राहुल गांधी नोट कर लें, सिर्फ नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेलः मुख्यमंत्री
प्रयागराज में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी जेल गए थे। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए चौराहे और एक प्रमुख संस्था का नाम उनके नाम पर रखने की घोषणा की। उन्होंने जरायम पेशा कानून के खिलाफ संघर्ष और पासी समाज के शौर्य को भी रेखांकित किया।
प्रयागराज : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, संविधान सभा के सदस्य और पूर्व सांसद महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में केवल पंडित जवाहरलाल नेहरू ही जेल नहीं गए थे, बल्कि महाशय मसुरियादीन पासी जैसे अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने भी अपना जीवन देश के लिए समर्पित किया था। उन्होंने कहा कि मसुरियादीन पासी ने 1932 से 1944 के बीच लगभग नौ वर्ष जेल में बिताकर स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया। इसके बावजूद इतिहास के कालखंड में उनके योगदान को वह पहचान नहीं मिल सकी, जिसके वे हकदार थे।
मुख्यमंत्री गुरुवार को प्रयागराज के तेलियरगंज स्थित महाशय मसुरियादीन स्मारक इंटर कॉलेज और टीवी कॉलोनी चौराहे के पास आयोजित प्रतिमा अनावरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकास और विरासत पर विश्वास करने वाली भाजपा सरकार महापुरुषों के योगदान को विस्मृत नहीं होने देगी। जिन लोगों ने देश की स्वतंत्रता, समाज के उत्थान और दलितों-वंचितों को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष किया, उनका सम्मान किया जाना चाहिए। महापुरुषों का सम्मान किसी एक परिवार की बपौती नहीं है, बल्कि यह पूरे देश और समाज की साझा विरासत है।
नौ वर्ष जेल में रहकर स्वतंत्रता आंदोलन को दी धार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी का जन्म 2 अक्टूबर 1911 को हुआ था। यह वही दिन है, जिस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मनाई जाती है। इसके बावजूद स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी। अपने लगभग 66-67 वर्ष के जीवन में उन्होंने देश की आजादी के लिए लंबा संघर्ष किया और करीब नौ वर्ष जेल में बिताए। जेल से बाहर आने के बाद भी वे जनजागरण के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करने में जुटे रहे।
योगी ने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। ऐसे महापुरुषों की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखना समाज और सरकार, दोनों की जिम्मेदारी है। उनकी प्रतिमा की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नेहरू के साथ संसद पहुंचे, चार बार लोकसभा के लिए चुने गए
मुख्यमंत्री ने महाशय मसुरियादीन पासी के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1946 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 से 1972 के बीच वे चार बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 में एक संसदीय क्षेत्र से दो सांसद चुने जाने की व्यवस्था के तहत पंडित जवाहरलाल नेहरू और महाशय मसुरियादीन पासी एक साथ संसद पहुंचे थे। योगी ने कहा कि देश की स्वतंत्रता और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में ऐसे अनेक व्यक्तित्वों की भूमिका रही है, जिनके योगदान को उचित स्थान मिलना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल कुछ चर्चित नामों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के अनगिनत सेनानियों का संघर्ष और बलिदान शामिल है।
जरायम पेशा कानून के खिलाफ आंबेडकर के साथ लड़ी लड़ाई
मुख्यमंत्री ने अंग्रेजी शासन के दौरान बनाए गए जरायम पेशा कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों को चुनौती देने वाले कई समुदायों को अपमानित और प्रताड़ित करने के उद्देश्य से वर्ष 1871 में यह कानून बनाया गया था। इस कानून के तहत पासी समाज सहित कई जातियों को अपराधी प्रवृत्ति वाला घोषित कर उनके साथ भेदभाव किया गया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी ने संसद पहुंचने के बाद वर्ष 1952 में इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई। बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और मसुरियादीन पासी ने इस कानून को समाप्त कराने के लिए संघर्ष किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस कानून के समाप्त होने से पासी, सोनकर और अन्य वंचित एवं दलित समुदायों को सामाजिक अपमान से बाहर निकलने तथा राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि समाज के उन महापुरुषों को विशेष रूप से याद किया जाना चाहिए, जिन्होंने वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई और सामाजिक सम्मान की लड़ाई लड़ी। उनके संघर्ष और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
मसुरियादीन के नाम पर होगा चौराहा, प्रमुख संस्था को भी मिलेगी पहचान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाशय मसुरियादीन पासी की स्मृतियों को स्थायी पहचान देने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी से प्रतिमा स्थल वाले चौराहे का नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने के लिए प्रस्ताव तैयार कराने को कहा। इसके साथ ही प्रयागराज की किसी एक प्रमुख संस्था का नाम भी उनके नाम पर रखने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित संस्था में भी उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन और योगदान से प्रेरणा ले सकें।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों को सम्मान देने से समाज आगे बढ़ता है। अतीत के योगदान को स्वीकार करने से वर्तमान मजबूत होता है और मजबूत वर्तमान ही उज्ज्वल भविष्य का आधार बनता है। मुख्यमंत्री ने मसुरियादीन पासी की पुत्री कमला कुमारी और पौत्र सचिन कुमार को आश्वस्त किया कि उनके परिवार के सम्मान में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी का सम्मान करना देश के सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान करना है।
पासी समाज के शौर्य और बलिदान का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने पासी समाज के ऐतिहासिक योगदान और वीरता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समाज का इतिहास शौर्य, पराक्रम और बलिदान की गाथाओं से भरा है। उन्होंने महाराजा बिजली पासी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने 12वीं शताब्दी में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में 12 किले बनवाए थे। ये किले विदेशी आक्रांताओं से मुकाबला करने की रणनीति का हिस्सा थे।
योगी ने कहा कि उनकी सरकार लखनऊ स्थित महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार करा रही है और इसके लिए धन उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में महाराजा बिजली पासी की प्रतिमा स्थापित कराई थी।
मुख्यमंत्री ने वीर मक्का पासी और उनकी पत्नी वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि मक्का पासी के वीरगति प्राप्त करने के बाद ऊदा देवी ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला और बहादुरी से लड़ते हुए अपना बलिदान दिया। योगी ने बताया कि लखनऊ में गठित की जा रही महिला पीएसी बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर रखा जा रहा है। उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा भी स्थापित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और राष्ट्र के लिए योगदान देने वाले सभी महापुरुषों को जाति, वर्ग या राजनीतिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर सम्मान मिलना चाहिए। उनकी स्मृतियों को सुरक्षित रखना केवल अतीत का सम्मान नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों को अपने इतिहास से परिचित कराने का माध्यम भी है।
गरीबों और महापुरुषों के सम्मान के लिए समर्पित है सरकार: केशव प्रसाद मौर्य
समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने महाशय मसुरियादीन पासी को महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बताते हुए कहा कि उन्होंने चार बार लोकसभा में इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे गरीब से गरीब व्यक्ति की बात सुनते थे और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करते थे। ऐसे महान व्यक्तित्व की प्रतिमा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अनावरण किया जाना उनके योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार गरीबों के कल्याण तथा महापुरुषों को सम्मान देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के उन व्यक्तित्वों को पहचान दिलाने का प्रयास कर रही है, जिनका योगदान लंबे समय तक उपेक्षित रहा।
जरायम पेशा कानून समाप्त कराने में मसुरियादीन का अहम योगदान: सचिन कुमार
महाशय मसुरियादीन स्मारक समिति के मंत्री और उनके पौत्र सचिन कुमार ने कहा कि अंग्रेजी शासन के दौरान दलित समुदायों को जरायम पेशा घोषित कर उनका उत्पीड़न किया गया था। इस अन्यायपूर्ण कानून को समाप्त कराने के संघर्ष में महाशय मसुरियादीन पासी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने महाशय के योगदान को सम्मान देने और उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। सचिन कुमार ने उन्हें भगवान बुद्ध की प्रतिमा और पुष्पगुच्छ भेंट किए, जबकि आयोजकों की ओर से हनुमान जी की प्रतिमा भी भेंट की गई। मुख्यमंत्री ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।
समारोह में कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग रहे मौजूद
प्रतिमा अनावरण समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, प्रयागराज के महापौर उमेश चंद्र ‘गणेश केसरवानी’, फूलपुर सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, दीपक पटेल और गुरु प्रसाद मौर्य उपस्थित रहे।
इसके अलावा विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, सुरेंद्र चौधरी, भाजपा गंगापार जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान, महाशय मसुरियादीन पासी की पुत्री कमला कुमारी, पौत्र सचिन कुमार तथा अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, आयोजक और परिवार के सदस्य समारोह में शामिल हुए।
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