
वाराणसी नगर निगम की लाइसेंस वसूली में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 4.13 करोड़ रुपये से अधिक की आय
वाराणसी नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में लाइसेंस शुल्क वसूली में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब तक 4.13 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। व्यापारियों को स्मार्ट काशी ऐप के जरिए ऑनलाइन शुल्क जमा करने की सुविधा दी गई है। 31 मार्च तक भुगतान न करने पर 50 प्रतिशत जुर्माना लगेगा।
- पिछले वर्ष के 2.11 करोड़ को छोड़ा पीछे, 31 मार्च तक 5.85 करोड़ के लक्ष्य को पाने की उम्मीद; स्मार्ट काशी ऐप से ऑनलाइन जमा की सुविधा
वाराणसी। काशी की शहरी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए नगर निगम ने राजस्व वसूली अभियान को तेज कर दिया है। गृहकर और जलकर के साथ-साथ अब लाइसेंस विभाग भी पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नगर निगम ने लाइसेंस शुल्क के मद में अब तक कुल 4,13,58,687 रुपये की वसूली कर ली है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है।
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार इस राशि में 18,77,550 रुपये की धनराशि चेक के माध्यम से प्राप्त हुई है। निगम की इस तेज वसूली ने पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के कुल 2.11 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस वर्ष की वसूली लगभग दोगुने के करीब पहुंच चुकी है।
नगर निगम प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए लाइसेंस शुल्क से कुल 5.85 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान गति को देखते हुए अधिकारियों का मानना है कि 31 मार्च तक निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
नगर निगम ने लाइसेंस शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल व्यवस्था भी लागू की है। अब शहर के व्यापारी और संस्थान स्मार्ट काशी ऐप के माध्यम से घर बैठे ही ऑनलाइन लाइसेंस शुल्क जमा कर सकते हैं। इस डिजिटल पहल से जहां पारदर्शिता बढ़ी है, वहीं राजस्व वसूली की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक हो गई है।
अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। उन्होंने व्यापारियों और संस्थानों से अपील की है कि वे समय रहते स्मार्ट काशी ऐप के माध्यम से अपना लाइसेंस शुल्क जमा कर दें। निर्धारित समय सीमा के बाद लाइसेंस शुल्क जमा न करने की स्थिति में बकाया राशि पर 50 प्रतिशत तक अर्थदंड (जुर्माना) लगाया जाएगा। साथ ही आवश्यक होने पर संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
नगर निगम के अनुसार शहर में कुल 56 श्रेणियों के अंतर्गत लाइसेंस शुल्क लिया जाता है। इनमें कुछ प्रमुख मदों से हुई वसूली इस प्रकार है-
- देशी और अंग्रेजी शराब की दुकानों तथा बार लाइसेंस से सर्वाधिक लगभग 1.66 करोड़ रुपये की आय हुई।
- होटल एवं गेस्ट हाउस (थ्री स्टार, फाइव स्टार से लेकर छोटे गेस्ट हाउस और लॉज तक) से लगभग 64.14 लाख रुपये की वसूली हुई।
- नर्सिंग होम, निजी अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लीनिकों से करीब 85.45 लाख रुपये प्राप्त हुए।
- ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर (चार पहिया और दो पहिया वाहनों के अधिकृत सर्विस सेंटर) से लगभग 11.60 लाख रुपये जमा हुए।
- फाइनेंस, चिटफंड और इंश्योरेंस कंपनियों से लगभग 11.40 लाख रुपये की वसूली हुई।
- निजी कोचिंग संस्थानों से करीब 1.15 लाख रुपये प्राप्त हुए।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में व्यापारिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लाइसेंस व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इससे न केवल राजस्व में वृद्धि हो रही है, बल्कि शहर की प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली भी मजबूत हो रही है।
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