Opinion

पीएम मोदी के मौन से भी डरता है विपक्ष…

  • सुनील दास

देश का विपक्ष पूरे चुनाव में यही प्रचार करता रहा कि पीएम मोदी विपक्ष से डरते हैं, इसलिए उसकी आवाज को हर तरह दबाने का प्रयास करते हैं। ईडी,आईटी का उपयोग कर उनके खिलाफ मामला बनाया जाता है, उनको गिरफ्तार कराया जाता है। उनको जेल भेज दिया जाता है, उनकी जमानत नहीं होने दी जाती है। पीएम ने कोई अच्छा काम भी किया,कोई अच्छी बात भी कही तो विपक्ष ने यही साबित करने का प्रयास किया मोदी उनसे डरते है इसलिए ऐसा कर रहे हैं इसलिए ऐसा कह रहे हैं।इसकी असल वजह यह है कि पीएम मोदी भारत ही नहीं पूरे विश्व में एक मजबूत व ईमानदार नेता के रूप में जाने जाते हैं और उनकी यह छवि उनके भारत व विश्र में किए गए काम व बयान के आधार पर बनी है।इस मजबूत छबि के कारण ही विपक्ष दो चुनाव हार चुका है,वह नहीं चाहता है कि इस मजबूत नेता की छवि के कारण उसे तीसरी बार भी हार का सामना करना पड़े।

हकीकत में पीएम मोदी की मजबूत व ईमानदार नेता की छवि से विपक्ष दस साल से डरता रहा है और आज जब चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है, तो भी विपक्ष का मोदी से डरना जारी है। जब पीएम मोदी रोज बोलते हैं, दिन मेंं कई बार बोलते हैं,सभा में बोलते है, इंटरव्यू में बोलते हैं तब विपक्ष के नेता पीएम मोदी से डरें तो समझ में आता है। पीएम मोदी जब कुछ नहीं कह रहेें तो उनके मौन से भी विपक्ष का डरना साफ कर देता है कि विपक्ष ही मोदी से हमेेशा डरता रहा है, जब तक हैं, तब तक डरता रहेगा क्योकि वह पीएम मोदी का कई क्षेत्रों में कोई मुकाबला ही नहीं कर सकता।जब भी पीएम मोदी खांटी हिंंदू नेता के रूप में कोई काम करते हैं, देश के किसी आध्यात्मिक स्थल जाते हैं तो उनका मकसद अपना प्रचार करना नहीं होता है। उस स्थल के बारे में देश के लोगों को बताना भी होता है कि यह स्थल इस देस में दिव्य है, अद्भुत है, अलौकिक है। यहां आकर इसे अनुभव किया जा सकता है।

फिर एक बार पीएम मोदी ने ऐसा ही किया है, लोकसभा चुनाव के सातवेें चरण का प्रचार थमने के बाद उन्होंने फैसला किया है कि वह पंजाब के होशियारपुर से सीधे तमिलनाडू के कन्याकुमारी पहुंच जाएंंगे और समुद्र तट से पांच सौ मीटर भीतर विवेकानंद राक पर 30 मई से 1 जून तक ध्यान में रहेंगे। इस दौरान वह किसी से कुछ कहने वाले नहीं है, वह 48 घंटे मौन रहेंगे। तो भी विपक्ष उनके 48 घंटे के मौन से भी डर रहा है। दुनिया में ऐसा विपक्ष शायद ही कहीं हो जो एक मजबूत व ईमानदार नेता के मौन से भी इतना डरता हो।मोदी भी जानते हैं और विपक्ष भी जानता है कि वह जब मौन हो जाते हैं तो उनका मौन भी बहुत कुछ बोलता है, उनकी मौन की भाषा को पूरा देश अच्छे से समझता है, वह जो बात बोलकर समझा सकते हैं, वह कई बार उसी बात को देश को मौन रहकर भी समझा सकते हैं। देश का विपक्ष मोदी से इस बोलते हुए मौन से डरा हुआ है कि वह पता नहीं चुप रहकर देश की जनता को कितना प्रभावित कर जाएं।

पीएम मोदी कई बार इतने योजनाबध्द तरीके से काम करते है कि विपक्ष उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाता है बल्कि मीडिया से ज्यादा प्रचार वह खुद मोदी का करता है। विवेकानंद राक पर देश का हर आदमी कभी भी जाकर ध्यान लगा सकता है। पीएम मोदी भी कर सकते हैं इस पर कोई रोक थोड़ी न है। चुनाव आयोग भी इस पर रोक नहीं लगा सकता। क्योंकि यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन तो है ही नहीं।पीएम मोदी विवेकानंद राक कुछ कहने तो जा नहीं रहे हैं,वह तो ध्यान लगाने जा रहे हैं, देश के लोगों को बताने जा रहे है कि देश में ऐसी भी एक जगह जहां जाकर ध्यान लगाया जा सकता है और अलौकिक अऩुभव किया जा सकता है। इससे पहले पीएम मोदी केदारनाथ की गुफा में १७ घंटे का ध्यान लगाया था, तब भी तो वह चार राज्यों का चुनाव प्रचार समाप्त होने पर केदारनाथ गए थे। तब भी विपक्ष ने इसका इसी तरह विरोध किया था कि इसका प्रसारण टीवी पर नहीं किया जाना चाहिए।

तब टीवी पर इसको दिखाया गया था यानी इस बार भी पीेएम मोदी के २४ घंटे के ध्यान को दिखाया जाएगा, विपक्ष के विरोध के बाद भी दिखाया जाएगा क्योंकि विपक्ष को यह विरोध ही गलत है।विपक्ष का कोई नेता भी इसी दिन कहीं ध्यान लगाने जाएगा तो मीडिया उसे भी तो दिखाएगा तो विपक्ष को ऐसा करने से किसी ने तो रोका नहीं है।विपक्ष के सबसे बड़ खटाखट नेता राहुल गांधी भी कही जाकर ध्यान लगा सकते है। लेकिन राहुल गांधी सहित विपक्ष को कोई नेता ऐसा करने की हिम्मत ही नहीं कर सकता क्योंकि उनके ऐसा कर पर देश को यह स्वाभाविक नहीं लगेगा, देश उन पर हंसेगा,सबस बड़ी बात विपक्ष के ने ऐसा किया तो उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा। पीएम मोदी व विपक्ष के नेताओं में यह बहुत बड़ा अंतर है कि पीएम मोदी को अच्छा काम करके मीडिया में छा जाना आता है। विपक्ष को यही नहीं आता है, इसलिए वह चाहता है कि पीएम मोदी को भी ऐसा न करने दिया जाए।

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