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माघ मेला 2025 : संगम की रेत पर रोशनी का हाईटेक इंतज़ाम

प्रयागराज के संगम तट पर 3 जनवरी से शुरू हो रहे माघ मेले के लिए बिजली विभाग ने अभूतपूर्व तैयारियां की हैं। 800 हेक्टेयर क्षेत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 350 किमी एलटी और 47 किमी एचटी लाइनें बिछाई जा रही हैं। पहली बार “स्कैन टू फिक्स” तकनीक लागू होगी, जिससे QR कोड स्कैन कर बिजली व अन्य समस्याओं का त्वरित समाधान संभव होगा। सोलर लाइट्स से घाट और चौराहे जगमगाएंगे।

  • पहली बार “Scan to Fix” तकनीक, QR कोड से जुड़ेंगे 15 हजार बिजली के पोल

प्रयागराज । संगम किनारे 3 जनवरी से आयोजित होने वाले आस्था के जन समागम माघ मेले में सभी विभाग अपनी तैयारियां पूरी करने में युद्ध स्तर में लगे हुए हैं। बिजली विभाग 800 हेक्टेयर में फैले इस माघ मेले में निर्बाध विद्युत आपूर्ति करने की अपनी तैयारी में लगा है। इसके लिए इस बार विभाग ने कई नव्य प्रयोग किए हैं।

पहली बार “स्कैन टू फिक्स’ तकनीक का माघ मेले में प्रयोग

त्रिवेणी के तट पर 44 दिनों तक लगातार चलने वाले माघ मेले में संगम की रेत पर तंबुओं का एक अस्थाई शहर बसाने की तैयारी है। तंबुओं के इस शहर का कोना- कोना रोशन रखने के लिए बिजली विभाग ने अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली है। बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता ( माघ मेला ) अशोक कुमार शर्मा बताते हैं कि माघ मेले में इस बार 350 किमी लंबी एलटी की लाइन बिछनी थी जिसमें 320 किमी बिछ चुकी है। मेले में 7.5 लाख विद्युत कनेक्शन देने के साथ 24 x 7 बिजली मिलती रहे इसके लिए नए प्रयास किए गए हैं। माघ मेले में विद्युत आपूर्ति से जुड़ी हर समस्या के त्वरित समाधान के लिए पहली बार स्कैन टू फिक्स तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

क्यूआर कोड से लैस होंगे माघ मेले में 15 हजार बिजली के पोल्स

स्कैन टू फिक्स तकनीकी के अंतर्गत विद्युत विभाग ने माघ मेले में पहली बार हाईटेक ‘बारकोड सिस्टम’ लागू किया है, जिससे बिजली से जुड़ी हर समस्या का तुरंत समाधान किया जा सकेगा। अधिशाषी अभियंता ( माघ मेला) अशोक कुमार शर्मा का कहना है कि मेला क्षेत्र में लगाए गए हर खंभे, लाइन और कनेक्शन पर विशेष बारकोड लगाए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करते ही बिजली कर्मचारी सीधे कंट्रोल रूम से समस्या की जानकारी हासिल कर लेंगे और रिकॉर्ड समय में समाधान करेंगे।

इसका एक पक्ष यह भी है कि श्रद्धालु अपनी लोकेशन पहचान सकेंगे और रास्ता भटकने की स्थिति में परिवार या गंतव्य तक आसानी से पहुंच पाएंगे। मेला की अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी यह व्यवस्था कारगर होगी। क्यूआर कोड स्कैन कर गूगल फार्म भरने से मिली जानकारी से बिजली संबंधी शिकायतों के साथ-साथ पानी की कमी या टूटी सड़कों जैसी समस्याएं भी दर्ज करा सकेंगे। मेला क्षेत्र में 15 हजार से अधिक ऐसे बार कोड लगाए गए हैं। बिजली गुल होने से बचने के लिए 5 रिंग मेन यूनिट लगाई जा रही है जो पिछले मेले में 1 थी इससे 10 सेकंड में गुल बत्ती आ जाएगी।

सोलर लाइट से जगमग होंगे संगम के स्नान घाट और चौराहे

माघ मेला में बिजली व्यवस्था के लिए 32 करोड़ का बजट रखा गया है जो पिछले माघ मेले से 10 फीसदी अधिक है। माघ मेले में 47 किमी एचटी और 350 किमी एलटी लाइनें बिछाई जाएंगी, साथ ही 25 बड़े और 35 छोटे सब स्टेशन बनाए जाएंगे, जिनमें तीन-लेयर पावर बैकअप सिस्टम होगा। पूरे माघ मेला क्षेत्र में 25 हजार से अधिक एलईडी लाइट्स लगाई जा रही हैं ताकि माघ मेला का हर कोना रोशन होता रहे। इसके अलावा संगम के घाट और प्रमुख चौराहों को हाईब्रिड सोलर लाइट लगाई जाएंगी जो पर्यावरण के अनुकूल हैं। आपात स्थिति के लिए डीजी सेट भी रहेंगे।

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