शनियां इसमें और चार चांद लगाएंगी।

लोगों को लोट-पोट करेंगी राजू और उनकी टीम
मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव के साथ प्रदेश और मुंबई के कलाकार अपने चुटकुलों से आपको लोटपोट कर देंगे। तो मंच पर प्रदेश के सभी मंडलों के विजयी कलाकारों की टोली भी अपनी प्रस्तुतियों से मंच को सजीव करेगा।लोक नृत्य के चार दलों की प्रस्तुतियां प्रदेश के लोककला के संपन्न विरासत का प्रतीक बनेंगी। रविशंकर म्यूजिकल फाउंडेशन की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी लोगों को जरूर पसंद आएंगी।

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