Health

30 वर्ष से कम आयु के 30% युवाओं में बढ़ रही घुटनों के दर्द की समस्या

बदलती जीवनशैली और व्यायाम की कमी के कारण 30 वर्ष से कम आयु के लगभग 30 प्रतिशत युवाओं में घुटनों के दर्द की समस्या बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर परामर्श, वजन नियंत्रण, नियमित व्यायाम और संतुलित आहार से ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या को रोका जा सकता है।

  • विशेषज्ञों ने चेताया-व्यायाम की कमी, मोटापा और खराब जीवनशैली ऑस्टियोआर्थराइटिस का प्रमुख कारण

उदयपुर । देश में बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और गलत खानपान की आदतों के कारण कम उम्र में ही घुटनों के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार 30 वर्ष से कम आयु के लगभग 30 प्रतिशत लोगों में घुटनों से संबंधित शिकायतें सामने आ रही हैं, जो पहले आमतौर पर अधिक उम्र में देखी जाती थीं।

प्रख्यात रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. आशीष सिंघल ने बताया कि किसी भी जोड़ के घिसने से उत्पन्न होने वाले दर्द को ऑस्टियोआर्थराइटिस कहा जाता है। यह समस्या पहले 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में सामान्य मानी जाती थी, लेकिन अब युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आ रहा है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोटापा, व्यायाम की कमी, गलत बैठने-उठने की आदतें और खेलकूद से दूरी इसके प्रमुख कारण हैं।

डॉ. सिंघल के अनुसार घुटनों में दर्द, अकड़न, सूजन या सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में कठिनाई जैसे शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श लेने पर समस्या को बढ़ने से रोका जा सकता है। शुरुआती अवस्था में दवाओं, फिजियोथेरेपी, वजन नियंत्रण और जीवनशैली में सुधार से काफी राहत मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों, विशेषकर रोबोटिक सर्जरी के माध्यम से घुटना प्रत्यारोपण अब अधिक सटीक और सुरक्षित हो गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्जरी अंतिम विकल्प होता है और अधिकांश मामलों में नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर घुटनों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि, जैसे तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या योग करना चाहिए। साथ ही, मोटापे पर नियंत्रण और कैल्शियम व विटामिन-डी युक्त आहार का सेवन भी जोड़ों की सेहत के लिए आवश्यक है।

डॉ. सिंघल ने कहा कि जागरूकता और समय पर उपचार से युवा अवस्था में बढ़ रही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।(वार्ता)

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