
सामाजिक संस्था ‘संकल्प’ द्वारा अष्टमी पर श्रद्धापूर्वक कन्या पूजन और प्रसाद वितरण
पार्वतीपुरी स्थित पंजीकृत कार्यालय में हुआ परंपरागत पूजन-अर्चन, गीता जैन और डॉ. आंचल अग्रवाल जैन ने कन्याओं के चरण पखारकर प्राप्त किया आशीर्वाद
वाराणसी। नवरात्रि की पावन अष्टमी तिथि पर सामाजिक संस्था “संकल्प”* द्वारा पारंपरिक और धार्मिक गरिमा के साथ कन्या पूजन और प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम संस्था के कार्यालय पार्वतीपुरी में हुआ, जहाँ वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा। इस अवसर पर संस्था की सक्रिय सदस्य श्रीमती गीता जैन और श्रीमती डॉ. आंचल अग्रवाल जैन ने विधि-विधानपूर्वक कन्याओं के चरण पखारकर उनका पूजन-अर्चन किया। कन्याओं को चुनरी, अक्षत, पुष्प, मिठाई और प्रसाद अर्पित कर मातृशक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

पूजन के दौरान उपस्थित भक्तों ने ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान कर दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ, बच्चे और श्रद्धालु शामिल हुए। श्रीमती गीता जैन ने इस अवसर पर कहा कि “नवरात्रि में कन्या पूजन का अत्यंत महत्व है। माँ दुर्गा के स्वरूप के रूप में कन्याओं की पूजा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में नारी सम्मान और मातृशक्ति के प्रति श्रद्धा का संदेश भी देती है। जब तक समाज में नारी का आदर होगा, तब तक शांति और समृद्धि बनी रहेगी।” वहीं, डॉ. आंचल अग्रवाल जैन ने कहा कि “कन्या पूजन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व है, और कन्याएँ शक्ति स्वरूपा हैं।”
इस पावन अवसर पर संस्था के संरक्षक अनिल कुमार जैन, डा. हर्षित जैन, अनाया जैन, राखी, सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में कन्याओं को भोजन कराकर सभी ने माँ दुर्गा से समाज में सुख-शांति, समृद्धि और मातृशक्ति के संरक्षण की कामना की। सनातन परंपरा के अनुसार नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं को आदिशक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। यह परंपरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नारी सम्मान, श्रद्धा और संस्कार के प्रति समाज में जागरूकता भी फैलाती है।
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