वाराणसी। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत ने वादमित्र द्वारा ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्त्विक सर्वेक्षण कराने के लंबित प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए 11 फरवरी की तिथि मुकर्रर की है। उसी दिन उक्त मामले में पक्षकार बनाये जाने के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई की जाएगी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से बीते 19 जनवरी को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर वादमित्र के तौर पर पक्षकार बनाये जाने की अपील की गई थी। गुरुवार को अदालत ने इस अपील पर आपत्ति प्रस्तुत करने का उभय पक्षों को अवसर देते हुए 11 फरवरी की तिथि मुकर्रर कर दी। उधर काशी विश्वेश्वरनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद विवाद की पोषणीयता को लेकर लंबित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए पांच फरवरी की तिथि मुकर्रर की है।
बता दें कि ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण तथा हिंदुओ को पूजा पाठ करने का अधिकार देने आदि को लेकर वर्ष 1991 में प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेवरनाथ की ओर से पक्षकार पं.सोमनाथ व्यास,हरिहर पाण्डेय आदि ने मुकदमा दायर किया था। सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) की अदालत में लंबित इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादमित्र पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी द्वारा दस दिसंबर 2019 को इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया गया कि कथित विवादित परिसर में स्वयंभू विश्वेश्वरनाथ का शिवलिंग आज भी स्थापित है। परिसर का धार्मिक स्वरुप तय करने के लिए संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर तथा कथित विवादित स्थल के संबंध में भौतिक तथा पुरातात्विक दृष्टि से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा राडार तकनीक से सर्वेक्षण तथा परिसर की खुदाई कराकर रिपोर्ट मंगायी जाए।



