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सड़कें जस की तस, वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ी,कोई भी व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो सकी

वाराणसी। नये ट्रैफिक प्लान जी का जंजाल बना। सोमवार को सारी कवायद धराशाई हो गयी। जाम ने इस कदर शहर को जकड़ा कि क्या आम क्या खास सभी कराह उठे। हे भगवान कब मिलेगी इस समस्या से निजात। लाख कोशिशों के बाद भी व्यवस्था पटरी पर आने का नाम नहीं ले रही। अच्छे-अच्छे पुलिस अधिकारी आयें, लेकिन ट्रैफिक सुधार के मामले में फेल साबित हुए। हो भी क्यों न, शहर का आकार बढ़ा नहीं, सड़कें चौड़ी हुई नहीं, वाहनों का लोड दस साल में दो गुना से ज्यादा हो गया। जितनी आबादी उसी के सापेक्ष वाहन। या कह लेें ज्यादा ही। अब कट, डिवाइडर, वन वे, या डायवर्जन लाख करें इस जाम से निजात नहंी मिलने वाली। ये तभी संभव है जब नये काशी का निर्माण हो।

सोमवार को कचहरी, भोजूबीर, पांडेयपुर, नदेसर, अंधरापुल, तेलियाबाग, मलदहिया, रथयात्रा समेत अन्य जगहों पर जाम की समस्या से लोगों को दो चार होना पड़ा। वाहन रेंगते नहीं बल्कि चोक नजर आये और ट्रैफिक पुलिस इस प्रयास से सड़कों पर कभी इधर तो कभी उधर दौड़ लगाती दिखी कि किसी तरह जाम को समाप्त कराया जा सके। कुछ का कहना था कि सोमवार की वजह से जाम का लोड बढ़ा लेकिन सच्चाई ये है कि जाम अब इस शहर की नियती बन चुकी है।

जाम में फंसे फुलवरिया निवासी ओम प्रकाश पासवान कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार और उपर से प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र वाराणसी का जब ये हाल है तो अन्य शहरों का क्या होगा भगवान ही मालिक हैं। पहड़िया निवासी अमरिश सिंह कहते हैं कि भाई क्या एक ही टेप रोज-रोेज बजाया जाता है। अगर अब हमसब जाम के आदती हो गये हैं। जब मंत्री और आलाधिकारी इस जाम को झेल जा रहे है तो हमारी क्या औकात। वहीं चंदौली के लिए जा रहे राहगीर मनोज सिंह तो जाम का नाम सुनते ही झल्ला गये। लगे कहने जिला प्रशासन का विवेक समाप्त हो गया है उनके पास कोई प्लान या ठोस रणनीति ही नहीं जो जाम की समस्या को हल करा सके।

एक नहीं, कई हैं जिम्मेदार

वैसे शहर में लगने वाले जाम की जिम्मेदारी केवल ट्रैफिक विभाग ऊपर फोड़ दे ये नाइंसाफी होगी। इस मर्ज हर किसी का योगदान है। चाहे वीडीए हो या नगर निगम, शहर की बढ़ती आबादी हो या वाहनों का लोड। लेकिन सड़कों का दायरा नहीं बढ़ा नहीं व्यावसायिक केंद्रों को शहर के बाहर शिफ्ट किया गया। संकरी सड़कों पर हजारों की संख्या में वाहन दौड़ रहे हैं। जल्दबाजी के चक्कर में ट्रैफिक तोड़ते लोग भी जाम में अहम योगदान देते हैं वहंी डग्गामारों के अचानक से लबे सड़क खराब हो जाता भी एक बड़ी वजह है।
लग रहा तीसरी शक्ति चला रही शहर को

बनारस शहर में जाम लगने पर ट्रैफिक से जुड़े अफसर भी हर तरीका अपना कर थकहार गये है पूर्व में आये एसपी ट्रैफिक सुरेश चंद्र रावत ने व्यवस्था सुधारने के लिए वो हर तरकीब या कह लें प्रयोग अपनाया जिससे जाम से राहत मिल। इस शहर पर सबसे ज्यादा प्रयोग उन्हीं ने किया लेकिन वो भी थक हार गये। अब तो ऐसा लगता है कि इस शहर को कोई तीसरी शक्ति ही चला रही है।  यहां हर रोज  डेढ़-दो लाख लोग आते हैं। सड़कें पतली हैं और वाहनों का ओवरलोड ऊपर से ऐसे में पूरी कोशिश रहती है कि ट्रैफिक को आसान बनाया जाया और कोशिश भी होती है। आये दिन शहर में वीवीआईपी मूवमेंट होता है।

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