Varanasi

केंद्रीय बजट 2026-27 पर वाराणसी में मिली-जुली प्रतिक्रिया, व्यापारियों ने जताई उम्मीद और चिंता

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 पर वाराणसी में व्यापारियों, बैंक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और पेशेवरों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। एमएसएमई फंड, अवसंरचना विकास, पर्यटन और रोजगार सृजन से जुड़े प्रावधानों का स्वागत किया गया, वहीं फर्नीचर, बुनकर और छोटे व्यापारियों के लिए जीएसटी व आयात से जुड़ी विशेष राहतों की कमी पर नाराजगी भी जताई गई। व्यापार संगठनों ने क्रियान्वयन में सुधार की मांग की है।

  • एमएसएमई, पर्यटन और अवसंरचना पर फोकस का स्वागत, फर्नीचर व छोटे व्यापारियों को सीमित राहत

वाराणसी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। बजट के बाद धार्मिक नगरी काशी (वाराणसी) में व्यापारियों, बैंक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और पेशेवरों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अधिकांश वक्ताओं ने बजट को संतुलित बताते हुए एमएसएमई, अवसंरचना और पर्यटन पर फोकस का स्वागत किया, वहीं कुछ वर्गों ने सेक्टर-विशिष्ट राहतों की कमी पर चिंता जताई। वाराणसी फर्नीचर और फर्निशिंग व्यापार मंडल ने बजट को मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए सकारात्मक दिशा में कदम बताया है, लेकिन फर्नीचर और फर्निशिंग जैसे विशिष्ट सेक्टर्स की अनदेखी पर चिंता भी जताई है।

पंजाब नेशनल बैंक के असिस्टेंट जनरल मैनेजर राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि बजट भारत को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करता है। उनके अनुसार, अवसंरचना विकास पर विशेष जोर दिया गया है और रोजगार की सोच में बदलाव का प्रयास दिखता है- युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। एमएसएमई सेक्टर के लिए ₹10 हजार करोड़ का फंड और काशी के लिए रेल कॉरिडोर व शिपयार्ड की घोषणाएं नई औद्योगिक संभावनाएं खोलेंगी।

चार्टर्ड अकाउंटेंट मुदित अग्रवाल ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए अपेक्षित बड़े प्रावधान नहीं आए, जबकि सर्विस सेक्टर को कुछ राहत मिली है। उन्होंने पर्यटन के तहत 10 हजार गाइड तैयार करने की योजना को रोजगार सृजन की दृष्टि से उपयोगी बताया। हालांकि, आयकर स्लैब में बदलाव न होने से मध्यम वर्ग को सीमित राहत ही मिली है।

अधिवक्ता शशांक त्रिपाठी ने बजट को कृषि और पर्यटन उन्मुख बताते हुए कहा कि छोटे उद्योगों को कृषि से जोड़कर नई परिभाषा गढ़ने की कोशिश की गई है। पर्यटन प्रावधानों से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को बल मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

अल्पसंख्यक व्यापार मंडल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष हाजी शाहिद कुरैशी ने कहा कि बुनकरों को बजट से खास उम्मीदें थीं, लेकिन रेल कॉरिडोर के अलावा काशी को बड़ी राहत नहीं मिली। छोटे व्यापारियों के लिए बजट सामान्य रहा। वहीं, पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंधक जेक वर्मा ने बताया कि छोटे उद्योगों पर फोकस और रेलवे से जुड़े निवेश से रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

इसी बीच वाराणसी फर्नीचर और फर्निशिंग व्यापार मंडल ने भी बजट पर प्रतिक्रिया दी। मंडल के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस को सकारात्मक कदम बताया, लेकिन फर्नीचर व फर्निशिंग जैसे सेक्टर्स की अनदेखी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ₹10,000 करोड़ का एसएमई ग्रोथ फंड, क्रेडिट गारंटी सीमा को ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करना तथा TReDS को अनिवार्य कर GeM से जोड़ना कैश फ्लो सुधारने वाले कदम हैं, जिनका अप्रत्यक्ष लाभ फर्नीचर उद्योग को मिलेगा।

हालांकि, अजय गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि फर्नीचर उद्योग के लिए कोई सीधा पैकेज या जीएसटी दर (18%) में कटौती न होना बड़ी कमी है। आयातित फर्नीचर पर शुल्क न बढ़ने से प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और छोटे व्यापारियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। व्यापार मंडल का कहना है कि बजट एमएसएमई-केंद्रित है, पर अपेक्षाओं से कम है। सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड के टॉप-अप, ईसीजीसी सपोर्ट और ड्यूटी रेमिशन स्कीम्स से निर्यातकों को लाभ मिल सकता है, लेकिन वायदा सौदों पर एसटीटी बढ़ने से अल्पकालिक नुकसान की आशंका है।

इनकम टैक्स मोर्चे पर नई कर व्यवस्था में ₹12 लाख तक कर छूट और ₹75,000 तक स्टैंडर्ड डिडक्शन को सीमित राहत बताया गया, जबकि जीएसटी दरों में कटौती न होने से लागत में बड़ा बदलाव नहीं आएगा। मिसरिपोर्टिंग पर सख्त दंड प्रावधानों को लेकर व्यापारियों ने अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत बताई।

कुल मिलाकर, वाराणसी के व्यापारिक और पेशेवर वर्ग ने बजट को ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न की दिशा में कदम माना है। एमएसएमई और अवसंरचना पर फोकस से रोजगार बढ़ने की उम्मीद जताई गई, लेकिन फर्नीचर और फर्निशिंग जैसे सेक्टर्स के लिए विशेष रियायतों के अभाव में तेज़ विकास को चुनौतीपूर्ण बताया गया। व्यापारियों ने सरकार से जीएसटी में कटौती, आयात पर सख्ती और सेक्टर-विशिष्ट पैकेज की मांग दोहराई है, ताकि छोटे व्यापारी बढ़ती लागत और आयात प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें।

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