बरेका चेतना प्रशिक्षण केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न, शिक्षकों को मिले प्रमाण पत्र
बरेका महिला कल्याण संगठन द्वारा संचालित चेतना प्रशिक्षण केंद्र में चाइल्डहुड टेस्टिंग, असेसमेंट एवं प्रबंधन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। प्रशिक्षण उपरांत सभी शिक्षकों को “नई सुबह” संस्था की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर शिक्षकों व कर्मचारियों को यूनिफॉर्म तथा बच्चों को मिष्ठान का वितरण किया गया।
वाराणसी : बरेका महिला कल्याण संगठन द्वारा संचालित चेतना प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन मंगलवार को किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 16 से 22 जनवरी 2026 तक चाइल्डहुड टेस्टिंग, असेसमेंट एवं प्रबंधन विषय पर आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को बाल विकास से जुड़ी आधुनिक तकनीकों एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पूर्ण होने के उपरांत 27 जनवरी 2026 को आयोजित प्रमाण पत्र वितरण समारोह में सभी प्रशिक्षित शिक्षकों को “नई सुबह” संस्था की ओर से प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम में बरेका महिला कल्याण संगठन की अध्यक्षा श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव ने सभी प्रशिक्षकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर उनके योगदान की सराहना की।

इस अवसर पर चेतना प्रशिक्षण केंद्र में कार्यरत सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संगठन की ओर से यूनिफॉर्म वितरित की गई, जबकि प्रशिक्षुओं को मिष्ठान प्रदान किया गया। इसके उपरांत अध्यक्षा श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव द्वारा बाल निकेतन विद्यालय एवं क्रेच के शिक्षक एवं कर्मचारियों को भी यूनिफॉर्म वितरित की गई तथा बच्चों को मिष्ठान देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
कार्यक्रम में महिला कल्याण संगठन की उपाध्यक्षा श्रीमती गौरी श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष श्रीमती गुरमीत कौर, सचिव श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सहित श्रीमती ऋतिका सिंह, श्रीमती शिखा जैन, श्रीमती अंजू गुप्ता, श्रीमती राखी गुप्ता, श्रीमती हंसा एवं श्रीमती अनुजा खरे सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहीं।
संगठन की अध्यक्षा श्रीमती मोनिका श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बाल विकास की गहन समझ, बच्चों के शैक्षणिक, मानसिक एवं भावनात्मक आकलन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों तथा प्रभावी प्रबंधन कौशल से अवगत कराना है, ताकि बच्चों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझकर उनके सर्वांगीण विकास में सहयोग किया जा सके।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे, जिससे शिक्षकों की क्षमता में वृद्धि होगी और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक व मानसिक सहयोग मिल सकेगा।
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