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नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी: भारत में शिक्षा की नई संस्कृति का होगा निर्माण

तेजी से बदलती दुनिया के साथ भारत ने अपने स्वरूप में कई अहम बदलाव किए हैं। खासतौर से छात्रों और उनकी शिक्षा पर फोकस करते हुए भारत ने कई अहम कदम उठाए हैं। इसी दिशा में ‘नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी’ को प्रमुख माना जा रहा है। बता दें, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2023 को इस संबंध में घोषणा की कि बच्चों और किशोरों के लिए एक ‘राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी’ की स्थापना की जाएगी ताकि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं, शैलियों और स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने का प्रस्ताव समावेशी विकास के हिस्से के रूप में दिया है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय छात्र आने वाले वक्त में इसी नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की मदद से अपना ज्ञान वर्धन करेंगे। विशेषज्ञों का मत है कि डिजिटल युग में भारत की तरफ से राष्ट्र निर्माण की दिशा में यह कदम सबसे कारगर साबित होगा। चूंकि बच्चों की सीखने की क्षमता अधिक होती है, ऐसे में उनके बढ़ते डिजिटल रुझान के मद्देनजर नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी मील का पत्थर साबित हो सकती है।

पंचायत और वार्ड स्तरों पर होगी डिजिटल लाइब्रेरी

अच्छी बात यह है कि सरकार द्वारा बच्चों के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा पूरे देश में पंचायत और वार्ड स्तर पर देने की बात सामने आई है। जैसा कि अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा है कि राज्यों को बच्चों के लिए पंचायत और वार्ड स्तरों पर वर्चुअल पुस्तकालय स्थापित करने और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय संसाधनों तक पहुंचने के लिए बुनियादी ढांचा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे में राज्यों की ये जिम्मेदारी बनती है कि वे भी इस कार्य में रुचि लें और देश के विकास में योगदान अदा करें।

गैर सरकारी संगठनों का भी रहेगा सहयोग

वहीं वित्त मंत्री ने ये भी कहा कि साक्षरता में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग भी इस पहल का एक हिस्सा होगा। वित्तीय साक्षरता को बढ़ाने के लिए, वित्तीय क्षेत्र के नियामकों और संगठनों को इन पुस्तकालयों को आयु-उपयुक्त पठन सामग्री प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ज्ञात हो, डिजिटल एपिग्राफी म्यूजियम में एक लाख प्राचीन शिलालेख मौजूद हैं। इन शिलालेखों के भंडार को एक डिजिटल एपिग्राफी में स्थापित किया जाएगा। रिपॉजिटरी पहले चरण में एक लाख प्राचीन शिलालेखों का डिजिटलीकरण करेगी।

पढ़ाई की नई संस्कृति का होगा निर्माण

इससे देश में शिक्षा की नई संस्कृति का निर्माण करने और महामारी के समय सीखने के नुकसान की भरपाई की जा सकेगी। इस दिशा में नेशनल बुक ट्रस्ट, चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट और अन्य सोर्स को इन भौतिक पुस्तकालयों को क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी में गैर-पाठ्यचर्या संबंधी शीर्षक देने और भरने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह अध्ययन सामग्री की पहुंच के विस्तार के साथ छात्रों के बीच एक मजबूत पठन संस्कृति का भी निर्माण करेगा।

स्पष्ट है कि सरकार के इस कदम से नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की उपलब्धता की सुविधा से बच्चों को अधिक गुणवत्ता वाली किताबें पढ़ने का मौका मिल सकेगा। महज इतना ही नहीं, नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी में बच्चों को तमाम भाषाओं, भौगोलिक, शैलियों और स्तरों की पुस्तकें भी आसानी से उपलब्ध होंगी।

शिक्षा क्षेत्र के हितधारकों ने प्रस्ताव का किया स्वागत

उल्लेखनीय है कि शिक्षा क्षेत्र के कई हितधारक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों के लिए विभिन्न विषयों में सीखने के संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव से बेहद खुश हैं। इसलिए उन्होंने नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना को एक महान नीतिगत उपाय बताया है।

नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी क्या है?

डिजिटल लाइब्रेरी एक ऐसा पुस्तकालय है जिसमें पुस्तकों का संग्रह डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में होता है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं कंप्यूटर के माध्यम से इसका उपयोग किया जा सकता है। डिजिटल लाइब्रेरी को ऑनलाइन लाइब्रेरी, इंटरनेट लाइब्रेरी, डिजिटल रिपॉजिटरी, या डिजिटल संग्रह के रूप में भी जाना जाता है। यह डिजिटल वस्तुओं का एक ऑनलाइन डेटाबेस है, जिसमें टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो, वीडियो, डिजिटल दस्तावेज के रूप में पुस्तकें शामिल हो सकती हैं। इस प्रकार की लाइब्रेरी को इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है।

प्रमुख अंतर यह है कि डिजिटल पुस्तकालय में संसाधन केवल मशीन-पठनीय रूप में उपलब्ध होते हैं। नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी में डिजिटल वस्तुओं का भंडार होगा, जैसे किताबें, लेख, छवियां, वीडियो और मल्टीमीडिया आदि। यह उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट के जरिए पहुंच के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी सूचना और ज्ञान तक पहुंच प्रदान करेगा। राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत से, देश भर के सभी उपयोगकर्ता लाभान्वित होंगे। जानकारी की आसान खोज और पुनर्प्राप्ति के साथ-साथ जानकारी को सुरक्षित रखने की क्षमता से भविष्य की पीढ़ियों को एक स्थायी तरीका भी मिलेगा।

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