
नर सेवा ही नारायण सेवा ! मुफ्त में छात्रों को डिप्रेशन से बाहर निकालने में मदद कर रहा समाज का ये तबका
बताना चाहेंगे, लगभग एक साल ऑनलाइन क्लासेज और बिना परीक्षा के बिता चुके स्कूली बच्चों के दिल-ओ-दिमाग पर लॉकडाउन ने गहरा असर छोड़ा है। इसी समस्या से निपटने के लिए कुछ मनोचिकित्सक नि:शुल्क ऑनलाइन सेवा मुहैया करा रहे हैं।
कोरोना काल में बच्चों के लिए क्यों जरूरी हुई मनोचिकित्सा
इन्हीं में से एक हैं बाल मनोचिकित्सक नंदिनी कौल। इन दिनों रोजाना ऐसे स्कूली बच्चे नंदिनी से ऑनलाइन सम्पर्क कर रहे हैं, जिन पर लॉकडाउन का विपरीत असर पड़ा है। कारण बहुत से हैं। किसी ने अपनों को खोया है तो किसी को परीक्षा न होने की वजह से अपना भविष्य अधर में झूमता नजर आ रहा है। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन इससे बच्चे चिड़चिड़े और उदास हो गए हैं। ऐसे में उनका मनोवैज्ञानिक इलाज ऐसे मनोचिकित्सकों के पास है।
इस समस्या के निजात के लिए करते हैं काउंसलिंग
इस बाबत मनोचिकित्सक नंदिनी कौल बताती हैं कि बच्चे इस तरह की समस्या बहुत फेस कर रहे हैं। हां, इस डिप्रेशन की समस्या से जूझा जा सकता है, यदि हम अपने अंदर पॉजीटिविटी रखें। सकारात्मक विचारों के साथ हमें अपने अंदर बदलाव लाने की शक्ति रखनी होगी। बदलाव समय का नियम है।
आगे जोड़ते हुए वे कहती हैं कि अगर हम ये तय कर लें कि हमें बदलाव लाना है और समय के साथ खुशी-खुशी चलना है तो स्थिति बदल सकती है। साथ ही जो आ रहा है उसको एक्सेप्ट करें तो इस तरह के चेंज से जो डिप्रेशन अभी बच्चों में आ रहा है, उससे बहुत हद तक पॉजीटिव रहने में मदद मिलेगी और चीजों को अपना कर वे इनसे जूझ सकते हैं।
परेशानी का हल निकलने से बच्चे करेंगे बेहतर महसूस
मनोविज्ञान के जरिए अपनी परेशानी का हल निकलने से ये बच्चे अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों की तेजी से बढ़ती इस समस्या का समाधान जल्द होना बेहद जरूरी है।



