Varanasi

पर्यावरण और जल संरक्षण में देववृक्षों का महत्व सर्वाधिक : पवन कुमार चौहान

गंगा समग्र के गंगा भाग, काशी(वाराणसी,चंदौली,गाजीपुर सोनभद्र) की बैठक में राष्ट्रीय आयाम प्रमुख वृक्षारोपण पवन कुमार चौहान जी ने कार्यकर्ताओं को गंगा की निर्मलता और अविरलता के लिए वृक्षारोपण के सनातन महत्व को बताया

  • राष्ट्रीय आयाम प्रमुख के साथ कार्यकर्ताओं ने रमना स्थित एसटीपी प्लांट के परिसर में बृहद वृक्षारोपण किया

वाराणसी।माँ गंगा उनकी सहायक नदियों की अविरलता और निर्मलता के लिए सामाजिक जागृति और जन सहभागिता के साथ-साथ मां गंगा और उनकी सहायक नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों और विभिन्न कुंण्डों और तालाबों के आसपास देव वृक्षों (पीपल,बरगद,पाकड़,गूलर,नीम मौलसरी,कपूर इत्यादि) का लगाया जाना आवश्यक है। देव वृक्षों की विशेषता बताते हुए उन्होंने भारत की सनातन परंपरा के अनुसार पंचवटी,नवग्रह वृक्षों और नक्षत्र वृक्षों की विशिष्टियों के संबंध में कार्यकर्ताओं को बताया। देव वृक्षों का साक्ष्य और प्रमाण सहित पूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण करते हुए अधिक से अधिक संख्या में इनके रोपण के लिए समाज के लोगों से विशेष आग्रह किए जाने हेतु कार्यकर्ताओं का आवाहन किया। देव वृक्ष न केवल पूजित है,अपितु जलवृष्टि, भूगर्भ जल संचयन में सहायक होते हैं, पारिस्थितिकीय संतुलन सहित पर्यावरण को शुद्ध बनाए रखने में भी इन्हीं की सर्वाधिक भूमिका होती है।

आज गंगा समग्र, गंगा भाग के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय वृक्षारोपण आयाम प्रमुख पवन कुमार चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में बतायीं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में गंगा समग्र काशी प्रांत के संयोजक अजय मिश्रा ने पर्यावरण और वृक्षारोपण के महत्व को बताते हुए कहा कि मां गंगा और उनकी सहायक नदियों की निर्मलता और अविरलता के लिए सामाजिक जागरूकता और समर्पण भाव से सतत कार्य करना आवश्यक है। जब तक समाज में जन-जन के भीतर यह भावना पैदा नहीं होती कि माँ गंगा हमारे जीवन की रेखा हैं, तब तक मांँ गंगा सहित उनकी सहायक नदियों को प्रदूषण से पूर्ण मुक्ति प्राप्त नहीं हो पाएगी।पर्यावरण और जल संरक्षण में देववृक्षों का महत्व सर्वाधिक : पवन कुमार चौहान

इस अवसर पर पर गंगा भाग के संयोजक दिवाकर द्विवेदी ने गंगा समग्र के 16 आयामों और और गंगा समग्र द्वारा बनाए जाने वाले छह पर्वों के महत्व पर विस्तार से विचार व्यक्त किया और एक-एक आयाम के महत्व को समझाया। जल संरक्षण के दृष्टिगत आयामों के आपसी सामंजस्य की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने ने उपस्थित कार्यकर्ताओं का आवाहन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि गंगा समग्र के जिला स्तर के और खंड स्तर के सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी गांव-गांव जाकर मोहल्ले-मोहल्ले जाकर लोगों के अंदर इस बात की जागृति पैदा करें और उन्हें बतायें कि मां गंगा को प्रदूषित करने वाले कौन- कौन से कारक हैं, हमें किस प्रकार इनसे मांँ गंगा को बचाना है।

नदी आयाम के प्रांतीय प्रमुख कपीन्द्र तिवारी ने कहा कि गंगा की सहायक नदियों को भी प्रदूषण मुक्त करने की उतनी ही आवश्यकता है,जितनी मां गंगा को प्रदूषण मुक्त करने की,क्योंकि जब तक सहायक नदियांँ प्रदूषण मुक्त नहीं होंगी,तब तक मांँ गंगा भी प्रदूषण मुक्त नहीं होंगी। इसके साथ ही जल संरक्षण की दृष्टि से तालाबों का संरक्षण और पुनरुद्धार जैविक खेती आदि पर भी अब एकजुट होकर सघन रूप से कार्य करने की आवश्यकता है। आरंभ में गंगा समग्र काशी जिले के संयोजक चंद्र प्रकाश दुबे ने अतिथियों और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया।मां गंगा के चित्र पर माल्यार्पण पुष्पांजलि सहित बैठक मंत्र के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
बैठक और कार्यक्रम की अध्यक्षता काशी हिंदू विश्वविद्यालय कृषि विज्ञान संस्थान के पादप कार्यिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पद्मनाभ द्विवेदी द्वारा किया गया। बैठक के बाद काशी जिले द्वारा परिसर में ही बृहद रूप से देव वृक्षों का रोपण किया गया और 51 वृक्ष लगाए गए।

बैठक में प्रमुख रुप से विभाग संगठन मंत्री शुभम  वाराणसी महानगर दक्षिण के संयोजक श्रवण कुमार मिश्रा, चंदौली जिले के सहसंयोजक जयशंकर तिवारी,चुनार जिले के संयोजक उमेश सिंह, काशी जिले के आयाम प्रमुख गण अंबरीश उपाध्याय, भानु भूषण पांडे, अनिल कुमार दुबे, अशोक तिवारी, जयप्रकाश दुबे,शशिकांत दुबे,अभिषेक पांडे,राकेश पटेल ,काशी दक्षिण से अभिषेक श्रीवास्तव, श्लोक सिंह,आशुतोष चतुर्वेदी, अभिषेक सिंह चंदौली से आशीष त्रिपाठी, अभिषेक चौबे एसटीपी रमन से केके वर्मा, उमाकांत, रितेश तिवारी आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन गंगा समग्र काशी जिले के सहसंयोजक धर्मेंद्र पांडे द्वारा किया गया।

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