शहीद गुप्तेश्वर सिंह की पुण्यतिथि पर वक्ताओं ने नैतिक पतन पर जताई गंभीर चिंता
वाराणसी में शहीद गुप्तेश्वर सिंह की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने देश में बढ़ते भ्रष्टाचार, अनैतिकता और दुराचार पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने इसे राष्ट्रीय विकास और वैश्विक छवि के लिए घातक बताते हुए निष्पक्ष जांच और व्यापक जनआंदोलन की मांग की।
वाराणसी। भारत की सबसे बड़ी समस्या आज भ्रष्टाचार, अनैतिकता एवं दुराचार बन चुकी है, जिसके कारण देश का समग्र विकास और वैश्विक छवि प्रभावित हो रही है। वक्ताओं ने कहा कि इस समस्या पर काबू पाने के लिए पूरे देश में एसआईआर की तर्ज पर एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार दिन दूना रात चौगुना बढ़ता जा रहा है और इससे छुटकारा पाए बिना भारत का विश्वगुरु बनना असंभव प्रतीत होता है। ये विचार श्याम सुंदर सिंह स्मृति सेवा संस्थान के तत्वावधान में क्रांतिपल्ली कालोनी विनायका में शहीद श्री गुप्तेश्वर सिंह की पुण्यतिथि (4 फरवरी) पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
वक्ताओं ने कहा कि आज भ्रष्टाचार लेखपाल से लेकर शीर्ष प्रशासनिक पदों तक फैल चुका है। इसे रोकने के जितने प्रयास किए जा रहे हैं, यह रक्तबीज की तरह उतनी ही तेजी से फैलता जा रहा है। स्थिति यह है कि घूस लेने, देने और उसमें सहयोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे पूरा देश कराह रहा है। वक्ताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच राष्ट्रीय स्तर पर कराए जाने की मांग की। सभा में अनैतिकता पर चिंता व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोग अब जलाशयों तक को नहीं छोड़ रहे हैं। काशी के अनेक नदी, कुएं, तालाब, पोखरे, नाले और नालियां अनैतिकता की भेंट चढ़ चुके हैं। इस स्थिति के लिए प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार हैं, जबकि जो जिम्मेदार नहीं हैं वे मूकदर्शक बने हुए हैं। वक्ताओं ने दुख जताया कि चौथा स्तंभ भी इन ज्वलंत मुद्दों को उठाने से बचता नजर आ रहा है, जिससे अराजकता का माहौल बनता जा रहा है।
दुराचार पर बोलते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज धीरे-धीरे इसके प्रति संवेदनहीन होता जा रहा है। पहले ऐसी घटनाओं पर समाज उद्वेलित हो उठता था और विरोध-प्रदर्शन होते थे, लेकिन अब लोग चाय की दुकानों और रेस्टोरेंटों में चर्चा कर शांत हो जाते हैं। दुराचार से जुड़ी खबरों की संख्या अब दहाई में पहुंच गई है। वक्ताओं ने कहा कि टीवी और मोबाइल भी किसी न किसी रूप में दुराचार को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि देश के शेष पांच प्रतिशत ईमानदार लोग संगठित होकर आवाज उठाएं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव है।श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए डॉ. एकता सिंह ने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को महापुरुषों और अपने पूर्वजों के योगदान को स्मरण करना चाहिए तथा उनके सिद्धांतों और बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। शहीदों को नमन करने से युवा पीढ़ी में राष्ट्रसेवा और नैतिकता के प्रति प्रेरणा मिलती है।
इस अवसर पर आनंद सिंह, विजय कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, अभय कुमार सिंह, भगवन्त सिंह, ज्ञान प्रकाश सिंह, पूनम सिंह, ममता वर्मा, रेनू सिंह, वंदना सिंह, गोपाल वर्मा सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त पुलिस उपाधीक्षक श्री विनोद कुमार सिंह ने की। आगंतुकों का स्वागत वेद प्रकाश सिंह ने किया, धन्यवाद ज्ञापन पुष्पा सिंह ने दिया तथा कार्यक्रम का संचालन श्रीमती आशा सिंह ने किया। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती शीला सिंह ने मिष्ठान वितरण किया।
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