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देवरिया के सन्तोष मद्धेशिया बने रक्तदान की नई पहचान

देवरिया के सन्तोष मद्धेशिया वैश्य ने अपने पिता के इलाज के दौरान रक्त की कमी से हुए संघर्ष को जीवन का संकल्प बना लिया। वर्ष 2018 में स्थापित 'स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी यूथ ब्रिगेड' आज रक्तदान, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव सेवा का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। संस्था अब तक 908 यूनिट रक्तदान, 20 रक्तदान शिविर, सैकड़ों पौधारोपण और अनेक सामाजिक अभियानों के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में नई आशा और प्रेरणा का संचार कर रही है।

देवरिया। कभी-कभी जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी ही भविष्य की सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाती है। जब एक बेटा अपने पिता को अस्पताल के बिस्तर पर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते हुए देखता है, जब रक्त की एक-एक बूंद के लिए परिवार की आंखों में बेबसी और असहायता तैरती है, तब वही पीड़ा किसी व्यक्ति के भीतर मानवता की ऐसी लौ जला देती है, जो वर्षों तक समाज का मार्ग आलोकित करती रहती है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक और भावनात्मक कहानी है “स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी यूथ ब्रिगेड” के संस्थापक सन्तोष मद्धेशिया वैश्य की, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत दुःख को समाज की सबसे बड़ी सेवा में बदल दिया।

वर्ष 2014 में अपने गंभीर रूप से बीमार पिता के उपचार के लिए जब वे वाराणसी स्थित बीएचयू पहुंचे, तब उन्हें पहली बार रक्त की वास्तविक कीमत का एहसास हुआ। पिता के इलाज के दौरान 10 यूनिट से अधिक रक्त की आवश्यकता पड़ी। ऐसे समय में कई अनजान रक्तवीरों और शुभचिंतकों ने बिना किसी स्वार्थ के रक्तदान कर उनके पिता का जीवन बचाने का प्रयास किया। उस घटना ने सन्तोष मद्धेशिया के मन में मानवता के प्रति ऐसा भाव जगाया कि उन्होंने संकल्प लिया—यदि एक अजनबी मेरे पिता के लिए रक्तदान कर सकता है, तो मैं भी समाज के लिए अपना जीवन समर्पित कर सकता हूँ। यही वह क्षण था जिसने एक सामान्य युवक को समाजसेवा के असाधारण पथ पर अग्रसर कर दिया।

पिता के निधन के बाद उन्होंने कई बार रक्तदान का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं रहीं। अंततः 10 अक्टूबर 2018 को गोरखपुर में उन्हें पहली बार रक्तदान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके बाद यह यात्रा कभी नहीं रुकी। आज वे स्वयं 26 बार रक्तदान कर चुके हैं तथा मातृदिवस 2021 से एक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के नाम पर नियमित रक्तदान कर रहे हैं। उनकी इस प्रेरणा से उनकी पत्नी, पुत्र, भाई-बहन, रिश्तेदार और दर्जनों युवा भी नियमित रक्तदाता बन चुके हैं। आज इस अभियान के माध्यम से 908 यूनिट से अधिक रक्तदान हो चुका है, जिसने अनगिनत मरीजों को नया जीवन दिया है।

एक विचार जिसने बदल दी पूरे क्षेत्र की तस्वीर

जुलाई 2018 में भलुअनी बाजार की साप्ताहिक बंदी के दौरान तीन मित्रों के बीच हुई एक सामान्य चर्चा ने एक ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलन का रूप ले लिया। निर्णय लिया गया कि अवकाश के इस दिन को केवल विश्राम में नहीं, बल्कि समाजसेवा में लगाया जाएगा। 17 जुलाई 2018 को हनुमान मंदिर परिसर में लगभग 20 युवाओं ने बैठक कर सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई का संकल्प लिया और इसी के साथ जन्म हुआ “स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी यूथ ब्रिगेड” का। इसकी प्रेरक टैगलाइन बनी—”आओ कुछ अच्छा करें।”

आज यह संगठन केवल एक व्हाट्सएप समूह नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का सशक्त मंच बन चुका है। इसमें डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, पत्रकार, व्यापारी, पुलिसकर्मी, छात्र-छात्राएं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बिना किसी भेदभाव के एकजुट होकर मानव सेवा का कार्य कर रहे हैं। स्वच्छता अभियान से शुरू हुई यह यात्रा अब रक्तदान, वृक्षारोपण, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, नशामुक्ति, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, योग, यातायात सुरक्षा, गरीबों की आर्थिक सहायता, गुमशुदा लोगों की खोज, हीमोफीलिया जागरूकता और डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों को मानसिक संबल देने जैसे अनेक अभियानों तक पहुँच चुकी है।

रक्तदान को बनाया जनआंदोलन

यूथ ब्रिगेड ने केवल स्वयं रक्तदान नहीं किया, बल्कि रक्तदान को सामाजिक उत्सव का रूप दिया। “आओ नशा नहीं, रक्तदान करें” अभियान के माध्यम से युवाओं को नशे से दूर रहने और जीवन बचाने की प्रेरणा दी गई। संस्था द्वारा अब तक 20 विशाल रक्तदान शिविरों का सफल आयोजन किया जा चुका है, जिनमें सैकड़ों लोगों ने रक्तदान कर मानवता का परिचय दिया। संस्था का हर शिविर यह संदेश देता है कि किसी अनजान व्यक्ति की धड़कनों को बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं हो सकता।

सेवा के हर क्षेत्र में सक्रिय संगठन

यूथ ब्रिगेड ने वर्षों में स्वच्छता के 72 चरण पूरे किए हैं। हजारों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। विद्यालयों में जाकर शिक्षा के महत्व पर सेमिनार आयोजित किए, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई में सहयोग किया, यातायात सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने की मुहिम चलाई, बेटियों की शिक्षा और सम्मान के लिए लोगों को जागरूक किया तथा योग शिविरों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। इसके साथ ही जल एवं बिजली संरक्षण, नशामुक्ति, वस्त्र वितरण, चिकित्सा शिविर, गरीबों की आर्थिक सहायता और आपदा की घड़ी में राहत पहुँचाने जैसे कार्यों में भी संस्था निरंतर सक्रिय रही है।

दर्द में साथ खड़ी रहने वाली संस्था

जब भी किसी परिवार पर बीमारी, दुर्घटना या आर्थिक संकट का पहाड़ टूटा, यूथ ब्रिगेड सबसे पहले सहायता के लिए आगे आई। कैंसर पीड़ित बच्चों से लेकर सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों तक, गैस सिलेंडर विस्फोट में परिवार खो चुके व्यक्तियों से लेकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों तक, संस्था ने सोशल मीडिया के माध्यम से लाखों रुपये की सहायता जुटाकर अनेक परिवारों को नई उम्मीद दी। यह संस्था केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं देती, बल्कि पीड़ित परिवारों के मन में यह विश्वास भी जगाती है कि समाज आज भी संवेदनशील है।

सम्मानों से अधिक महत्वपूर्ण है मानवता की पहचान

निस्वार्थ सेवा के इस अभियान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। संस्था और इसके संस्थापक को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट, इंटरनेशनल लाइफ सेवर अवॉर्ड, राष्ट्रीय रक्तनायक अवॉर्ड, राष्ट्रीय सेवारत्न सम्मान, काशी आइकॉन अवॉर्ड, पूर्वांचल रक्तनायक अवॉर्ड, राष्ट्रीय युवा सम्मान, वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस इंग्लैंड, नेशनल सोशल इम्पैक्ट अवॉर्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये पुरस्कार केवल संस्था की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि यह प्रमाण हैं कि निस्वार्थ सेवा कभी व्यर्थ नहीं जाती।

युवाओं के लिए प्रेरणा का जीवंत उदाहरण

सीमित संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर सन्तोष मद्धेशिया वैश्य ने यह सिद्ध कर दिया कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए धन नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, संवेदनशील हृदय और सेवा की भावना की आवश्यकता होती है। आज वे हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनका सपना है कि देश के हर परिवार में कम से कम एक नियमित रक्तदाता अवश्य हो, ताकि रक्त के अभाव में किसी भी मरीज की जान न जाए।

“स्वच्छ भलुअनी स्वस्थ भलुअनी यूथ ब्रिगेड” की यह यात्रा केवल एक संस्था की कहानी नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत दस्तावेज है। यह अभियान बताता है कि यदि एक व्यक्ति सच्चे मन से समाज के लिए खड़ा हो जाए तो वह अकेला भी हजारों लोगों के जीवन में नई रोशनी ला सकता है। सन्तोष मद्धेशिया वैश्य और उनकी टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि रक्त की एक बूंद केवल शरीर में नहीं, बल्कि समाज में भी नई जिंदगी का संचार करती है। उनकी प्रेरणा आने वाली पीढ़ियों को भी सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देती रहेगी।

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