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भारत–कनाडा संबंधों में नई शुरुआत, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े समझौते

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, यूरेनियम आपूर्ति और महत्वपूर्ण खनिजों सहित कई अहम समझौते किए। 2030 तक व्यापार 50 अरब डॉलर पहुंचाने और 2026 तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता अंतिम रूप देने का लक्ष्य तय हुआ। आतंकवाद-रोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और हिंद-प्रशांत समन्वय को भी मजबूत करने पर सहमति बनी।

नयी दिल्ली : भारत और कनाडा ने पटरी से उतरे संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने के उद्देश्य से द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम देने के लिए सोमवार को यहां आर्थिक एवं रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने और यूरेनियम तथा महत्वपूर्ण खनिजों सहित अनेक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते किये।दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी तंत्र, साइबर सुरक्षा, संगठित अपराधों से मुकाबले तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करने पर भी सहमति बनी। उन्होंने समय के साथ और जरूरत के आधार पर उच्चायोगों में अधिकारियों तथा कर्मचारियों की संख्या बढाने की दिशा में कदम उठाने का भी निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की चार दिन की यात्रा पर आये कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालने के बाद श्री कार्नी की यह पहली भारत यात्रा तथा 2018 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है।वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने 79 वर्षों के कूटनीतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संप्रभुता के सम्मान और गहरे जन-से-जन संबंधों पर आधारित साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई। उनके बीच “वसुधैव कुटुम्बकम् – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” को नवीकृत भारत–कनाडा रणनीतिक साझेदारी का मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने पर सहमति बनी।

दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को नई गति देने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता वार्ता को आगे बढ़ाने और 2026 तक इसे अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। दोनों नेताओं ने मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की फोरम के पुनर्गठन और वित्त मंत्रियों के आर्थिक संवाद की शुरुआत का स्वागत किया गया। दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग को आपसी विश्वास और संबंधों की परिपक्वता का प्रतीक बताते हुए रक्षा उद्योग, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और सैन्य आदान – प्रदान बढ़ाने पर काम करने की सहमति व्यक्त की और इसी उद्देश्य से भारत- कनाड़ा रक्षा संवाद की स्थापना करने का निर्णय लिया।उन्होंने आतंकवाद को साझा चुनौती बताते हुए आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को पूरी मानवता के लिए साझा और गंभीर चुनौती बताया।

उन्होंने इनके विरुद्ध करीबी सहयोग को वैश्विक शान्ति और स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति विविधीकरण और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को प्राथमिकता देते हुए रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। उनके बीच एलएनजी, एलपीजी, कच्चे तेल, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद, पोटाश और यूरेनियम आपूर्ति में व्यापार विस्तार पर सहमति बनी। यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए भी समझौता हुआ। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला को सुदृढ़ करने, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी, कार्बन कैप्चर, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन और बैटरी भंडारण में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया।कृषि एवं पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादन और दाल प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना जैसे कदमों पर सहमति बनी। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और प्लास्टिक प्रदूषण में कमी के लिए भी सहयोग मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

भारत ने कनाडा के अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने के इरादे और वैश्विक जैवईंधन गठबंधन में पूर्ण सदस्यता का स्वागत किया।दोनों पक्षों ने शिक्षा और प्रतिभा गतिशीलता को संबंधों का प्रमुख स्तंभ मानते हुए उच्च शिक्षा सहयोग, संयुक्त एवं द्वैध डिग्री कार्यक्रम, शोध साझेदारी और इंटर्नशिप विस्तार पर जोर दिया। सांस्कृतिक सहयोग, रचनात्मक उद्योगों, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा आदिवासी और जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण पर भी सहमति बनी। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की गई।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल अवसंरचना और नवाचार में संयुक्त पहलों को आगे बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया।

सुरक्षा और रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी तंत्र, साइबर सुरक्षा, संगठित अपराध से मुकाबला तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समन्वय को सुदृढ़ करने पर भी सहमति बनी। भारत ने कनाडा के हिंद महासागर क्षेत्रीय संघ में संवाद भागीदार बनने की इच्छा का स्वागत किया।दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सुदृढ़ साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक लचीलापन और साझा समृद्धि को बढ़ावा देगी। (वार्ता)

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