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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 10-11 जनवरी को गुजरात दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10–11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे। वे ओंकार मंत्र जाप, ड्रोन शो, शौर्य यात्रा, पूजा-अर्चना और जनसभा को संबोधित करेंगे। यह पर्व सोमनाथ मंदिर की रक्षा में बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि, 1026 के आक्रमण की 1000वीं वर्षगांठ और 1951 के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने की स्मृति का प्रतीक है।

  • शौर्य यात्रा, ओंकार जाप, ड्रोन शो और जनसभा के जरिए वीरता, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का संदेश

सोमनाथ (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लेंगे, जो भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जा रहा है। यह पर्व 8 जनवरी से प्रारंभ होकर 11 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री 10 जनवरी को शाम लगभग 8 बजे सोमनाथ मंदिर परिसर में ओंकार मंत्र का जाप करेंगे। इसके पश्चात वे मंदिर परिसर में आयोजित विशेष ड्रोन शो का अवलोकन करेंगे, जिसमें सोमनाथ की गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पुनर्निर्माण की गाथा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।

11 जनवरी को प्रधानमंत्री का कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक रहेगा। सुबह लगभग 9:45 बजे वे शौर्य यात्रा में भाग लेंगे। यह औपचारिक शोभा यात्रा उन अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए निकाली जाएगी, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकलेगा, जो वीरता, बलिदान और शौर्य का प्रतीक होगा।

इसके बाद प्रधानमंत्री लगभग 10:15 बजे सोमनाथ मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना करेंगे। लगभग 11 बजे वे सोमनाथ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेंगे और विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन वर्ष 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए आक्रमण की 1,000वीं वर्षगांठ की स्मृति में किया जा रहा है। इतिहास गवाह है कि सदियों में कई बार आक्रमण और विनाश के प्रयासों के बावजूद सोमनाथ मंदिर आस्था, साहस और पुनर्जागरण का सशक्त प्रतीक बनकर खड़ा रहा। यह मंदिर भारत की सभ्यतागत निरंतरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक माना जाता है।

स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने लिया था। इस ऐतिहासिक पुनरुद्धार का एक महत्वपूर्ण क्षण वर्ष 1951 में आया, जब पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में श्रद्धालुओं के लिए औपचारिक रूप से खोला गया। वर्ष 2026 में इस पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के कारण इस स्वाभिमान पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है।

इस आयोजन में देशभर से सैकड़ों संत-महात्मा भाग ले रहे हैं। विशेष आध्यात्मिक आयोजन के अंतर्गत मंदिर परिसर में 72 घंटे तक निरंतर ‘ॐ’ का जाप किया जाएगा, जो शांति, चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक होगा।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में प्रधानमंत्री की सहभागिता भारत की चिरस्थायी सभ्यतागत शक्ति को रेखांकित करती है। यह कार्यक्रम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण, सम्मान और भावी पीढ़ियों तक इसके संचार के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता का सशक्त संदेश देता है।

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