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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर गरमाई संसद

नई दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में तीखी बहस देखने को मिली। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इसे विपक्ष द्वारा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बताया और कहा कि बिरला ने सदन में सभी सदस्यों को बराबर अवसर दिया है। वहीं कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सदन में विपक्ष के साथ समान व्यवहार नहीं होता और संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए यह प्रस्ताव लाया गया है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला।

– राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए लाया गया बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: रिजिजू

नयी दिल्ली : संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव को राजनीतिक रोटी सेंकने का प्रयास बताते हुए कहा कि सदन के अंदर के क्रियाकलापों के लिए हर सदस्य श्री बिरला को धन्यवाद देता रहेगा क्योंकि उन्होंने सभी को समान मौका दिया है।

श्री रिजिजू ने विपक्ष की ओर से सदन में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के विरोध में अपनी बात रखते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री सिर्फ सत्तारूढ दल का नहीं होता है। कांग्रेस के साठ साल के इतिहास को देखना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री पर टिप्पणी करने से पहले अपना इतिहास देखना चाहिए। सदन के संचालन का पूरा अधिकार अध्यक्ष का है। अध्यक्ष के निर्णय को कहीं भी चुनौती नहीं दी जा सकती है। अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होता है। अध्यक्ष के निर्णय को किसी ने आज तक चुनौती नहीं दी है लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा था कि सदन में बोलने के लिए उन्हें किसी से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें पता होना चाहिए कि सदन में अध्यक्ष की अनुमति के बिना नहीं बोल सकते हैं। उन्होंने कहा कि चाहे वह प्रधानमंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या कोई अन्य सांसद, लेकिन अध्यक्ष की अनुमति के बिना सदन में कोई नहीं बोल सकता है।

उन्होंने कहा कि अध्यक्ष किसी को कभी भी बोलने की अनुमति दे सकता है यह उनका अधिकार है। अध्यक्ष के पास कुछ शक्तियां ऐसी है जो कार्यसूची में शामिल नहीं है। संसदीय परंपरा में कई चीजें पहली बार होती है तब भी अध्यक्ष को निर्णय लेना होता है। अध्यक्ष की भूमिका भी विपक्ष तय करना चाहते हैं, यह कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा कि जो नियम में शामिल नहीं है तो उस पर निर्णय करने की शक्ति भी अध्यक्ष के पास होता है।संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने कभी कागज फाड़कर आसन की तरफ नहीं फेंका है। 1951 के बाद भाजपा के किसी सदस्य ने आसन की तरफ कागज फाड़कर नहीं फेंका है लेकिन विपक्ष आज सारी सीमाओं का लांघने का काम कर रहा है। चालीस साल बाद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। कांग्रेस के सदस्यों ने अपने पुराने नेताओं को पढा नहीं है वरना उनको पता चलता।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि इस सदन की महान परंपरा रही है कि अध्यक्ष की सदाशयता पर उंगली नहीं उठायी जा सकती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए कि अविश्वास प्रस्ताव पर उन्होंने अध्यक्ष के लिए किस प्रकार का सम्मान व्यक्त किया था।उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ सदस्य भी यह प्रस्ताव लाये जाने से दुखी है। विपक्ष के कम से कम पचास सांसद उनसे मिले हैं जो इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है, वह मजबूरी में इसमें शामिल हुये हैं। अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर कितना गलत काम किया है। इनका नोटिस ही गलत था लेकिन फिर भी अध्यक्ष ने उनको बुलाकर नोटिस को ठीक करवाया। अध्यक्ष की महानता इस प्रकार की है।

श्री रिजिजू ने कहा, ‘ मैं बहुत भारी मन से कह रहा हूं कि अध्यक्ष के बारे में जो बात कर रहे हैं बहुत सोच समझकर बोलना चाहिए।’ देश के आजाद होने के बाद एक अध्यक्ष का नाम बताना चाहिए जो सरकार के खिलाफ बयान देते हैं और काम करते हैं। अध्यक्ष को सरकार का अध्यक्ष बताना गलत है। विपक्ष का कहना अध्यक्ष सरकारी भाषा बोलते हैं इस प्रकार का आरोप लगाना गलत है।उन्होंने कहा कि श्री बिरला के समय जो संसदीय कार्य प्रणाली में जो सुधार हुये हैं उसे कोई नकार नहीं सकता है। आज तक इतिहास में सबसे अधिक नियम 377 के तहत सदस्यों को अपने मुद्दे उठाने का मौका दिया गया है। उनकी अध्यक्षता में संसद को डिजिटल बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि संसद में भाषण के बाद सदस्यों को तुरंत वीडियो उपलब्ध करा दिया जाता है। सदस्यों के लिए ओम बिरला ने जो किया है वह हमेशा धन्यवाद देते रहेंगे। ओम बिरला सभी को मौका देते हैं। पुराने और अब के रिकार्ड को देख सकते हैं अंतर साफ दिख जाता है। ओम बिरला ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूती से खड़ा किया है। 64 देशों का फ्रेंडशिप समूह बनाया है जिसके लिए उनको धन्यवाद देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इंसान को किसी के प्रति इतना घृणा नहीं होना चाहिए कि अच्छे काम के लिए भी धन्यवाद नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि श्री बिरला के समय में संसद की उत्पादकता रिकार्ड रही है।

श्री रिजिजू ने कहा कि हमारी संख्या अधिक है फिर भी सवाल पूछने के लिए विपक्ष को अधिक मौका देते हैं फिर भी पक्षपात का आरोप लगाया जाता है। विपक्ष को लगातार सदन में मौका देने का काम किया और उन्हीं के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आये हैं।श्री रिजिजू ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के पद को आज तक बचाकर रखा गया था लेकिन अब पता चला कि लोकतंत्र पर हमला करना है तो लोकसभा अध्यक्ष पर हमला करो। श्री गांधी जब कोई विषय उठा रहे थे तब अध्यक्ष ने रूलिंग दे दी फिर भी उसे चुनौती दी गयी। विपक्ष का आरोप है कि विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता है लेकिन सत्र को दौरान वह विदेश चले जाते हैं।

विपक्ष के नेता अपना भाषण देने के बाद सदन से बाहर चले जाते हैं जबकि उनको दूसरों की बात भी सुननी चाहिए। उन्होंने कहा विपक्ष का नेता कितना गंभीर है इससे पता चलता है कि गंभीर चर्चा चल रही है और वह दूसरे नेता को आंख मारते हैं। विपक्ष के नेता जिस प्रकार हल्कापन दिखाते हैं वही अन्य सदस्यों में दिखता है।

संसद की मर्यादा और गरिमा को बनाये रखने के लिए बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव: विपक्ष

लोक सभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को कहा कि सदन में सदस्यों के साथ समान व्यवहार न किये जाने की वजह से और संसद की मर्यादा एवं गरिमा को बचाने की मंशा से विपक्ष की ओर से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है।श्री गोगोई ने कहा कि विपक्ष की ओर से सदन में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला का व्यक्तिगत रिश्ता सभी के साथ अच्छा है, लेकिन सदन में सभी सदस्यों के साथ समान व्यवहार नहीं होता।

उन्होंने कहा कि सदन के संचालन में अध्यक्ष का कर्तव्य बहुत महत्वपूर्ण है, अध्यक्ष सदन के संरक्षक होते हैं, उन्हें सरकार की आवाज नहीं बनना चाहिए।उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपनी बात नहीं रखने दी गयी। सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें बीसों बार टोका गया। रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री ने भी उन्हें बार-बार टोका।श्री गोगोई ने कहा कि श्री गांधी बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे सदन में उठाना चाहते थे। वह बता रहे थे कि चीन की सेना जब भारतीय सीमा की ओर चली आ रही थी, तो तत्कालीन सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने रक्षा मंत्री से कार्रवाई के लिए आदेश मांगा, लेकिन बार-बार फोन कॉल करने के कई घंटे के बाद उन्हें प्रधानमंत्री की तरफ से कहलवाया गया कि ‘जो उचित समझो करो।

‘इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति करते हुए कहा कि अविश्वास प्रस्ताव में लाये गये विषयों से हटकर चर्चा की जा रही है। इसके बाद श्री गोगोई ने कहा कि जब संसद में टोका-टाकी की गणना की जायेगी, तो स्पष्ट रूप से सामने आयेगा कि श्री रिजिजू सबसे अधिक टाेका-टाकी करने वाले संसदीय कार्य मंत्री रहे हैं।इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि श्री रिजिजू की ओर से टोका-टाकी इसलिए की जा रही है, क्योंकि इतना गैर जिम्मेदार विपक्ष कभी नहीं रहा। इस पर श्री गोगोई ने कहा कि अच्छा ही हुआ, श्री शाह ने यह कहकर उनके वक्तव्य का दायरा बढ़ा दिया है।कांग्रेस के उप नेता ने कहा कि अमेरिका में न्याय विभाग की ओर से जारी दस्तावेजों में देश के एक व्यवसायी का नाम आया है। एक मंत्री का भी नाम आया है।

इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा क अविश्वास प्रस्ताव में लगाये गये आरोपों पर ही श्री गोगोई बोल सकते हैं, तब श्री गोगोई ने कहा कि वह तो बता रहे हैं कि श्री गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने वक्तव्य में क्या-क्या कहना चाहते थे, जिसे उन्हें कहने नहीं दिया गया।श्री गोगोई ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ऐसे व्यापार समझौते पर सहमति दे दी है, जिससे देश का व्यवसाय और कृषि क्षेत्र चौपट हो जायेगा। उन्होंने पूछा कि ऐसा क्या दबाव है कि प्रधानमंत्री देश के हितों के खिलाफ जाकर ऐसे घातक समझौते पर रजामंदी दे रहे हैं। उन्होंने कहा, ” क्या इसका कारण अमेरिकी में जांच , या इप्सटीन फाइल में और भी नाम हैं। “उन्होंने कहा, ” देश जानना चाहता है जनरल नरवणे ने जो बातें अपनी किताब में कही हैं, क्या वे खोखली हैं, या जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं, यह बातें देश की जनता के सामने आनी चाहिए।

“इससे पहले कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने श्री बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसका 50 से अधिक सदस्यों ने खड़े होकर समर्थन किया।इस पर आल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि श्री बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाये जाने के बाद उनके द्वारा नियुक्त पैनल के सदस्य पीठासीन नहीं हो सकते। इस समय लोक सभा का कोई उपाध्यक्ष नहीं है, अत: सदन की राय लेने के बाद कोई सदस्य इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पीठासीन हो सकता है। कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी इसी तरह की राय जाहिर की, लेकिन श्री पाल ने उनके ‘व्यवस्था के प्रश्न’ को अस्वीकार कर दिया।(वार्ता)

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