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रूरल टूरिज्म का गेटवे साबित हो सकता है “शुगर टूरिज़्म”

  • गन्ने के उत्पाद बन सकते ‘शुगर टूरिज्म”को लोकप्रिय बनाने का माध्यम
  • शुगर बेल्ट में खुल सकती है पर्यटन की संभावनाओं का नया आयाम

गिरीश पांडेय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा अगर परवान चढ़ती है तो “शुगर टूरिज़्म” रूरल एन्ड विलेज टूरिज़्म की संभावनाओं को और विस्तार देगा। खासकर गन्ना उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जिन जिलों के लिए गन्ना ओडीओपी (एक जिला, एक उत्पाद) घोषित हैं उनके लिए “शुगर टूरिज़्म” पर्यटन की संभावनाओं का नया गेटवे साबित हो सकता है।

यही नहीं, मुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों को अगले 100 दिनों के भीतर 8,000 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं और छह महीने के लिए 12,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा है।मुख्यमंत्री योगी के निर्देशानुसार विभाग अगले पांच वर्षों में गन्ने की उत्पादकता को वर्तमान 81.5 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 84 टन प्रति हेक्टेयर करने का भी प्रयास करने की तरफ प्रयासरत है।

गुड़ के लिए ओडीओपी घोषित जिलों का बढ़ेगा आकर्षण

मालूम हो कि गुड़ को सरकार ने अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना ओडीओपी यानि कि एक जिला, एक उत्पाद में शामिल किया। इस क्रम में गुड़ मुजफ्फरनगर और अयोध्या का ओडीओपी है। गन्ने के सह-उत्पादों के जरिए गन्ने की मिठास बढ़कर इससे जुड़े किसानों को खुशहाल करने के लिए सरकार मुजफ्फरनगर और लखनऊ में गुड़ महोत्सव भी आयोजित कर चुकी है।

अब जब सरकार का फोकस रूरल एंड विलेज टूरिज़म पर है तो “शुगर टूरिज़्म” इस बाबत नायाब पहल हो सकती है। कुछ दिन पहले मंत्रिपरिषद के समक्ष कृषि उत्पादन सेक्टर के सात विभागों की प्रस्तुतिकरण के दौरान मुख्यमंत्री ने इसका जिक्र भी किया था। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वह “शुगर टूरिज़्म” के लिए कार्ययोजना तैयार करें। इसके लिए गन्ने से बनने वाले सहउत्पादों को माध्यम बनाएं। गन्ना विकास संस्थान में शुगर म्यूजियम की स्थापना भी शुगर पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ा सकता है।

उल्लेखनीय है कि गन्ने से कई तरह का गुड़, सिरका, अलग-अलग फ्लेवर की चाकलेट,कैंडी, ताजा और अधिक समय तक चलने वाला जूस आदि बन सकता है। मुजफ्फरनगर के किसान तो गन्ने के रस से 100 से अधिक तरह के उत्पाद बनाते हैं। इनमें से कुछ उत्पाद ऐसे हैं जिनकी देश-विदेश में इतनी मांग है कि वह आपूर्ति नहीं कर पाते।गन्ने के सह उत्पादों के जरिए शुगर टूरिज्म की बहुत संभानाए हैं। क्योंकि ये उत्पाद सेहत के लिए भी मुफीद हैं। चीनी को छोड़ दें तो गन्ने का सबसे प्रमुख सह-उत्पाद गुड़ हैं। यह पौष्टिक तत्वों से भरपूर होता है। प्रसंस्करण के जरिए इसे और पौष्टिक एवं पसंद की साइज का बनाया जा सकता है।

मालूम हो कि गन्ना प्रदेश की प्रमुख नकदी फसल है। प्रदेश के करीब 65 लाख किसान गन्ने की खेती से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने पहले ही कार्यकाल से यह प्रयास रहा है कि गन्ने के जरिए किसानों के जीवन में मिठास घुले। इसके लिए सरकार ने 14 दिन के तय समय मे भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था की। नई चीनी मिलें लगवाईं, कुछ मिलों का क्षमता विस्तार करवाया गया। योगी-02 में भी यह सिलसिला जारी रहेगा जिसकी पूरी कार्ययोजना सरकार ने तैयार कर ली है।

किसान गन्ने की पेराई के लिए सिर्फ मिलों के भरोसे न रहें इसके लिए खांडसारी इकाइयों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया। नतीजतन अभी तक योगी सरकार के कार्यकाल में किसानों को तकरीबन 1.71 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है जो कि बसपा सरकार के कार्यकाल के दौरान किए गए भुगतान का तीन गुना है वहीं सपा सरकार द्वारा किए गए भुगतान का डेढ़ गुना ज्यादा भुगतान किया गया है। शुगर टूरिज़म भी इन्हीं प्रयासों की एक कड़ी है।

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