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योगी-2 – एक परिवार एक रोजगार में होगा ओडीओपी का अहम रोल

गिरीश पांडेय

सबका साथ, सबका विकास। भाजपा के लिए सिर्फ नारा नहीं, संकल्प है। 2022 के विधानसभा चुनावों में मिली प्रचंड जीत के बाद तो तो इस संकल्प में सबका भरोसा और मजबूती से जुड़ चुका है। भरोसा बड़ी चीज है। यह तभी हासिल होता है जब समग्रता में विकास हो और उसका लाभ बिना भेदभाव के पूरी पारदर्शिता के साथ पात्रता के मुताबिक सबको मिले। इसी मकसद से लोककल्याण संकल्पपत्र-20 22 में भाजपा ने “एक परिवार एक एक रोजगार” की बात कही है। यह कैसे होगा, इसका भी पूरा विवरण संकल्पपत्र में है। इसमें स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में पहले की तरह ही योगी-2 में भी एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी), माटी कला, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

योगी-2 में उप्र के ओडीओपी उत्पाद बनेंगे देश-दुनिया में ब्रांड

अपने दूसरे कार्यकाल में योगी सरकार की मंशा ओडीओपी उत्पादों को देश और दुनिया में उत्तर प्रदेश का ब्रांड बनाने का है। ताकि देश और दुनिया में मेक इन यूपी का भी जलवा हो।

ओडीओपी उत्पादों के निर्यात को दोगुना करेगी सरकार

संकल्पपत्र में अगले पांच वर्षों में ओडीओपी से जुड़े उत्पादों के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे इन उत्पादों के साथ इनसे जुड़े हुनरमंदों के साथ सभी स्टेक होल्डर्स की बेहतरी होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजी-रोजगार के अवसर भी बढेगें।

5 साल में ओडीओपी से मिला 25 लाख को रोजगार

पिछले पांच वर्षों में देश-दुनिया में सराही जाने योगी सरकार की इस बेहद महत्वाकांक्षी योजना से 25 लाख लोगों को रोजगार/स्वरोजगार मिला था। दूसरे कार्यकाल में एमएसएमई, ओडीओपी, माटीकला, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अलावा आत्मनिर्भर युवा स्टार्टअप मिशन प्रस्तवित लेदर पार्क, फ़ूड पार्क, धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क,आईटी पार्क, डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेस वे से लगे बनने वाले औद्योगिक गलियारे के जरिए,” एक परिवार, एक रोजगार” के संकल्प को साकार करेगी भाजपा सरकार।

योगी-2 में 10 करोड़ को रोजगार देने का लक्ष्य

योगी-1 में 3 करोड़ लोगों को रोजगार या स्वरोजगार मिला था। योगी-2 सरकार का लक्ष्य अगले 5 साल में प्रदेश 10 लाख करोड़ निवेश लाने का है। इस निवेश से लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। इनकी वजह से लगने वाली अनुषांगिक इकाईयों से भी स्थानीय लोग खुद तो रोजगार पाएंगे ही औरों को भी रोजगार दे सकेंगे।

डिफेंस कॉरिडोर

6-6 मेगा फ़ूड पार्क, धन्वंतरि मेगा हेल्थ पार्क, 6 एमएसएमई पार्क एवं हर मंडल में बनने वाले इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी (आईटी) पार्क, कानपुर में वाला मेगा लेदर पार्क, सभी पाँच एक्सप्रेसवे के किनारे बनने वाले औद्योगिक गलियारे भी रोजगार भी रोजगार का जरिया बनेंगे। अकेले एक्सप्रेस वे के किनारे बनने वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से लगभग 5 लाख, लेदर पार्क से दो लाख, आत्म निर्भर युवा स्टार्ट मिशन के जरिए 10 लाख युवाओं को रोजगार/स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।

भरोसे को मुकम्मल करने के लिए सबका साथ,सबका विकास नारे पर और होगा फोकस

उल्लेखनीय है कि अपने पहले कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अक्सर कहते रहे हैं कि विकास सबका,तुष्टिकरण किसी का नहीं, यह हमारी नीति है। अपने पहले कार्यकाल में जारी इस सिलसिले को यकीनन वह अपने दूसरे कार्यकाल में भी जारी रखेंगे। 5 साल पहले मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती इसे पटरी पर लाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश का समग्र विकास करने का था।

क्या होगी ओडीओपी, एमएसइ की भूमिका

उत्तरप्रदेश में छोटे-छोटे लघु एवं पारंपरिक उद्योगों की बेहद संपन्न परंम्परा रही है। हर जिले में एक या इससे अधिक उत्पाद वहां की पहचान रहे हैं। इसके लिए ऐसे उद्योगों को अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में लाना था। इनसे जुड़े लोगों का हुनर निखारना था,ताकि इनके उत्पाद कीमत और गुणवत्ता में बाजार में प्रतिस्पर्धी बनें। पूरी दुनिया में जहां-जहां पर छोटे और मध्यम उद्योग विकसित हुए हैं सबका एप्रोच कलस्टर (समूह) का ही रहा है। समूह के नाते वाल्यूम का लाभ मिलता है। वॉल्यूम के नाते कच्चे माल की उपलब्धता आसान होती है। बाजार खुद चलकर उत्पादकों के पास आता है। बिचौलियों की भूमिका खत्म होने से लाभ भी बढ़ जाता है।

ऐसे हुई ओडीओपी की शुरुआत

उक्त मकसद से योगी-1 सरकार की पहली वर्षगांठ (24 जनवरी, 2018) पर ओडीओपी योजना की घोषणा की गई। पांच साल में इस योजना ने निर्यात से लेकर स्थानीय स्तर पर रोजगार देने में अपनी सार्थकता साबित की। सरकार की इस योजना के जरिए बड़ी संख्या में छोटे-बड़े कारीगरों को उद्यमी बनने का मौका मिला। छोटे उद्यमी कारोबार बढ़ाकर मध्यम उद्यमी बने। लाखों लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला।

गेम चेंजर साबित हुआ एमएसइ सेक्टर

ओडीपी के नाते प्रदेश में सबका ध्यान एमएसएमई की ओर गया। एमएसएमई सेक्टर एक गेम चेंजर के रूप में उभरा। प्रदेश के निर्यात में पिछले 3 साल में हुए 38 प्रतिशत वृद्धि में ओडीओपी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश से निर्यात होने वाले विभिन्न उत्पादों में लगभग 80 प्रतिशत ओडीओपी उत्पाद ही हैं। योजना में जहां एक ओर स्थानीय पारम्परिक कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट व ऋण की सुविधा मिलती है, वहीं समूहों में जहां पर बड़े निवेश की आवश्यकता है वहां सरकार काॅमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) भी खोल रही है। इससे इन इकाइयों को अपने उत्पादन व गुणवत्ता को सुधारने में मदद मिलेगी।

संभल और सहारनपुर के उदाहरण

मसलन जानवरों की हड्डी से बनने वाला बटन संभल जिले का ओडीओपी है। वहां के कारीगर बटन बनाकर फिनिशिंग के लिए चीन भेजा करते थे। वहां से फिनिश्ड उत्पाद आने पर उसे निर्यात किया करते थे। इससे लागत और समय दोनों बढ़ जाते थे।कोरोना के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की अपील के बाद सरकार ने इन कारीगरों से बात की। इनके लिए उस मशीन की व्यवस्था सम्भल में ही कराने की स्वीकृति दे दी। इससे इनकी लागत घटेगी। मशीन पर नियंत्रण होने के नाते गुणवत्ता भी सुधरेगी। समय से आपूर्ति के नाते देश-विदेश में साख भी बेहतर होगी।इसी तरह लकड़ी के उत्पाद सहारनपुर का ओडीओपी है। वहां के लकड़ी के कारीगरों के पास सिजनिंग प्लाण्ट नहीं है। वह सिजनिंग के लिए लकड़ियों को जयपुर व अन्य स्थानों पर भेजा करते हैं। ओडीओपी योजना में अब इनके लिए सिजनिंग प्लाण्ट स्वीकृत कर दिया गया है जिसे कि वह स्वयं चलायेंगे।

ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जिससे कि ओडीओपी योजना के उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादों को बेहतर बनाने तथा लागत कम करने में राज्य सरकार सहायता कर रही है। ऐसे प्रयासों से विकास की गंगा पूरे प्रदेश में बहेगी। परंपरागत पेशे से जुड़े हुनरमंद शिल्पकारों , हस्तशिल्पियों की कला का संरक्षण एवं संवर्धन होगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस संबंध में सरकार का नजरिया समग्रता में है। मकसद है परंपरागत हुनर को संरक्षण एवं संवर्द्धन देने के साथ युवाओं को स्वावलंबी बनाना, कम पूंजी, कम निवेश एवं न्यूनतम जोखिम में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।

योगी-1 सरकार ने ओडीओपी से जुड़े परंपरागत हुनर को निखारने और हुनरमंदों की समस्याओं को दूर करने का पूरी प्रतिबद्धता से जो प्रयास किया है वह सिलसिला दूसरे कार्यकाल में भी जारी रहेगा।पहले जैसे ही परंपरागत हुनर को निखारनेे के लिए प्रशिक्षण से लेकर कच्चा माल और बाजार उपलब्ध कराने तक हर स्तर पर उनके साथ सहयोगी की भूमिका में खड़ी रहेगी। शुरू में ओडीओपी के उत्पाद गुणवत्ता और दाम में देश और दुनिया के इसी तरह के उत्पादों की तुलना में कीमत और गुणवत्ता में प्रतिस्पर्धी हों इसके लिए संबंधित विधा के शिल्पकारों को तकनीक से जोड़ते हुए उनको प्रशिक्षण देना सबसे जरूरी था। सीएफसी से यह समस्या दूर हो रही है।

कई जगहों पर उत्पाद तैयार करने के लिए कच्चे माल की समस्या थी। मसलन मिट्टी के बर्तन और अन्य सजावटी सामान बनाने वालों की सबसे बड़ी समस्या मिट्टी की थी। सरकार ने इसके लिए माटी कला बोर्ड का गठन कर इस समस्या को दूर कर दिया। इसके तहत अब तय समय के दौरान मिट्टी के उत्पाद तैयार करने वाले लोगों को गांव के पोखरे का नि:शुल्क पट्टा मिलता है। उत्पाद बनाने और उसे शीघ्र और एक समान पकाने के लिए इलेक्ट्रिक चॉक और फर्नेस (भट्ठियां) पग मिल भी दिये जा रहे हैं।इसी तरह विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत अलग-अलग हुनर से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण के साथ टूल किट भी दिये जा रहे हैं। प्रशिक्षण हासिल करने वाले खुद स्वावलंबी बनें और स्थानीय स्तर पर और लोगों को रोजगार दे सकें इसके लिए ओडीओपी मार्जिन मनी योजना के तकत उनको 20 लाख रुपये तक कि सब्सिडी दी जा रही है। पैसा प्राप्त करने में बैंक की प्रकिया बाधक न बने इसके लिए कुछ बैंकों से सरकार ने करार भी किया है। आने वाले समय में इससे और बैंकों को भी जोड़ा जाएगा।

अब ई प्लेटफार्म पर भी ओडीओपी उत्पाद

गुणवत्ता और दाम में प्रतिस्पर्धी उत्पाद तैयार करने के बाद अमूमन बिचौलियों के कारण परंपरागत हुनर से जुड़े लोगों को अपने उत्पाद का वाजिब दाम नहीं मिल पाता। बिचौलियों से मुक्त ऐसा बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी सरकार ने कई प्रयास किये हैं। ओडीओपी मार्केटिंग डेवलपमेंट स्कीम के तहत ई-कामर्स वेबसाइट पर ऑन बोर्डिंग के लिए 10 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है। जानी-मानी ई-कामर्स वेबसाइट अमेजन पर ओडीओपी के हजारों उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। अब तो सरकार के पास ओडीओपी मार्ट के नाम से अपनी वेबसाइट भी है।

ओडीओपी के और उत्पादों को जीआई दिलाने का होगा प्रयास

दौर बाजार का है। इस दौर में जो दिखेगा वही बिकेगा। विभिन्न जिलों के ऐसे उत्पाद देश और दुनिया के प्रमुख मेलों और प्रदर्शनियों में दिखें इसके लिए ओडीओपी मार्केटिंग डेवलपमेंट योजना के तहत स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए इच्छुक उत्पादकों को सीधे उनके खाते में 75 फीसद प्रतिपूर्ति की भी व्यवस्था है। ऐसे आयोजनों का संबंधित लोगों को पता चले इसके लिए एक कैलेंडर भी तैयार किया जा रहा है। जीआई जिओग्राफिकल इंडीकेशन (जीआई) किसी उत्पाद को वहां का खास उत्पाद बना देते हैं। इस खासियत के नाते उनकी मांग बढ़ जाती है और अच्छे दाम भी मिलते हैं। अब तक 14 उत्पादों का जीआई पंजीकरण हो चुका है, और जीआई के लिए प्रयास जारी है। पिछली और इस दीपावली में जिस तरह चीन की बजाय स्वदेशी दीयों और लक्ष्मी-गणेश के प्रतिमा की धूम रही उसके पीछे भी ओडीओपी की ही महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह इस योजना के लिए शुभ संकेत है। साथ इस बात का भी सबूत कि योजना अच्छी हो, उसे प्रचार मिले तो बहुत कुछ बेहतर हो सकता है।

नवनीत सहगल
नवनीत सहगल

ओडीओपी बन सकती है अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन: नवनीत सहगल

अपर मुख्य सचिव एमएसइ नवनीत सहगल के मुताबिक ओडीओपी आत्म निर्भर भारत की बुनियाद है। इसमें देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनने का माद्​दा है। आज केंद्र सरकार भी ओडीओपी योजना की मुरीद है। पिछले आम बजट में केंद्र सरकार ने न केवल इसकी चर्चा की बल्कि बाद में खेतीबाड़ी के बाबत ओडीओपी एक सूची जारी की।

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