
सिवनी । मध्य प्रदेश के पेंच नेशनल पार्क सिवनी की ‘कॉलर वाली बाघिन’ ने शनिवार शाम अंतिम सांस ली। उसकी उम्र तक़रीबन सत्रह साल बताई गई है। 17 साल की यह बाघिन पिछले तीन-चार दिनों से बीमार चल रही थी।मध्यप्रदेश को टाइगर्स स्टेट का दर्जा दिलाने में 30 शावकों को जन्म देने वाली कॉलर वाली बाघिन की भूमिका अहम थी। कॉलर वाली बाघिन का जन्म सितम्बर 2005 में हुआ था। इस बाघिन ने सबसे पहले 2006 में तीन शावकों को जन्म दिया था, लेकिन बारिश के चलते तीनों शावकों की मौत हो गई थी। इसके बाद उसी साल बाघिन ने फिर चार शावकों को जन्म दिया था।
अगले क्रम में भी पांच शावकों को जन्म दिया था। बाघिन ने इसके बाद लगातार दो बार तीन-तीन शावकों को जन्म दिया और अप्रैल 2015 में चार और नन्हे शावकों को जन्म देकर पेंच की सर्वाधिक 22 शावकों को जन्म देने वाली बाघिन बन चुकी थी। 2017 में बाघिन ने चार और शावकों को जन्म दिया था। इसी साल जनवरी में चार शावकों को जन्म दिया था।
नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर जताया दुख
कॉलर वाली बाघिन की मौत पर मध्यप्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दुख जताया है। नरोत्तम मिश्रा ने ट्वीट कर कहा- ‘सुपर मॉम’ को आखिरी सलाम। 29 शावकों को जन्म देने वाली पेंच टाइगर रिजर्व की ‘कॉलर वाली बाघिन’ की मृत्यु की खबर दुखद है। मध्यप्रदेश को मिली टाइगर स्टेट की गौरवशाली पहचान पर कोई भी चर्चा इस सुपर मॉम के महत्वपूर्ण योगदान के बिना पूरी नहीं हो सकेगी।
एक साथ पांच शावकों को जन्म देने का रिकॉर्ड भी कॉलर वाली बाघिन के नाम ही दर्ज है।
सबसे ज्यादा बच्चों को जन्म देने का रिकॉर्ड पहले रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 23 शावकों को जन्म देने वाली मछली बाघिन के नाम बताया जाता था। मार्च 2008 में गले में कॉलर लगा होने के कारण इस बाघिन का नाम कॉलरवाली बाघिन पड़ा। पेंच टाइगर रिजर्व में कॉलर वाली बाघिन को 11 मार्च 2008 को बेहोश कर देहरादून के विशेषज्ञों ने रेडियो कॉलर पहनाया उसकी मां को टी-7 बाघिन (बड़ी मादा) और पिता को चार्जर के नाम से जाना जाता था।



