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विकसित भारत के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है देश: बुच

मुंबई : भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच ने सोमवार को यहां कहा कि राष्ट्रीय संसाधनों के कुशल उपयोग से विकसित भारत की यात्रा में तेजी आएगी, जिससे आर्थिक समृद्धि आएगी और प्रभावी रूप से यह सुनिश्चित करके सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिलेगा कि प्रत्येक नागरिक विकास प्रक्रिया में भाग ले।

श्रीमती बुच ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित वित्त पोषण 3.0 शिखर सम्मेलन में नियामक परिदृश्य: विकसित भारत के लिए क्या आवश्यक है विषय पर अपने विचार रखते हुये कहा कि मौद्रिक क्षमता और अपेक्षित प्रौद्योगिकी के साथ, देश विकास और आर्थिक समृद्धि के साथ ही विकसित भारत के पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह वास्तविक समय के दो महत्वपूर्ण आंकड़ों से स्पष्ट है, अर्थात् करों में वृद्धि-जीएसटी, अग्रिम कर आदि और बढ़ती ऊर्जा खपत, जो दोनों ही भारत की बढ़ती शक्ति के प्रमाण हैं।

पूंजी निर्माण पर श्रीमती बुच ने कहा कि विकास को बढ़ावा देने के लिए उद्योग को पर्याप्त पूंजी का प्रावधान करना होगा और इस प्रकार उत्पन्न धन को आम आदमी तक पहुँचाना चाहिए। समावेशन एजेंडा सेबी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है और सेवा लागत को कम करके 250 रुपये की व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) की शुरूआत वित्तीय उत्पादों को आम आदमी तक पहुँचाने की दिशा में एक शानदार उदाहरण है।

उन्होंने बाजार को आगे बढ़ाने में प्रौद्योगिकी अपनाने के माध्यम से पैमाने के निर्माण के महत्व को रेखांकित करते हुये कहा कि बाजारों को आगे बढ़ाने का दूसरा क्षेत्र जटिलता है जिसके लिए परिसंपत्ति वर्गों को बढ़ाने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है ताकि सही व्यक्ति के लिए सही उत्पाद हो। सेबी उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए उद्योग के साथ सह-निर्माण और परामर्श में नए उत्पादों के विकास की सुविधा प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि उद्योग मानक फोरम, जिसमें उद्योग की भागीदारी है, प्रभावी रहा है और एकल फाइलिंग जैसे कई नए कदम जल्द ही वास्तविकता बन जाएंगे।उन्होंने व्यापक निवेशक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के दस्तावेज एवं आवेदन के 15 से 16 स्थानीय भाषाओं में बनाये जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुये कहा कि विकसित भारत के मार्ग के लिए भाषा की बाधा को हटाकर निवेशकों का विश्वास बनाने की विविधता की आवश्यकता है। (वार्ता)

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