वाराणसी। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा में 14 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को *“प्रवासी मुख्यमंत्री”* कहे जाने के बयान पर भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का यह बयान न केवल तथ्यात्मक रूप से भ्रामक है, बल्कि भारत की एकता और अखंडता के सिद्धांतों के भी खिलाफ है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रखते हुए त्रिपाठी ने बताया** कि जब योगी आदित्यनाथ 1990 के दशक में गोरखनाथ मठ, गोरखपुर आए थे, उस समय उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश एक ही राज्य थे। उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ। ऐसे में योगी आदित्यनाथ को “प्रवासी” कहना इतिहास के साथ छेड़छाड़ है। संवैधानिक दृष्टि से उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 प्रत्येक नागरिक को देश में कहीं भी निवास और कार्य करने का अधिकार देता है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मस्थान के आधार पर उन्हें “प्रवासी” कहना संविधान की मूल भावना का अपमान है।
राष्ट्रीय एकता पर प्रभाव की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का यह बयान क्षेत्रीयता को बढ़ावा देने वाला है, जो सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का सांस्कृतिक रिश्ता ऐतिहासिक रूप से गहरा रहा है। ऐसे बयान दोनों राज्यों के संबंधों में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकते हैं।योगी आदित्यनाथ के योगदान पर प्रकाश डालते हुए** त्रिपाठी ने कहा कि योगी जी ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास और सामाजिक समरसता के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं। उनकी पहचान गोरखनाथ मठ और उत्तर प्रदेश की जनता से अटूट रूप से जुड़ी है।
अंत में शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता अखिलेश यादव से अपेक्षा करते हैं कि वे भविष्य में इस तरह के बयानों से बचें और देश की एकता एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने में सहयोग करें।

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