
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम बदले, जानिए नया कानून
संसद के दोनों सदनों ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि नया कानून देश में जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को और मजबूत करेगा तथा घुसपैठियों के फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाने में सहायक होगा। संशोधन के अनुसार, जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रमाण-पत्र केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही जारी किया जाएगा।
नयी दिल्ली : केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को राज्य सभा में कहा कि देश जन्म एवं मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण की सार्वभौमिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और इससे संबंधित कानून को मजबूत करने से देश में घुसपैठियों के पंजीकरण पर रोक लगेगी।श्री राय जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर सदन में चर्चा का जवाब दे रहे थे। उन्होंने सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच अपने जवाब में कहा, ‘गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत जन्म-मृत्यु पंजीकरण की सार्वभौमिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
“उन्होंने कहा कि भारत में जन्म-मृत्यु पंजीकरण की वर्तमान प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।”श्री राय के जवाब के बाद कुछ विपक्षी सदस्यों की ओर से इस विधेयक में संशोधन प्रस्तावों को सदन ने ध्वनिमत से निरस्त कर विधेयक को यथारूप परित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही विधेयक को संसद के दोनों सदनों की अनुमति मिल गयी है। लोक सभा ने इस विधेयक को पिछले सप्ताह शुक्रवार को मंजूरी दी थी।
श्री राय ने सदन में गृहमंत्री शाह की उपस्थिति की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच कहा कि इस संशोधन विधेयक में जन्म या मृत्यु को पंजीकृत कराने में दो वर्ष से अधिक की देरी होने पर रजिस्ट्रार द्वारा पंजीकरण प्रमाण-पत्र केवल केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर जारी किये जाने का प्रावधान है। पंजीकरण के बाकी प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं है।गृह राज्य मंत्री श्री राय ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की सरकार चाहती है कि भारत माता की कोख में जन्मे हर बच्चे का विधिवत पंजीकरण हो और देश को घुसपैठ के भूत से छुटकारा मिले।” उन्होंने राजनीति के लिए घुसपैठ को कथित रूप से प्रोत्साहन देने की ओर संकेत करते हुए विपक्ष की तीखी आलोचना की ।
उन्होंने कहा, “हमें कांग्रेस की नीति समझ में नहीं आती। बच्चे कहीं भी पैदा हुए हो पर देश में कुछ राज्यों की सरकारें ऐसे बच्चों को बुला कर पंजीकरण करने के लिए पलकें बिछाए इंतजार करती रहती थीं।”श्री राय ने कहा कि कांग्रेस ने देश के साथ धोखा किया था। आज देश भर में 3.5 लाख से अधिक जन्म-मृत्यु पंजीकरण केंद्र स्थापित किये गये हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में मोदी सरकार के आने से पहले जन्म के पंजीकरण की दर 86.6 प्रतिशत थी जो आज बढ कर 99.8 प्रतिशत हो गयी है। इसी तरह मृत्यु पंजीकरण की दर 72.5 प्रतिशत से बढ कर 99.4 प्रतिशत तक पहुंच गयी है।
इससे पहले चर्चा में भाग लेते हुए विपक्षी सदस्यों ने इस महत्वपूर्ण विधेयक पर गृहमंत्री की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते हुए हंगामा किया। विपक्ष दिल्ली में पेपर लीक मुद्दे पर विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से गृहमंत्री के जवाब की मांग को लेकर सदन में हंगामा कर रहे हैं। उप सभापति ने विपक्षी सदस्यों को कार्यवाही के नियमों का उल्लेख करते हुए केवल विधेयक पर अपनी बात केंद्रित करने के निर्देश दिया और कहा कि गृहमंत्री श्री शाह को लेकर किस भी बात को सदन के रिकार्ड पर दर्ज नहीं किया जाएगा।
चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के विश्वजीत सिन्हा ने सदन में अपना पहला भाषण देते हुए कहा कि कांग्रेस जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को मजबूत करने में बाधा डालती है। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, ‘ये लोग घुसपैठियों का नाम वोटर लिस्ट में डलवाना चाहते हैं जबकि भाजपा भारत के हर समाज को मूल धारा में लाने में लगी है।”शिवसेना की डॉ ज्योति नागनाथ वाघमारे ने विधेयक का समर्थन करते हुए सुझाव दिया कि कमजोर वर्गों और दूर-दराज के लोगों के लिए जन्म-मृत्यु पंजीकरण शिविर लगाये जाने चाहिए।
सदन में असम का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी ( यूपीपी (लिबरल)) के प्रमोद बोरो ने भी कहा कि पंजीकरण में देर के ठोस आधार और पंजीकरण में फर्जी तरीके अपनाने वालों के बीच भेद किया जाना चाहिए।भाजपा की दर्शना सिंह ,बीजद के संतृप्त मिश्रा, वाईएसआर कांग्रेस के एम रघुनाथ रेड्डी, अन्नाद्रमुक के एम थम्बीदुरै, भारत राष्ट्र समिति के रविचंद्र बद्दी राजू और अन्ना दुम्रक के डा धनपाल ने संशोधन विधेयक को महत्वपूर्ण बताते हुए इसका समर्थन किया।
उप सभापति श्री हरिवंश ने चर्चा में भाग लेने के लिए कांग्रेस पार्टी की फलो देवी नेताम, तृणमूल कांग्रेस की ममता ठाकुर, द्रमुक के तिरुची शिवा, सीपीआई (एम) के एए रहमान , माकपा के डॉ वी शिवदासन और भाकपा के संदोष कुमार पी को भी अवसर दिया था लेकिन इन सदस्यों की बातें विषय से बिल्कुल अलग होने के कारण वह दूसरे वक्ताओं को अवसर देते रहे और इनकी बातों को कार्यवाही में दर्ज नहीं होने दिया।जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को गत 29 जुलाई को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया। इसका उद्देश्य जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में संशोधन करना है।
वर्तमान अधिनियम के अनुसार, यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना उसके घटित होने के एक वर्ष से अधिक समय बाद रजिस्ट्रार को दी जाती है, तो उसके पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट, उप-मंडल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से किया जा सकता है।वर्तमान में व्यवस्था है कि यह आदेश तथ्यों की सत्यता का सत्यापन करने तथा निर्धारित शुल्क के भुगतान के बाद जारी किया जा सकता है।विधेयक में प्रावधान किया गया है कि यदि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में दो वर्ष से अधिक की देरी हुई है, तो ऐसे मामलों में पंजीकरण की अनुमति देने वाला आदेश केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा ही जारी किया जाएगा। (वार्ता)



