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ऑपरेशन सिंदूर के चौथे दिन ही झुक गया पाकिस्तान, युद्ध रोकने को मजबूर हुआ: सेना प्रमुख

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नयी दिल्ली में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीनों सेनाओं की गतिविधियों और शीर्ष सैन्य निर्देशों की जानकारी मिलते ही पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि युद्ध रोकना ही उसके हित में है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना उस समय पूर्ण जमीनी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी। सटीक हमलों, पारंपरिक हथियारों के प्रभावी उपयोग और रणनीतिक तैनाती से पाकिस्तान पर निर्णायक दबाव बना। सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

नयी दिल्ली :  जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब चौथे दिन तीनों सेनाओं की संयुक्त गतिविधियों और शीर्ष स्तर के निर्देशों की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंची, तो उसे यह स्पष्ट हो गया कि अब युद्ध को आगे बढ़ाने की उसकी स्थिति नहीं है। सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उस समय भारतीय सेना पूर्ण जमीनी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी और पाकिस्तान को इसकी भनक उपग्रह निगरानी के माध्यम से मिल चुकी थी।

मंगलवार को 78वें सेना दिवस से पहले नयी दिल्ली में आयोजित वार्षिक संवाददाता सम्मेलन में सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दो निर्णायक मोड़ आए, जिन्होंने पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर दी।

पहला निर्णायक मोड़: 7 मई की रात 22 मिनट का सटीक हमला

जनरल द्विवेदी ने बताया कि पहला निर्णायक मोड़ 7 मई की रात आया, जब भारतीय सेना ने मात्र 22 मिनट में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक और प्रभावी हमला किया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से पाकिस्तान की निर्णय लेने की पूरी प्रणाली हिल गई, वहां अफरा-तफरी मच गई और उन्हें यह समझने में समय लग गया कि हमला किस स्तर का और किस उद्देश्य से किया गया है।

दूसरा निर्णायक मोड़: 10 मई की सुबह शीर्ष सैन्य निर्देश

सेना प्रमुख के अनुसार दूसरा और निर्णायक मोड़ 10 मई की सुबह आया, जब शीर्ष स्तर से थल सेना, नौसेना और वायु सेना को कुछ विशेष रणनीतिक निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा, “यदि युद्ध आगे बढ़ता तो क्या होगा-इसका स्पष्ट संदेश दिया गया। जिन्हें समझना था, उन्होंने समझ लिया।”

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान को उपग्रहों के जरिए यह जानकारी मिल रही थी कि कौन-सा युद्धपोत, कौन-सी मुख्य सैन्य इकाई, कौन-सा विमान और कौन-सी रणनीतिक तैनाती किस दिशा में बढ़ रही है। इन सभी संकेतों को जोड़कर पाकिस्तान इस निष्कर्ष पर पहुंच गया कि अब संघर्ष को रोकना ही उसके हित में है।

पारंपरिक हथियारों से करारा जवाब, 100 से अधिक पाक सैनिक मारे गए

जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पारंपरिक हथियारों से भी प्रभावी जवाब दिया। नियंत्रण रेखा पर भारत के नागरिक इलाकों में की गई फायरिंग के बाद की गई जवाबी कार्रवाई में करीब 100 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, सभी नियंत्रण रेखा के आसपास। उन्होंने कहा कि यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि भारत ने पारंपरिक युद्ध के दायरे को विस्तारित करते हुए मजबूत सैन्य दबाव बनाया।

परमाणु हमले की धमकियों पर सेना प्रमुख का स्पष्टीकरण

पाकिस्तान की ओर से बार-बार परमाणु हमले की बयानबाजी पर सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर की बातचीत में इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान या तो पाकिस्तानी नेताओं के थे या वहां के कुछ व्यक्तियों के, लेकिन पाकिस्तानी सेना की ओर से औपचारिक रूप से ऐसा कुछ नहीं कहा गया।

संघर्ष विराम उल्लंघन और आतंकी गतिविधियां

सेना प्रमुख ने बताया कि पिछले वर्ष पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन की 139 घटनाएं हुईं, जिनमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दर्ज की गईं। इसके बावजूद भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क रही और आतंकवादियों पर लगातार दबाव बनाए रखा।

सीमा पार अब भी सक्रिय आतंकी शिविर

जनरल द्विवेदी ने कहा कि नियंत्रण रेखा के पार अब भी 8 से 10 आतंकी शिविर सक्रिय हैं, जिनमें 100 से 150 आतंकवादी मौजूद हैं।
इनमें से छह शिविर नियंत्रण रेखा के पार और दो अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार स्थित हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में भी लगभग 140 आतंकवादी सक्रिय हैं, हालांकि नई भर्ती काफी समय से नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और किसी भी आतंकी हरकत का तुरंत और कठोर जवाब दिया जाएगा।

ड्रोन और रॉकेट-मिसाइल फोर्स की जरूरत

सेना प्रमुख ने बदलते युद्ध स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के युद्धों में ड्रोन, रॉकेट और मिसाइलों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पाकिस्तान और चीन ने रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाई है, उसी तरह भारत को भी ऐसी फोर्स खड़ी करनी होगी।

उन्होंने बताया कि भारत ने पिनाका प्रणाली का 120 किलोमीटर रेंज तक सफल परीक्षण किया है और भविष्य में इसे 300 से 450 किलोमीटर तक विस्तारित करने की योजना है। उन्होंने प्रलय और ब्रह्मोस मिसाइलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन ड्रोन क्षमता को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने की जरूरत है।

सेना प्रमुख के बयान से स्पष्ट है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य तैयारियों, संयुक्त कमान और रणनीतिक संकल्प का उदाहरण है। पाकिस्तान को यह संदेश साफ मिल गया कि भारत किसी भी स्तर पर अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।(वार्ता)

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