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लखनऊ में बसी पूरी यूपी, एक ही मंच पर संस्कृति, स्वाद और स्वाभिमान

उत्तर प्रदेश दिवस-2026 पर राष्ट्र प्रेरणा स्थल संस्कृति, स्वाद और स्वाभिमान के रंगों में रंगा नजर आया। लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के साथ ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ (ODOC) स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। आगरा के पेठे से लेकर काशी की ठंडाई तक, यूपी के विविध स्वादों ने लोगों को भावनात्मक रूप से अपने जनपदों से जोड़ा। ओडीओसी योजना से प्रदेश की पाक विरासत को वैश्विक पहचान, रोजगार और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ से महका राष्ट्र प्रेरणा स्थल, परंपरा और प्रगति का दिखा भव्य संगम

लखनऊ । सुबह की हल्की धूप के बीच शनिवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल का पूरा परिसर ही उत्तर प्रदेश के रंग में रंगा नजर आया। ढोलक की थाप, शहनाई की मधुर स्वर लहरियां और लोकगीतों की मिठास के बीच उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का जनोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा को महसूस कराने वाला उत्सव बनकर सामने आया। परिसर में कदम रखते ही चारों ओर सजी लोकचित्रों की प्रदर्शनी और रंग बिरंगे परिधानों में सजे कलाकार ध्यान खींचते रहे। हर दृश्य उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की कहानी कह रहा था। कहीं ब्रज की होली की झलक दिखी, तो कहीं पूर्वांचल की लोकनृत्य शैली ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर चेहरे पर उत्साह और अपने प्रदेश को लेकर गर्व साफ झलक रहा था।

एक जनपद एक व्यंजन योजना के स्टॉल पर सर्वाधिक भीड़

कार्यक्रम स्थल पर सबसे अधिक भीड़ एक जनपद एक व्यंजन योजना के स्टॉल पर दिखाई दी। आगरा के पेठे की मिठास, मथुरा के पेड़ों की खुशबू, बनारस की ठंडाई और पान की पारंपरिक महक, चंदौली के काले चावल से बने व्यंजन, इन सभी ने यूपी की सांस्कृतिक पहचान को एक ही थाली में सजा दिया। लोग न केवल इन व्यंजनों का स्वाद ले रहे थे, बल्कि अपने अपने जनपद से जुड़ी स्मृतियों और पहचान को भी साझा कर रहे थे।

प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को बनाए रखा जीवंत

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को जीवंत बनाए रखा। कठपुतली नृत्य में लोककथाएं जैसे सजीव हो उठीं। रामायण के पात्रों के स्वांग ने श्रद्धा और मनोरंजन को एक साथ जोड़ दिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज यह बताती रही कि यह उत्सव केवल देखने का नहीं, महसूस करने का अनुभव है। वहीं दूसरी ओर, विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा भी साफ नजर आई। यह परंपरा और प्रगति का ऐसा संगम था, जहां एक ओर विरासत को संजोया जा रहा था, तो दूसरी ओर भविष्य की दिशा भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी।

केवल राजधानी तक सीमित नहीं आयोजन

तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन राजधानी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के हर जिले में इसी भाव और उत्साह के साथ यूपी दिवस मनाया जा रहा है। यूपी दिवस-2026 ने यह साफ संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश केवल आंकड़ों और योजनाओं को धरातल पर उतारने वाला राज्य ही नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और सामूहिक गर्व से जुड़ा हुआ जनप्रदेश है, जहां उत्सव भी नीति बन जाता है और परंपरा भी विकास का हिस्सा बनकर आगे बढ़ती है।

आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा और काशी की मलइयो अब वैश्विक पहचान की ओर

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश में शुरू की गई एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उद्योगों, कारीगरों और निर्यात को नई दिशा दी है। ओडीओपी के सफल क्रियान्वयन से प्रदेश के लाखों कारीगरों को स्वरोजगार मिला, निर्यात बढ़ा और यूपी की पहचान वैश्विक बाजारों तक पहुंची।

अब इसी सफलता मॉडल को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की समृद्ध पाक-कला विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से “एक जनपद–एक व्यंजन” यानी ओडीओसी (वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरासत संग विकास विजन का विस्तार है, जिसमें सांस्कृतिक पहचान, पर्यटन, रोजगार और निर्यात को एक साथ साधने का प्रयास किया गया है।

क्या है ओडीओसी योजना का उद्देश्य

ओडीओसी योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद से एक विशिष्ट, ऐतिहासिक और पारंपरिक व्यंजन की पहचान की जाएगी। इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं-

. प्रदेश की पारंपरिक पाक-कला विरासत का संरक्षण व संवर्धन
. व्यंजन तैयार करने वाले स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों का पंजीकरण
. चयनित व्यंजनों का गुणवत्ता मानकीकरण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग
. राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यंजनों को पहचान दिलाना
. स्थानीय आजीविका, स्वरोजगार व एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा

ओडीओपी की तर्ज पर ओडीओसी भी जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बनेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पैकेजिंग जीआई टैग और ई-कॉमर्स से स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक मंच मिलेगा।

इस योजना के अंतर्गत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग के सहयोग से फूड पैकेजिंग, शेल्फ लाइफ बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्थानीय उद्यमियों को एफएसएसएआई सर्टिफिकेशन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। पारंपरिक फूड वेंडर्स को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जाएगा। चयनित व्यंजनों की जीआई टैगिंग कर उनकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही पर्यटन विभाग के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और महोत्सवों में ओडीओसी फूड स्टाल लगाए जाएंगे, जिससे पर्यटक एक ही स्थान पर उत्तर प्रदेश के विविध स्वादों का अनुभव कर सकें।

दुनिया तक पहुँचेगा यूपी का स्वाद

उत्तर प्रदेश का लगभग हर जनपद किसी न किसी विशिष्ट व्यंजन के लिए प्रसिद्ध है। जैसे आगरा का पंछी पेठा, मथुरा का ब्रजवासी पेड़ा, अयोध्या का रामआसरे पेड़ा, अलीगढ़ (इगलास) का चमचम, बाराबंकी की चंद्रकला, पूर्वांचल का बाटी-चोखा व लिट्टी-चोखा, लखनऊ की रेवड़ी व मलाई मक्खन, काशी की लौंगलता व मलइयो, संडीला (हरदोई) के लड्डू और कानपुर के समोसे। ऐसे सैकड़ों व्यंजन हैं, जो अपने शहर में तो लोकप्रिय हैं, लेकिन राज्य या देश से बाहर इन्हें सीमित पहचान मिली है। ओडीओसी योजना के माध्यम से यूपी के सभी 75 जनपदों के इन ऐतिहासिक व स्वादिष्ट व्यंजनों को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

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