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घोड़े ,गधे, खच्चर, ऊंट के पालन और पोषण को भी सरकारी छूट और सब्सिडी मिलेगी

महिला सुरक्षा छत्र योजना 2025-26 तक जारी रखने का निर्णय.अंतरिक्ष उद्योग क्षेत्र में 49 से 100 प्रतिशत की नीति को मंजूरी.गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य 340 रुपये प्रति क्विंटल हुआ.

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत अब घोड़े ,गधे, खच्चर और ऊंट के पालन और पोषण को भी सरकारी छूट और सब्सिडी देने का फैसला किया गया है।प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में इस मिशन के अन्तर्गत कुछ नई गतिविधियों को शामिल करने का निर्णय किया गया। जिनमें पशु चारा बीज के प्रसंस्करण के बुनियादी ढाचें के विकास चारे की खेती के क्षेत्र का विस्तार और पशु बीमा कार्यक्रम को उदान बनाने का निर्णय शामिल है।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद फैसलों की जानकारी देते हुये सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि पशुधन मिशन के तहत अब घोड़ा ,गधे ,खच्चर और उूंट के पालन में लगे व्यक्तियों किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ),स्वयं सहायता समूहो (एसएचजी)संयुक्त देनदारी समूह (जेएलजी) तथा धारा आठ की कम्पनियों को 50 प्रतिशत या 50 लाख रूपये तक की पूंजीगत सहायता दी जायेगी ।एक सरकारी विज्ञप्ति के बाद केन्द्र राज्य सरकारों को घोड़े गधों और उूंटों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकारोें की मदद करेगा और वीर्य केन्द्र और केन्द्रीय प्रजनन फार्म स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रूपये की सहायता सरकार देगी ।चारे के बीज के प्रसंस्करण की बोली आदि की सुविधा के लिए भी निजी कम्पनियों स्टार्टअप इकाईयों, किसानों की सहकारी समितियों ,एसएचजी ,एफपीओ और जेएलजी को 50 प्रतिशत या 50 लाख रूपये की पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान किया जायेगा।

केन्द्र सरकार राज्यों को गैर वन क्षेत्रों ,बंजर जमीन असिंचित क्षेत्रों के साथ साथ वन क्षेत्रों में चारे की खेतों को प्रोत्साहित करने के लिए मदद करेगी।मंत्रिमंडल के फैसले के अनुसार पशु बीमा कार्यक्रम में अब किसानाें को केवल 15 प्रतिशत की दर से प्रिमियम देना पड़ेगा। इस समय यह हिस्सा 20 प्रतिशत ,30 प्रतिशत ,40 प्रतिशत और 50 प्रतिशत तक है।बाकि प्रिमियम केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा 60 और 40 प्रतिशत के अनुमान में वहन किया जायेगा। अब की संख्या तक पशुओं का बीमा किया जायेगा। इनमे भेड़ और बकरियां भी शामिल होगी । सरकार का कहना है कि इससे किसानों को अपने कीमती पशुओं का बीमा कराने में सुविधा होगी। राष्ट्रीय पशुधन मिशन 2014 -15 में शुरू किया गया था।मंत्रि मंडल की आज की बैठक में बाढ़ प्रबंध एवं सीमा क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी) को 2025-26 तक बढाने का फैसला किया गया। इस पर 2021 -22 से 2025-26 तक कुल 4100 करोड़ रूपये खर्च हाेने का अनुमान है।

महिला सुरक्षा छत्र योजना 2025-26 तक जारी रखने का निर्णय

केन्द्रीय मंत्रिमंंडल ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए छत्र योजना को जारी रखने के गृह मंत्रालय के प्रस्ताव को बुधवार को मंजूरी दी।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये फैसले के अनुसार इस योजना को 2025-26 तक जारी रखा जायेगा। इस पर 2021 -22से 2025-26 तक कुल परिव्यय 1179.72 करोड़ रूपये होने का अनुमान है। इसमे 885.49 करोड़ रूपये के गृह मंत्रालय के बजट से और 294 .43 करोड़ रूपये निर्भया कोष से दिये जायेंगे।

अंतरिक्ष उद्योग क्षेत्र में 49 से 100 प्रतिशत की नीति को मंजूरी

सरकार ने अंतरिक्ष उद्योग क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई)की नीति को और उदार बनाते हुये उपग्रह एवं उपग्रह प्रक्षेपण यान तथा उनके हिस्सेपूर्जाे और प्रणालियाें के विनिमार्ण तथा उपग्रह प्रक्षेपण स्थल के निमार्ण के विभिन्न खंडों में स्वत: स्वीकृत मार्ग से 74 से 100 प्रतिशत तक विदेशी भागीदारी को अनुमति देने का फैसला बुधवार को किया।प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये फैसले के अनुसार उपग्रहों पर स्थापित किये जाने वाले यंत्रों और प्रणालियों तथा उपयाेग कर्ताओं के काम आने वाले यंत्रों के कलपूर्जाे और प्रणालियों तथा उप प्रणालियों के विनिर्माण में स्वत: स्वीकृत मार्ग से शत प्रतिशत विदेशी हिस्सेदारी की नीति को मंजूरी दी।

इसी तरह उपग्रहों के निर्माण एवं परिचालन ,उपग्रह डाॅटा उत्पाद और जमीन स्थापित किये जाने वाली प्रणालियों और उपयोगकर्ता खंड में स्वत: स्वीकृत मार्ग से 74 प्रतिशत विदेशी हिस्सेदारी को मंजूरी दी गयी है। इन क्षेत्रों में काम करने वाली विनिर्माण कम्पनियों में 74 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी के लिए सरकार से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी। उपग्रह प्रक्षेपण यानों और उससे जुड़ी प्रणालियों या उप प्रणलियों या अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेपण और अवतरण के अड्डों के निर्माण के क्षेत्र में 49 प्रतिशत की विदेशी हिस्सेदारी के लिए सरकार से किसी अनुमति की जरुरत नहीं होगी । इससे अधिक हिस्सेदारी के लिए सरकार से पूर्व अनुमति लेना होगा।

फैसले की जानकारी देते हुये सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इससे अंतरिक्ष उद्योेग में निजी क्षेत्र को कार्य करने का प्राेत्साहन मिलेगा और इससे रोजगार के अवसर पैदा करने तथा आधुनिक प्रोद्योगिकी को अपनाने की क्षमता बढ़ेगी और यह क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता बढेगी।उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले साल नयी भारतीय अंतरिक्ष नीति घोषित की थी। जिसमे अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए निजी भागीदारी को बढाने की बात की गयी है। आज का मंत्रिमंडल का निर्णय उसी दिशा में उठाया गया कदम है।

गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य 340 रुपये प्रति क्विंटल हुआ

सरकार ने चीनी सीजन 2024-25 के लिए गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य 340 रुपये प्रति क्विंटल तय करने को मंजूरी दे दी है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने चीनी सीजन 2024-25 के लिए 10.25 फीसदी की चीनी रिकवरी दर पर गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 340 रुपये प्रति क्विंटल रखने को मंजूरी दे दी। यह गन्ने की ऐतिहासिक कीमत है जो चालू सीजन 2023-24 के लिए गन्ने की एफआरपी से लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। संशोधित एफआरपी 10 फरवरी से 01 अक्टूबर 2024 तक लागू होगी।नया एफआरपी गन्ना किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करेगा।

गौरतलब है कि भारत पहले से ही दुनिया में गन्ने की सबसे ज्यादा कीमत चुका रहा है और इसके बावजूद सरकार भारत के घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया की सबसे सस्ती चीनी सुनिश्चित कर रही है। केंद्र सरकार के इस फैसले से 5 करोड़ से अधिक गन्ना किसानों (परिवार के सदस्यों सहित) और चीनी क्षेत्र से जुड़े लाखों अन्य लोगों को फायदा होने वाला है। यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।इस मंजूरी के साथ, चीनी मिलें गन्ने की एफआरपी 10.25 प्रतिशत की रिकवरी पर 340 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करेंगी। वसूली में प्रत्येक 0.1 फीसदी की वृद्धि के साथ, किसानों को 3.32 रुपये की अतिरिक्त कीमत मिलेगी, जबकि वसूली में 0.1 प्रतिशत की कमी पर समान राशि की कटौती की जाएगी।

हालाँकि, गन्ने का न्यूनतम मूल्य 315.10 रुपये प्रति क्विंटल है जो 9.5 प्रतिशत की रिकवरी पर है। भले ही चीनी की रिकवरी कम हो, किसानों को 315.10 रुपये प्रति क्विंटल की दर से एफआरपी का आश्वासन दिया जाता है।सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य सही समय पर मिले। पिछले चीनी सीज़न 2022-23 का 99.5 प्रतिशत गन्ना बकाया और अन्य सभी चीनी सीज़न का 99.9 प्रतिशत किसानों को पहले ही भुगतान किया जा चुका है, जिससे चीनी क्षेत्र के इतिहास में सबसे कम गन्ना बकाया लंबित है। सरकार द्वारा समय पर नीतिगत हस्तक्षेप के साथ, चीनी मिलें आत्मनिर्भर हो गई हैं और चीनी सीजन 2021-22 के बाद से सरकार द्वारा उन्हें कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है। फिर भी, केंद्र सरकार ने किसानों के लिए गन्ने की ‘सुनिश्चित एफआरपी और सुनिश्चित खरीद’ सुनिश्चित की है।(वार्ता)

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